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देश भर में बनेंगे विशेष पॉक्सो कोर्ट

जनता जनार्दन संवाददाता , Jul 25, 2019, 16:28 pm IST
Keywords: Special Posco Court   India   Supreme Court Dicision   सुप्रीम कोर्ट  
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देश भर में बनेंगे विशेष पॉक्सो कोर्ट

दिल्ली: देश में बच्चों के साथ यौन अपराध के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि जिन जिलों में इस तरह के लंबित मामलों की संख्या 100 से ज्यादा है, वहां 60 दिनों के भीतर विशेष पॉक्सो कोर्ट बनाए जाएं. इन अदालतों के गठन का खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी. ये अदालतें सिर्फ बच्चों के साथ यौन अपराध के मामलों की सुनवाई करेंगी.

बच्चों के साथ हुए यौन अपराध पर कार्रवाई के लिए 2012 में संसद ने विशेष कानून 'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस' यानी पॉक्सो पारित किया था. इसके तहत इस तरह के मामलों की जांच के लिए विशेष पुलिस टीम बनाने, हर जिले में विशेष कोर्ट के गठन जैसे प्रावधान हैं. लेकिन देश के ज़्यादातर जिलों में इन पर अमल नहीं हो पाया है. अब सुप्रीम कोर्ट ने ज़्यादा अपराध वाले जिलों में विशेष पॉक्सो अदालतों के गठन का आदेश दिया है.

इस साल के पहले छह महीने में पॉक्सो के तहत दर्ज हुई हैं 24,212 FIR

बच्चों से बलात्कार और यौन शोषण की बढ़ती घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट खुद ही संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है. कोर्ट ने मसले पर सुझाव देने के लिए वरिष्ठ वकील वी. गिरी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था. साथ ही कोर्ट की रजिस्ट्री से देश के हर जिले में लंबित पॉक्सो मामलों का ब्यौरा मांगा था.


रजिस्ट्री की तरफ से जुटाए गए आंकड़ों से कई अहम जानकारियां निकल कर सामने आईं. पता चला कि इस साल के पहले छह महीने में पॉक्सो के तहत 24,212 FIR दर्ज हुई हैं. इनमें से अब तक सिर्फ 6,449 में मुकदमा शुरू हो पाया है. पिछले सालों में दर्ज मुकदमों की संख्या को जोड़ दें तो लंबित मामलों की संख्या लाखों में है. यूपी में सबसे ज़्यादा 44,376 पॉक्सो केस लंबित है. मुकदमे के दौरान आरोप साबित होने को लेकर भी स्थिति बेहद खराब है. ओडिशा में तो महज 12 फीसदी मामलों में ही दोष साबित हो सका है.


कोर्ट की तरफ से नियुक्त एमिकस क्यूरी ने हालात बेहतर करने के लिए कई सुझाव कोर्ट में रखे. उन्होंने कहा :-


* पॉक्सो एक्ट के प्रावधान के मुताबिक बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों की जांच के लिए हर जिले में विशेष पुलिस टीम का गठन हो.


* हर ज़िले में विशेष पॉक्सो अदालत बनाई जाए. कोर्ट का माहौल बच्चों के अनुकूल रखा जाए.


* पॉक्सो मामलों को देखने के लिए अलग से सरकारी वकीलों की नियुक्ति हो. ये वकील बच्चों के प्रति संवेदनशील हों. उन्हें विशेष प्रशिक्षण मिले.


* पॉक्सो कोर्ट में सपोर्ट स्टाफ हो जो बाल मनोविज्ञान को समझता हो. ये स्टाफ कोर्ट परिसर में अलग से बने कमरे में पीड़ित बच्चे से बयान ले. जज और वकील वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए इसे देखें.


* जांच में तेज़ी लाने के लिए हर जिले में फॉरेंसिक टेस्ट लैब हो. ये लैब सिर्फ बच्चों के यौन शोषण से जुड़े सबूतों की जांच करे.


* मुकदमों का निपटारा साल भर के भीतर हो.


सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री से मिले आंकड़ों और एमिकस के सुझावों के आधार पर फिलहाल बच्चों के खिलाफ ज़्यादा यौन अपराध वाले जिलों में 60 दिन के भीतर विशेष पॉक्सो कोर्ट बनाने का आदेश दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने इन अदालतों का माहौल बच्चों के मुताबिक रखने और प्रशिक्षित सपोर्ट स्टाफ रखने को कहा है. आदेश में ये साफ किया गया है कि इन अदालतों के गठन का खर्चा केंद्र सरकार उठाएगी.


कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा है कि वो इस दिशा में हुई प्रगति का ब्यौरा 4 हफ्ते में उसे दें. मामले की अगली सुनवाई 26 सितम्बर को होगी.

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