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लोकसभा चुनाव 2019: यूपी जन अधिकार पार्टी से गठबंधन पर कांग्रेस में कलह

जनता जनार्दन संवाददाता , Mar 18, 2019, 11:45 am IST
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लोकसभा चुनाव  2019: यूपी जन अधिकार पार्टी से गठबंधन पर कांग्रेस में कलह

यूपी: लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने राष्ट्रीय जन अधिकार पार्टी से गठबंधन किया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने लखनऊ में इस फ़ैसले की जानकारी दी. समझौते में जन अधिकार पार्टी को सात सीटें मिली हैं. इनमें से दो पर पार्टी के नेता कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे. बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी से गठबंधन को लेकर कांग्रेस में विरोध शुरू हो गया है. लखनऊ में पार्टी के ऑफ़िस में कार्यकर्ताओं ने प्रियंका गांधी का घेराव किया. उनसे गठबंधन तोड़ने की मांग की. प्रियंका के सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह मामले को शांत कराया.

आख़िर ये बाबू सिंह कुशवाहा कौन हैं? जिनकी पार्टी से चुनावी समझौता करने पर कांग्रेस में बवाल मचा है. कुशवाहा कई सालों तक जेल में रहे. एनआरएचएम घोटाले में सीबीआई उनकी जांच कर रही है. बाबू सिंह कुशवाहा के ख़िलाफ़ राहुल गांधी ने धरना दिया था. वे लखनऊ में एनआरएचएम दफ़्तर तक चले गए थे. ये बात 2011 की है.

मायावती सरकार में ताक़तवर मंत्री रहे कुशवाहा के ख़िलाफ़ सीबीआई से लेकर ईडी जैसी एजेंसियां जांच कर रही हैं. हाल में ही उनके ख़िलाफ़ स्मारक घोटाले में भी केस दर्ज हुआ है. एनआरएचएम में गड़बड़ी के आरोप में मायावती ने उस समय के परिवार कल्याण मंत्री कुशवाहा को बर्खास्त कर दिया था. तो फिर ये कौन सी मजबूरी है कि करोड़ों के घोटालों के आरोपी से कांग्रेस ने रिश्ता जोड़ लिया है. यूपी में पार्टी के मीडिया प्रभारी राजीव बख़्शी कहते हैं हमने तो जन अधिकार पार्टी से समझौता किया है. इससे कुशवाहा का क्या लेना देना?

सच यही है कि बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी से गठबंधन के बाद कांग्रेस के कई नेता हैरान परेशान हैं. ख़ुद प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर इसके सख़्त ख़िलाफ़ थे. लेकिन पार्टी के एक बड़े नेता ने कुशवाहा के लिए कांग्रेस में जगह बना दी. इस बड़े नेता के गांधी नेहरू परिवार से अच्छे संबंध हैं. कांग्रेस के ही कई बड़े नेता पूछ रहे हैं “ आख़िर क्या डील हुई है “. सवाल इसी लिए उठ रहे हैं कि क्योंकि जिस कुशवाहा को राहुल गांधी भ्रष्टाचारी कहते थे. अब कांग्रेस ने उसी से हाथ मिला लिया है. तो फिर पार्टी किस मुंह से जनता के बीच जाएगी ? कांग्रेस के कई नेता इस गठबंधन के सख़्त ख़िलाफ़ हैं. कुछ तो इस नए रिश्ते के पीछे करोड़ों के लेनदेन की बातें भी कह रहे हैं.

मायावती सरकार में खनन और परिवार कल्याण मंत्री रहे बाबू सिंह कुशवाहा बांदा जिले के रहने वाले हैं. एक दौर था जब उनकी गिनती बीएसपी के टॉप 4 नेताओं में होती थी. उनका पूरा समय मायावती के घर पर ही बीतता था. लेकिन फिर दूरियां बढ़ती गईं. 2010 में एक सीएमओ की हत्या के बाद मायावती ने कुशवाहा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया. कुशवाहा ने बहनजी पर जान से मरवाने के आरोप लगाए.

एनआरएचएम घोटाले की सीबीआई जांच में उन्हें महीनों जेल में रहना पड़ा. बाद में विनय कटियार की मदद से वे बीजेपी में शामिल हो गए थे. सूर्य प्रताप शाही तब पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे. कुशवाहा को बीजेपी में शामिल कराए जाने पर पार्टी नेताओं ने ख़ूब हंगामा किया. भारी विरोध के कारण कुशवाहा को बीजेपी से निलंबित कर दिया गया. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले उनकी पत्नी शिवकन्या कुशवाहा समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं. ग़ाज़ीपुर से उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाया गया. लेकिन वे हार गईं. अब कांग्रेस से गठबंधन के बाद शिवकन्या की तैयारी चंदौली से चुनाव लड़ने की है. झांसी जैसी महत्वपूर्ण सीट भी कांग्रेस ने जन अधिकार पार्टी के लिए छोड़ दी है. जहां से पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप आदित्य जैन चुनाव लड़ना चाहते हैं. कुशवाहा जिस पार्टी के साथ गए, साथ कम ही दिनों का रहा. विरोध के भंवर में कांग्रेस से वे निभा पायेंगे? या फिर चुनावी दोस्ती की नैया बीच में डूब जायेगी?

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