निर्देशन ही नहीं एक्टिंग में भी माहिर थे ऋत्विक घटक

जनता जनार्दन संवाददाता , Feb 06, 2019, 8:57 am IST
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निर्देशन ही नहीं एक्टिंग में भी माहिर थे ऋत्विक घटक

दिल्ली: भारतीय सिनेमा जहां एक तरफ मनोरंजन का माध्यम रहा है वहीं दूसरी तरफ ये समाज की कड़वी सच्चाई दिखाने का जरिया भी रहा है. ऐसे कई फिल्म निर्देशक रहे हैं जिनकी फिल्मों में समाज की वो सच्चाई दिखती है जो कहीं ना कहीं आम जन से अछूती रह जाती है या फिर वाजिब दृष्टिकोण के साथ उन तक नहीं पहुंच पाती हैं. समानांतर सिनेमा में समाज के गंभीर मुद्दों पर हमेशा से काफी काम होता आया है. फिल्म निर्देशक ऋत्विक घटक भी ऐसे ही निर्देशकों में शुमार रहे हैं जिन्होंने फिल्मों के जरिए समाज के तल्ख दृश्यों को पेश किया. उनकी डेथ एनिवर्सरी पर बता रहे हैं ऋत्विक घटक के जीवन के कुछ रोचक किस्से.

रित्विक का जन्म 4 नवंबर, 1950 को ढाका में हुआ था. साल 1957 में ऋषिकेश मुखर्जी ने निर्देशन की शुरुआत की थी. उन्होंने फिल्म मुसाफिर में किशोर कुमार और दिलीप कुमार को कास्ट किया था. बहुत कम लोगों को पता होगा कि फिल्म की स्क्रिप्ट ऋत्विक घटक ने ही लिखी थी. फिल्म को काफी यूनीक ढंग से फिल्माया गया था. फिल्म को काफी पसंद किया गया था. मुसाफिर ऋत्विक के करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई थी.

फिल्म निर्देशन और स्क्रिप्ट राइटिंग के अलावा ऋत्विक कमाल के एक्टर भी थे. उन्होंने चिन्नामुल फिल्म में एक्टिंग की थी. रशियन फिल्म मेकर Vsevolod Pudovkin को फिल्म काफी अच्छी लगी थी. उन्होंने ऋत्विक के अभिनय की तारीफ की थी. साथ ही इस फिल्म को बाद में उन्होंने रशिया में भी रिलीज करवाया था.  इसके अलावा और भी फिल्मों में उनके अभिनय की प्रशंसा की गई.

रित्विक ने पुणे के फिल्म एंड टेलिवीजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में भी पढ़ाया था. इस दौरान उन्होंने फियर नाम की एक 35 मिनट की शॉर्ट फिल्म बनाई थी. फिल्म में एक इत्तेफाक ये था कि इसमें कॉमेडियन असरानी और डायरेक्टर सुभाष घई ने भी एक्टिंग की थी. बाद में दोनों अपनी अपनी फील्ड में जाना पहचाना नाम बने. उस दौरान दोनों इंस्टिट्यूट के भी विनर थे. ऋत्विक ने एक इंटरव्यू में ये भी कहा था कि वे हर दिन एक शॉर्ट फिल्म बना सकते हैं. स्टूडेंट्स के सीखने के लिहाज से ये एक अच्छी प्रेक्टिस हो जाती थी.

‘Ajantrik नाम से बनी उनकी इस बंगाली फिल्म को साइंस फिक्शन पर बनाई गई भारतीय सिनेमा की पहली फिल्म मानी जाती है. फिल्म को 1959 के Venice Film Festival में स्पेशल एंट्री मिली थी. इसके अलावा उन्होंने पांच प्ले भी लिखे. उन्होंने 'Charter' (Dalil), ‘Communication’ (Sanko), ‘Agony’ (Jwala), ‘Ablaze’ (Jwalanta) और ‘That Woman’ (Shei Meye) नाम के प्ले लिखे. थियेटर और सिनेमा के क्षेत्र में रित्विक का काम अतुलनीय और अव्वल दर्जे का रहा. 6 फरवरी, 1976 में 50 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.

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