कूड़े के ढ़ेर में कैसे करें स्वस्थ रहने की उम्मीद, तस्वीरें चंदौली के कमलापति त्रिपाठी अस्पताल की

जनता जनार्दन संवाददाता , Jan 05, 2019, 20:36 pm IST
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कूड़े के ढ़ेर में कैसे करें स्वस्थ रहने की उम्मीद, तस्वीरें चंदौली के कमलापति त्रिपाठी अस्पताल की चन्दौली: आमतौर पर लोग अस्पताल में इलाज करा कर स्वस्थ होने आते हैं अस्पताल में स्वच्छता का विशेष ध्यान भी रखा जाता है लेकिन अस्पताल में गंदगी और कूड़े का अंबार लगना शुरू हो जाए तो इसे आप क्या कहेंगे गंदगी भी ऐसी जो संक्रमण जनित बीमारियों को दावत दे। जी हां हम बात कर रहे हैं बायो मेडिकल वेस्टेज यानी मेडिकल कचरे की, जिसके निस्तारण के लिए सरकारी अस्पतालों द्वारा निजी कंपनियों को लाखों रुपए का टेंडर दिया जाता है ताकि मेडिकल कचरे को सही ढंग से ठिकाने लगाया जा सके लेकिन भ्रष्टाचार का आलम यह है कि अस्पताल प्रशासन द्वारा निजी कंपनियों को लाखों का टेंडर तो दे दिया गया लेकिन कचरे का निस्तारण महज कागजों पर ही सीमित रहा.

Note: आप हमारे यूट्यूब चैनल पे जाकर पूरी वीडियो देख सकते है.

#Video- 
https://www.youtube.com/watch?v=qv5_OU2iUt4


तस्वीरें चंदौली जिले के कमलापति त्रिपाठी जिला अस्पताल की है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में मेडिकल कचरे के निस्तारण के नाम पर लाखों का भ्रष्टाचार खुलेआम देखने को मिल रहा है।तस्वीरें बताने के लिए काफी है कि इस अस्पताल में पिछले कई महीनों से मेडिकल कचरा को उठाया नहीं गया और इसे जहां तहां फेंककर संक्रमण को दावत दिया गया बीमारियां बांट रहे इस अस्पताल में तैनात मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक इस संबंध में पूछा गया उन्होंने क्या कहा मैं खुद ही सुन लीजिए.

Note: आप हमारे यूट्यूब चैनल पे जाकर पूरी वीडियो देख सकते है.

#Video- https://www.youtube.com/watch?v=qv5_OU2iUt4


सुना आपने CMS करते हैं कि आते जाते उनकी नजर कचरे पर गयी लेकिन कई महीनों से जमे कचरे के निस्तारण अब तक हो नही पाया और सीएमएस साहब सिर्फ प्लान बनाते राह गए।जबकि मेडिकल वेस्टेज के निस्तारण के लिए शासन से लाखों रुपये आते है लेकिन तस्वीरे बताने के लिए काफी कि खर्च महज कागजो तक ही सीमित है।यह कचरा कई महीनों से यही जमा है और संक्रमण को दावत दे रहा है यह मेडिकल कचरा अस्पताल प्रशासन के भ्रष्टाचार की पोल ही नहीं नहीं खोल रहा बल्कि अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज के तीमारदारों को संक्रमण करें बीमारियां भी बांट रहा है.

सुना आपने कचरे को उठाने के लिए यहां भी निजी कंपनी को ठेका दिया गया है लेकिन निजी कंपनी द्वारा सिर्फ वही कचरे उठाए जाते हैं जो डिलीवरी के दौरान निकलते हैं जिसे यहां की भाषा में "पेशेंटा" कहते हैं इसके अलावा सिरिंज नीडल कॉटन बैंडेज एक्सपायरी दवाएं वगैरह के लिए अस्पताल प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है.

ऐसी ही व्यवस्था जिले के सभी अस्पतालो की है देखने वाली बात यह है कि क्या अस्पताल, जहां लोग रोग से मुक्ति पाने आते हैं इसी प्रकार लापरवाही करके लोगों को संक्रमण जनित बीमारियां मुफ्त में देते रहेंगे या कभी सरकार का ध्यान इस तरफ भी जाएगा.
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