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इंसानियत की मिसाल पेश करती एक पुलिस अफसर की कहानी

इंसानियत की मिसाल पेश करती एक पुलिस अफसर की कहानी
चंदौली: आपने अक्सर पुलिस के बारे में  नकारात्मक बाते सुनी होगी,लोग कहते है पुलिस की न दोस्ती अच्छी और न ही दुश्मनी अच्छी लोग कहते है पुलिस का साथ जुर्म को दबाने हेतु होता है पुलिस मानसिक पीड़ा देती है ।लेकिन सच्चाई ऐसी नही है।पुलिस महकमे में हमेशा से ऐसे अधिकारी रहे हैं जिनके काम काज  पर इनका महकमा तो इनपर गर्व करता ही है, साथ ही समाज भी गौरवान्वित होता है।
 
जी हां आज हम आपको ऐसे ही पुलिस ऑफिसर से रूबरू कराने जा रहे हैं जिन्होंने लीक से हटकर काम किया है और इनके कार्यो से पुलिस विभाग का भी सीना चौड़ा होता है।हम बात कर रहे हैं यूपी के चन्दौली जिले में तैनात डिप्टी एसपी त्रिपुरारी पांडेय की। त्रिपुरारी पांडेय चन्दौली के सकलडीहा सर्किल में डिप्टी एसपी के पद पर वर्तमान में तैनात हैं। इलाके के अपराधियों में इन नाम का जितना खौफ है उससे कही ज्यादा आम लोगो मे इनका सम्मान है।कारण है, पुलिसिंग के साथ साथ इनकी समाज सेवा।त्रिपुरारी पांडेय जहा भी तैनात रहते हैं वहां की सामाजिक ताना बाना को देखते हुए समाज सेवा भी करते रहते हैं। ये कभी स्कूल न जाने वाले घुमंतू बच्चों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने लगते हैं तो कभी गरीब लोगों की बहन बेटियों की शादी में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं।
 
साथ ही बाल दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस या दीवाली होली यह बच्चो और गरीबो के बीच जाकर अपना योगदान देते है।कभी भाई के रूप में कभी बेटा के रूप में बनकर यह लोगो की सहायता करते है।इसलिए अपराधी छवि के लोग इनको सब पर भारी त्रिपुरारी भी कहने से नही चूकते और जनपद के लोग चाहते कि उनके सर्किल में इनकी तैनाती मीले।
 
घायल को उठा पहुँचाया अस्पताल 
 
पहला वाक्या: यह वाक्या एक घायल का हैं मई 2018 में मुगलसराय के परमार कटरा के पास एक क्रूजर ने एक रिक्शा में धक्का मार दिया, जिस से मौके पर एक महिला सहित उसके 3 बच्चे घायल हो गए. क्रूजर इस कदर अनियंत्रित था की उसने वहां खड़े एक रिक्शे सहित एक ऑटो व चूड़ी के ठेले को टक्कर मार दी.
 
 मौके पर अफरा – तफरी मच गयी व मौके का फायदा उठाकर वाहन चालक भागने में सफल रहा. इसी दौरान वहां से गुजर रहे डिप्टी एसपी त्रिपुरारी पाण्डेय ने भीड़ भाड़ देखकर अपने वाहन से नीचे उतर गये. और भीड़ को हटाने लगे तभी देखा कि हादसे में घायल सकुराबाद निवासी अशफाक अहमद की 40 वर्षीय पत्नी शबनम व शबनम की बेटी सोनम (18 वर्ष), सोनी (16 वर्ष) व पुत्र अरशद (12 वर्ष) घायलावस्था में है सीओ साहब ने देर न करते हुए तत्काल अपने वाहन से पीपी सेन्टर पहुंचाया. सीओ ने घायल किशोर अरशद को खुद अपने गोंद में लेकर,अपनी गाड़ी से अस्पताल भेजवाया. यह देखकर लोगो में पुलिस के प्रति ईमानदारी दिखी।
 
दूसरा वाक्या: बच्चे के शव को गोंद में उठाकर करवाया पोस्टमार्टम
 
यूपी पुलिस की यह तस्वीर संवेदना और इंसानियत की अनोखा मिसाल पेश करती है. यह खाकी वर्दी का वो मानवीय चेहरा है, जो कभी-कभी ही सामने आता है.यह चेहरा कभी कभार ही देखने को मिलता है और जब मिलता है तो वो चन्दौली जनपद के डिप्टी एसपी त्रिपुरारी पाण्डेय के रूप में मिलता हैं
 
 
चंदौली में बिजली विभाग की लापरवाही से एक बच्चे की मौत हो गई थी. गुस्साए लोगों को समझाने पहुंचे डिप्टी एसपी साहब त्रिपुरारी पाण्डेय खुद घटनास्थल की तस्वीर देख भावुक हो गए. उन्होंने ना सिर्फ उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद की, बल्कि खुद बच्चे को गोद मे उठाकर पोस्टमार्टम करवाया.
 
इस बच्चे का नाम करिया था, जो अब जिंदगी को अलविदा कह चुका है. उसकी उम्र अभी महज आठ साल थी. वह अपने अंधे नाना-नानी का सहारा था. बिजली विभाग के कर्मचारियों की वजह से यह हादसा हुआ, जिसमें चार अन्य घायल भी हुए थे. इसमें दो बच्चे हैं.
 
मुगलसराय के चतुर्भुज इलाके में बिजली विभाग के लोग पेड़ कटवा रहे थे. अचानक पेड़ पोल पर जा गिरा, जिससे पोल सामने की दीवार पर गिर पड़ा. इससे दीवार भरभरा कर गिर गई. दीवार के मलबे में वहां से गुजर रहे पांच लोग दब गए, जिनमें करिया की मौत हो गई.
 
लोगों का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही से यह घटना हुई. ऐसे में आक्रोशित लोगों ने मुगलसराय चतुर्भुजपुर मार्ग पर जाम लगा दिया. वे शव रख कर आलाधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए.तब सीओ साहब ने मामले को सुलझाया था।
 
दरियादिली दिखाते हुए डिप्टी एसपी त्रिपुरारी पाण्डेय ने जब अंधे परिजनों को देखा तो खुद भावुक हो गए. उन्होंने परिजनों को समझाया और अपनी जेब से आर्थिक मदद की. यहां तक कि उन्होंने खुद शव को अपनी गोद मे उठाया और उसका पोस्टमार्टम कराने हेतु ले गए.
 
तीसरा वाक्या: जब बचाये 2 बच्चियों की जान, वेतन से कराया इलाज
 
त्रिपुरारी पांडेय की सराहना एक अच्छे पुलिस अधिकारियों के रूप में इलाके में की जा रही है। उसकी वजह ये कि इस पुलिस अधिकारी ने अपने वेतन के पैसे से दो बच्चियों का इलाज कराकर उनका जीवन बचाने का काम किया है।
 
दरअसल बीते 2 सितंबर जन्माष्टमी के दिन सकलडीहा कोतवाली क्षेत्र के नरैना गांव में देर शाम दो बच्चियां 5 वर्षीय अंजना और 6 वर्षीय अंतिमा सड़क के जरिए दुकान पर जा रही थी कि अचानक एक अनियंत्रित बाइक ने दोनों को जोरदार टक्कर मार दिया। दोनों गंभीर अवस्था में अचेत हो गई | घटना की सूचना मिलते ही मौके पर सकलडीहा कोतवाली सहित सकलडीहा सीओ त्रिपुरारी पांडे पहुंचे | दोनों बच्चियों की स्थिति देख परिजन रोने चिल्लाने लगे | तत्काल सीओ सकलडीहा त्रिपुरारी पांडेय दोनों बच्चियों को अपनी गाडी से लेकर जिला अस्पताल पहुंचे | जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बच्चियों की हालत गंभीर देख उन्हें तत्काल वाराणसी के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया |
 
दोनों बच्चिया दलित परिवार से हैं और दोनों के मां-बाप बेहद गरीब है जो मजदूरी का काम कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं | ट्रामा सेंटर में भर्ती होने के बाद दोनों बच्चियों का इलाज शुरू हुआ लेकिन बच्चियों के मां-बाप की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी की वो बच्चियों इलाज का खर्च वहन कर पाए मामले की जानकारी होते ही तत्काल सीओ सकलडीहा ने एक सिपाही के जरिए अपना एटीएम बच्चियों के परिजनों के पास भेजा और उन्हें आश्वस्त दिया कि जितने भी पैसे की जरूरत हो इस एटीएम के जरिए निकालकर बच्चों का समुचित इलाज कराये | आपको जानकर हैरानी होगी की बच्चियों के इलाज पर एक लाख बारह हजार रूपये खर्च हुए और सीओ सकलडीहा ने अपने वेतन से पूरा खर्च वहां किया |
 
20 दिन बाद दोनों बच्चियां वाराणसी बीएचयू ट्रामा सेंटर से डिस्चार्ज हुई और अपने घर लौटी | अंजना और अंतिमा के परिजन सीओ साहब के इस सहयोग के कारण अपनी बच्चियों को पाकर जहां फूले नहीं समा रहे हैं | वही सीओ साहब का धन्यवाद करते हुए नहीं थक रहे हैं | यहां तक कि उनकी आंखों में आंसू तक आ जा रहे हैं | परिजनों का कहना है की सीओ साहब नहीं होते तो हमारी बच्चियां आज नहीं बच पाती और दोबारा हमारे घर में खुशियां नहीं लौट पाती | हम इतने गरीब हैं कि हम इतना महंगा इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे | अब इन बच्चियों के माता-पिता और इलाके के लोग सीओ की इस मदद की खूब सराहना कर रहे हैं।
 
त्रिपुरारी पाण्डेय की समाज सेवा की ललक यही नहीं रुकी लिटिल फॉक स्कूल मुगलसराय में गरीब परिवार का लड़का पढता है शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत सबको पढ़ने का अपना हक है वावजूद फीस न भर पाने के वजह से स्कूल प्रबंधन ने उस बच्चे को निकाल दिया।इसकी चर्चा और प्रमुखता से मीडिया में छाया रहा।इसकी जानकारी त्रिपुरारी पाण्डेय जी को हुई उन्होंने उस बच्चें को फीस देकर दुबारा उसी स्कूल में दाखिला दिलाया और कहाँ जब तक जितना बच्चा यह पढ़े उसकी पूरी फीस वह तब तक देंगे।परिवार के आंखे नम हुई और उन्होंने डिप्टी एसपी त्रिपुरारी पाण्डेय का धन्यवाद दिया।
 
शहीद चंदन रॉय की पत्नी से बंधवाते राख जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में पाक की फायरिंग में शहीद हुए चंदन राय की 30 अप्रैल को शादी होनी थी। 20 फरवरी को तिलक था, जिसके लिए 15 फरवरी को वह छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। उससे पहले ही जनवरी में हमले में चंदन राय शहीद हो गए,त्रिपुरारी पाण्डेय ने न सिर्फ परिजनों को ढांढस बनाया बल्कि शहीद चंदन की पत्नी को बहन मानकर उनसे राखी बंधवाने और हर त्यौहार पर पहुँच कर उनके बीच मिठाई ,वस्त्र आदि भेंट करते हैं।
 
त्रिपुरारी पाण्डेय पुलिस विभाग में कार्यरत तो जरूर हैं लेकिन महज अपवाद जहाँ एक ओर गाली देते हैं लोग पुलिस को वहीं जनपद के लोग इनको आदर्श मानते और कहते है त्रिपुरारी पाण्डेय जी अगर होते तो फला थाना फला काम आसानी से हो जाता।सकलडीहा क्षेत्र की जनता के लिए त्रिपुरारी पाण्डेय एक मसीहा बनकर उभरे हैं।
 
फ्रेंड्स फॉरएवर के तहत डीजीपी ओमप्रकाश सिंह ने इनके कार्यो की भी सराहना की है और  इनका बाल दिवस के रूप में बच्चो के बीच पहुचना अमूल्य योगदान साबित हुआ हैं.
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