बोलों बाबा कीनाराम की जय: जब संतों की थाली से आने लगी मछली और मदिरा की महक

अमिय पाण्डेय , Nov 29, 2018, 14:53 pm IST
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बोलों बाबा कीनाराम की जय: जब संतों की थाली से आने लगी मछली और मदिरा की महक Desk JJ: कहते हैं भगवान लीलाधारी होते हैं वह आज भी इस धरा पर सन्त महात्माओं के रूप में चमत्कारिक लीलाएं करके धर्म की मौजूदगी का प्रमाण देते रहे हैं।सत, रज और तम तीनों रूप में भगवान अलग-अलग स्वरूपों में भक्त की श्रद्धा को स्वीकार करते हैं। ब्रह्माण्ड में औघड़ स्वरूप में भगवान शिव की पूजा होती है और अघोराचार्य बाबा कीनाराम को उन्ही का स्वरूप माना गया है। 21 वीं सदी में बाबा कीनाराम ने कई चमत्कारिक लीलाएं की। बताया जाता है कि एक बार  काशी में ईश्वरगंगी पर बाबा लोटादास का भंडारा हो रहा था। काशी के सभी संत-महात्मा निमंत्रित थे। यहां के सुप्रसिद्ध महात्माओं में महाराज श्री कीनाराम जी ने, तीर्थों में संपर्क और संबंध होने के नाते, लोटादास जी की सहायता की थी। बाबा लोटादास द्वारा निमंत्रण नहीं दिए जाने पर भी महाराज श्री कीनाराम, बाबा लोटादास की मठिया पर पहुंच गए और वहां चुपचाप बैठे हुए थे। जब ब्रह्मभोज शुरू हुआ और प्रसाद परोसा जाने लगा, पत्तलों में मछलियां कूदने लगीं और जल में शराब की गंध आने लगी। हाय तौबा मचा। कुछ व्यक्तियों ने बाबा लोटादास से निवेदन किया कि बाबा कीनाराम यहीं बैठे हुए हैं, उन्हें पहले बुलाकर खिलावें, सब उपद्रव शांत हो जाएंगे।

बाबा लोटादास ने महाराज श्री कीनाराम का अभिवादन किया और उन्हें प्रणाम निवेदित किया। उन्होंने अघोराचार्य महाराज श्री कीनाराम से भंडारा को पूर्ण और सफल करने के लिए आशीर्वाद मांगा तथा कृत्यों को हटा लेने का अनुरोध करते हुए संकल्प लिया कि पहले अघोराचार्य कीनाराम को भोजन कराएंगे। तत्पश्चात महाराज श्री कीनाराम ने ‘हुम्’ शब्द का उच्चारण किया। और इसके मानो चमत्कार हो गया हो। ब्राह्मणों की पत्तलों पर सब्जी के रूप में तैर रही मछलियां बदल गईं, जल में परिवर्तन हो गया और वह सुगंधित हो गया। बाबा लोटादास ने क्षमा मांगी। बाबा कीनाराम ने कहा — “तुमने तो कहा था, खिलाओगे। एक पात्र तो खाने दो।” बाबा लोटादास ने कहा — “आपकी ऋद्धियों के सामने हमारी निर्वस्त्रता पर दया होनी चाहिए।” प्रसन्न होकर गुरुदेव श्री कीनाराम ने आशीर्वाद दिया और कहा — “तुम अपनी पूरी-दही भंडार में देखो।” बाबा लोटादास ने देखा कि जितना खाद्य-पदार्थ बना था उसका चौगुना भंडार में भरा पड़ा था।
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