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जब एसडीएम को आभास हुआ बाबा की आध्यात्मिक ताकत का

अमिय पाण्डेय , Nov 20, 2018, 10:34 am IST
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जब एसडीएम को आभास हुआ बाबा की आध्यात्मिक ताकत का
संत जितना शांत रहते है उतने ही शक्तिशाली होते है।  संत तो हमेशा भगवान से मिलाने और जीवन जीने की कला आध्यात्मिक तरीके से सिखाते है। यह भी एक कि यदि उनके सम्मान में कोई कमी आई तो वह उग्र रूप भी धारण कर लेते है। 
 
बताया जाता है कि ऐसे ही एक बार बाबा कीनाराम के शिष्य और अघोरेश्वर भगवान राम ने वर्ष १९५२ में हरिहरपुर में ‘विष्णु-यज्ञ’ का आयोजन रखा।  इस यज्ञ में,’ झूंसी के नाथ बाबा’ के लिए सबसे ऊंचा आसन स्थापित किया गया था। यह यज्ञ शुरू होने के चंद दिन पहले बनारस जिले के सब-डिवीजन मजिस्ट्रेट पूज्य अघोरेश्वर से मिलने पहुंचे ।
 
एस.डी.एम. साहब बड़े रूतबे में आये और बिना जूता उतारे ही नाथ-बाबा के आसन पर जा बैठे। सेवकों और श्रद्धालुओं के समझाने के बाबजूद भी एसडीएम साहब ,मानने को तैयार नहीं हुए और बोले ,”अरे हटो! हम बाबा-माई बहुत देखे हैं।” इसकी जानकारी महाप्रभु को दी गई , पूज्य अघोरेश्वर ने आदेश दिया कि आपलोग पुनः एस.डी.एम.साहब से विनती करें। बार-बार विनती करने के बाबजूद भी जब कोई असर नहीं हुआ तो उनके ढ़िठाई से महाप्रभु रुष्ट हो गए।  
 
अघोरेश्वर ने कहा,”अच्छा ! तो ऐसी बात है ?” बाबा ने उठकर झंडी-पताका में से 1 बांस उखाड़ लिया। इतना होते ही एस.डी.एम. साहब आसन के उपर धड़ाम से जमीन पर आ गिरे।एस.डी.एम. साहब तमतमाते हुए पास के पुलिस चौकी पर गये। चौकी – इंचार्ज से बाबा को गिरफ्तार करने का आदेश दिया। “थाना-इंचार्ज ने कहा त्यागपत्र दे सकता हुं परंतु यह काम नहीं कर सकता ।” इस जबाब को सुनकर एस.डी.एम. चहनिया से चंदौली पुलिस चौकी पहुंचे। पर यहां भी वही ज़बाब मिला। तब एस.डी.एम.साहब पी.ए.सी.की 2 गाड़ियों में जवान भरकर वापस लौटे। जैसे ही जीप यज्ञ-भूमि की सड़क पर चढ़ी-बिना किसी आंधी-तुफान के,उलट गई।
 
जीप उपर और एस.डी.एम.साहब उसके नीचे। तब उनका माथा ठनका,और उनको महाप्रभु की महिमा समझ में आने लगी। किसी तरह बाहर आये और ग्लानि का भाव लिए लोगों से बाबा से मिलने का आग्रह किया।
 
जैसे ही यह बात महाप्रभु तक पहुंची, “बाबा उनको तुरंत, एक-मिनट भी विलंब किये बिना, उनके पास पहुंचे ।’ पूज्य अघोरेश्वर ने उनसे कहा,” दर्शन तो आप बाद में कीजियेगा । अभी आप जितना तेजी से जीप दौड़ा सकते हैं, उतनी तेजी से दौड़ाकर कबीरचौरा अस्पताल जाइये। वहां आपका बड़ा लड़का भर्ती पड़ा हैं । अगर आप एक-डेढ़ घंटे के अंदर उसको हम तक नहीं ले आते हैं,तो बात हमारे हाथ से निकल जायेगी।  एस.डी.एम.साहब ने सोचा महाप्रभु धमका रहे हैं। 
 
उन्होंने सिवील-सर्जन को फोन किया । सिविल सर्जन ने बतलाया,”आप जल्दी आ जाईये,आपका बड़ा लड़का हमारे हाथ से निकला ही जा रहा है।” तब एस.डी.एम. साहब ने कहा “आप उसको एंबुलेंस में लिटाकर , जितनी जल्दी हो सके , बाबा के पास यहां ले आइये।” उस लड़के को कालरा हो गया था और सौभाग्यवश लड़का समय के भीतर महाप्रभु के पास पहुंच गया। महाप्रभु ने उस लड़के को प़साद दिया ,और उसकी जान बच गई। 
 
इसके बाद एस.डी.एम.साहब महाप्रभु के अनुयायी बन गये। यद्यपि एस.डी.एम.साहब ने बाबा का अनादर किया, फिर भी करूणासिंधु-बाबा ने उनके लड़के को अकाल-मृत्यु से बचा लिया। किसी भक्त कवि ने ठीक ही लिखा है कि,”संत न छोड़े संतई,कोटिक मिलैं असंत ।”
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