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किसानों को हुआ कष्ट तो सूखती फसल के साथ विकास भवन पर किया हंगामा

किसानों को हुआ कष्ट तो सूखती फसल के साथ विकास भवन पर किया हंगामा
चंदौली: चन्दौली जिले के विकास भवन में आज उस समय अफरातफरी मच गई जब जिले के किसान पानी के अभाव में  अपनी सुख रही फसल के साथ हंगामा करने लगे वैसे तो जिले के कुसानो के साथ अधिकारियों की यह बैठक हर महीने होती है जिसमे किसान अधिकारियों से उनकी समस्यायों का जायजा लेते है लेकिन आज की किसान बैठक के लिए किसान पहले से तैयारी कर के बैठक में पहुचे थे और साथ मे अपनी सुख रही फसल को भी लेकर आये थे आज की बैठक शुरू होते ही किसान हंगामा करने लगे और सी डी ओ डॉ अभय श्रीवास्तव को अपनी सुखी धान की फसल सौप कर अपना दर्द बताया और बैठक का वहिष्कार कर वापस चले गए.
 
वैसे तो चन्दौली को कृषि प्रधान जनपद और धान का कटोरा कहा जाता है लेकिन यहां के अन्न दाता किसानों का ये आक्रोश और हंगामा और इनके  हाथ में इनकी खेत मे पानी के अभाव में सूख रही धान की फसल का ये हाल बताने को काफी है कि यहां सब कुछ ठीक नही चल रहा है दरअसल विकास भवन में प्रत्येक माह किसान दिवस का आयोजन किया जाता है जिसमे जिले के अधिकारी किसानों से रूबरू होते है.
 
किसानों को भी शायद इसी दिन का इंतजार था पानी के आस में खेत मे सुख रही उनकी खून पसीने की कमाई का ये हाल जब उनसे सहन नही हुआ तो वे आज की बैठक में आये तो जरूर लेकिन अपना दर्द बयां करने के लिए वो अपने साथ अपनी सुख रही धान की फसल को भी ले आये और सी डी ओ डॉ अभय श्रीवास्तव ने ज्योही बैठक की शुरुआत करते हुए किसानों से उनकी परेशानी पूछी तो इसे बताने के लिए उन्होंने सी डी ओ को सुखी धान की फसल सौप दिया और हंगामा करते हुए बैठक का बहिष्कार कर वहां से चले गए 

इस संबंध में किसानों का साफ तौर पर कहना था कि सिचाई विभाग द्वारा कई बार सूचना देने के बाद नहरों को चलाया तो जरूत गया है लेकिन नहरों का पानी टेल तक नही पहुँच रहा है जिससे किसानों के खेतों में लगी धान की फसल सुख रही है 
 
वही इस संबंध में जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल अलग ही तर्क दे रहे है उनका कहना है कि इस वर्ष अपेक्षा के अनुरूप काफी कम वर्षा होने के कारण नहरों का पानी टेल तक नही पहुच पा रही है जिसे गंभीरता से लिया जा रहा इसके लिए किसानों के साथ लंबी बैठक कर उनकी समस्यायों का समाधान निकालने के अधिकारियों को निर्देश देने की बात कर रहे है ऐसे में  किसानों उनकी खेतो तक कब तक पानी पहुचती है और उनकी सुख रही खून की पसीने की कमाई बच पाती है या नही ये देखने वाली बात होगी !
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