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'ब्रेकिंग: रुपया गिरकर 73.77 पर पहुंचा, यह टूट नहीं रहा है-टूट चुका है', राहुल गांधी का कटाक्ष

जनता जनार्दन संवाददाता , Oct 04, 2018, 18:39 pm IST
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'ब्रेकिंग: रुपया गिरकर 73.77 पर पहुंचा, यह टूट नहीं रहा है-टूट चुका है', राहुल गांधी का कटाक्ष नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत अब तक के न्यूनतम स्तर पर चले जाने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि रुपये की कीमत टूट नहीं रही है, बल्कि टूट चुकी है।

गांधी ने ट्वीट कर कहा, ' ब्रेकिंग: रुपया गिरकर 73.77 पर पहुंचा। यह टूट नहीं रहा है-टूट चुका है।' उन्होंने रुपए की कीमत में गिरावट को लेकर बुधवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था और सवाल किया था कि महंगाई को लेकर जनता के हाहाकार पर ‘56 इंच के सीने वाले’ खामोश क्यों हैं?

गांधी ने ट्वीट कर कहा था, ‘रुपया गया 73 पार, महँगाई मचाए हाहाकार। तेल-गैस में लगी है आग, बाजार में मची भागम-भाग। वो 56 इंच के सीने वाले का कब तक चलेगा साइलेंट मोड, कहाँ है- अच्छे दिन का कोड?’

दरअसल, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर गुरुवार को 73.77 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को रुपया 43 पैसे गिरकर 73.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।

इस बीच कांग्रेस प्रवक्ता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि इसे कहते हैं 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। महंगाई आज हाथी के समान और कटौती चींटी के समान, इसीलिए देश कहता है कि मोदी सरकार बेईमान।

पाँच राज्यों में चुनावी हार को सामने देख और जनता के भयंकर गुस्से से घबराकर आज मोदी सरकार ने चींटी जैसी मात्रा में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में सेंट्रल एक्साईज कम करने की घोषणा की। ये इसी प्रकार से है कि जैसे किसी को सजा-ए-मौत सुना दीजिए और फिर कहिए कि तुम खुश हो जाओ क्योंकि अब तुम्हारी सजा-ए-मौत उम्रकैद में हमने कम कर दी है। मोदी जी आप जनता का बेवकूफ अब नहीं बना सकते और महत्वूपर्ण सवालों का जवाब पेट्रोल-डीजल की लूट पर आपको देना पड़ेगा।

पहली बात,  जवाब दीजिए देश को कि आपने सेंट्रल एक्साईज और कस्टम से 52 महीने में देश की जनता की जेब काटकर 13 लाख करोड़ क्यों लूटा? आज वित्त मंत्री जेटली जी ने कहा कि सरकार की आय इसलिए बढ़ गई क्योंकि उनका टैक्स बेस बढ़ गया। जेटली जी का नाम ‘जेट लाय’ शायद इसलिए देश के लोगों ने रख दिया है क्योंकि वो आए दिन झूठ बोलते हैं। हम आपको एक चार्ट रिलीज कर रहे हैं, जो पेट्रोल कंपनी की बैलेंस शीट से और सरकार की बैलेंस शीट से लिया गया है और ये दिखाता है कि 14-15, 15-16, 16-17, 17-18 और 18-19 के 6 महीने में जो भारत सरकार ने पैसा एकत्रित किया है, वो बनता है 12 लाख और 76 हजार करोड़ रुपए या लगभग 13 लाख करोड़, पर जेटली जी कहते हैं कि टैक्स बेस बढ़ गया। तो वित्त मंत्री जी का सबसे बड़ा झूठ उनके अपने दस्तावेज से आज हम देश के सामने लेकर आ रहे हैं।

दूसरी बात, क्या प्रधानमंत्री मोदी और वित्त मंत्री बताएंगे कि उन्होंने केन्द्रीय एक्साईज ड्यूटी में 52 महीने में 12 बार इजाफा क्यों किया? मई, 2014 के बाद पेट्रोल पर एक्साईज ड्यूटी 211 प्रतिशत बढ़ा दी और डीजल पर 443 प्रतिशत। मई, 2014 में जब कांग्रेस ने सरकार छोड़ी तो पेट्रोल पर सेंट्रल एक्साईज ड्यूटी मात्र 9 रुपया 23 पैसे थी, जो अब बढ़ाकर 19 रुपया 48 पैसे कर दी गई है। लगभग 10 रुपए लीटर की बढ़ोतरी। 2014 में जब कांग्रेस ने सरकार छोड़ी तो डीजल पर केन्द्रीय एक्साईज ड्यूटी मात्र 3 रुपए 46 पैसे लीटर थी, जो मोदी सरकार ने 52 महीने में बढ़ाकर 15 रुपया 33 पैसे प्रति लीटर कर दी, यानि 12 रुपया लीटर का इजाफा है। एक्साईज ड्यूटी 12 बार बढ़ाने के बाद अब आप डेढ़ रुपया लीटर कम करके झूठी वाहवाही लूट रहे हैं। इसका क्या मतलब है?

तीसरी बात, आज वित्त मंत्री ने दुहाई दे ड़ाली कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान को इसलिए छू रही हैं और जनता की जेब इसलिए लूट रहे हैं क्योंकि कच्चे तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। ये सही है, आज कीमते 86 डॉलर प्रति बैरल है। परंतु वित्त मंत्री जी और प्रधानमंत्री जी, अब हम चुनौती देते हैं, देश को ये भी बताएं कि 52 महीने में औसत कच्चे तेल की कीमत बीजेपी सरकार में क्या रही? अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसत कीमत मोदी सरकार के दौरान आती है मात्र 58 डॉलर प्रति बैरल। 40 डॉलर तक भी गई और आज 86 पर है, औसत आती है 58 डॉलर प्रति बैरल। मोदी जी क्या आप भूल गए, जेटली जी क्या आप भूल गए कि कच्चे तेल की कीमत कांग्रेस सरकार में औसतन 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रही। 2008 में जब कांग्रेस की सरकार थी और जब आप गैस सिलेंडर और पेट्रोल पंप पर प्रोटेस्ट करते थे तो कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल तक गई। आज तो 86 डॉलर पहली बार पहुंची है और आप आज ही दुहाई दे रहे हैं और जब 107 डॉलर कच्चे तेल की कीमत थी तो पेट्रोल की कीमत 71 रुपया 41 पैसे लीटर थी और डीजल की कीमत 55 रुपया 49 पैसे लीटर थी, जो आज 84 रुपया और 75 रुपया को पार कर गई है। इसका जवाब कब देंगे?

मोदी जी ये जवाब देना पड़ेगा कि जहाँ आप भारत के लोगों के ऊपर अनाप-शनाप पेट्रोल और डीजल की कीमतों का बोझ डाल रहे हैं, आप 29 देशों को सस्ता पेट्रोल और डीजल क्यों बेच रहे हैं? आरटीआई के जवाब में मोदी सरकार ने बताया कि वो 15 विदेशी देशों को मात्र 34 रुपया लीटर में पेट्रोल बेच रहे हैं, जो भारतवासियों को दिल्ली में, जिसकी कीमत 84 रुपया लीटर अदा करनी पड़ती है, यानि लगभग 50 रुपया लीटर अधिक, ऐसा क्यों?

मोदी जी ने एक आरटीआई जवाब में बताया कि 29 विदेशी मुल्कों को मोदी सरकार मात्र 37 रुपया लीटर में डीजल बेच रही है, पर जब किसान दिल्ली और यूपी बॉर्डर पर डीजल की कीमतें कम करने के लिए आएगा तो उसको लाठियाँ मिलेंगी क्योंकि यहाँ डीजल की कीमत 75 रुपया लीटर है।

पाँचवा, आपने ये कहा कि प्रांतीय सरकारें टैक्स कम कर दें। पर ये बताना भूल गए कि सबसे ज्यादा लूट, लोगों से लूट-खसूट और लोगों की जेब पर डाका डालने का काम तो भारतीय जनता पार्टी की सरकारें कर रही हैं। हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा पेट्रोल और डीजल पर वैट छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, असम और हरियाणा में है। और यहाँ पर किसका शासन है, भाजपा का। पेट्रोल पर तो जो आज थोड़ा सा कम किया, महाराष्ट्र में लगभग 39 प्रतिशत वैट है और औसत वैट कहीं भी 28 से 35 प्रतिशत से कम कहीं नहीं और यही डीजल का हाल है। तो वो लाखों-करोड़ रुपया दिल्ली में मोदी सरकार लूटती है, प्रांतों में भाजपा की प्रांतीय सरकारें लूटती है और आप कहते हैं रेट कम करेंगे। वो कैसे?  

और ये भी बता दें लगे हाथ कि देश की गृहणियाँ जिनको रसोई गैस की मार, जिनके बजट को आए दिन खा रही हैं, उसका हल क्या होगा? 14 किलो का एक नॉन सब्सिडी सिलेंडर जब हमने सरकार छोड़ी तो मई, 2014 में 414 रुपए का था और मोदी जी ने परसों ही 59 रुपए बढ़ाकर अब इसे 879 रुपए का कर दिया है। यानि 52 महीने में 414 रुपए का सिलेंडर 879 रुपए का किया है, 465 रुपए का इजाफा। 465 रुपए 52 महीने में बढ़ा दिए, 112 प्रतिशत से भी अधिक कीमतों में इजाफा।

सब्सिडी सिलेंडर जब कांग्रेस ने सरकार छोड़ी तो मात्र 412 रुपए का था, आज वो 502 रुपए का है। यानि 90 रुपए का इजाफा। क्या यही अच्छे दिन हैं? प्रश्न बड़ा सीधा है।

ये भी बता दें कि मिट्टी का तेल जो इस देश के करोड़ों गरीबों का आज भी उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओडिशा, बंगाल और अन्य प्रांतों में इंधन है, उसका क्या किया? जब कांग्रेस ने सरकार छोड़ी तो जो मिट्टी का तेल 14 रुपए 96 पैसे, लगभग 15 रुपया था, आज उसकी कीमत भी पौने 27 रुपए है, 26 रुपए 61 पैसे।

ये भी बता दें कि वो इंधन जिसमें हमारे पत्रकार साथी भी जो मोटर साईकिल, स्कूटर और कार में डलवाकर आते हैं, जिससे आम आदमी इधर से उधर का सफर बसों से तय करता है, सीएनजी, उसकी कीमतें आपने बेइंतहाशा क्यों बढ़ा दी? 35 रुपए किलो पर सीएनजी थी, आज 40 रुपए से अधिक है, 52 महीने के बाद और अभी हाल में जो प्राकृतिक गैस में इजाफा हुआ है, उसका लगभग एक से डेढ़ रुपए इम्पैक्ट अगले एक हफ्ते में और आने वाला है।

और रुपया मोदी जी की उम्र को कब का पार कर चुका। कल 73 रुपए 25 पैसे था, आज 73 रुपए 77 पैसे है। लगता है कि शाम तक 74 पार कर जाएगा। अब होड़ ये लगी है, मार्गदर्शक मंडल को पेट्रोल तो क्रोस कर गया, डीजल क्रोस करने वाला है। तो मार्गदर्शक मंडल की उम्र को रुपया कब पार करेगा? इसलिए 900 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। डरकर एक या डेढ़ रुपए की और एक रुपए पेट्रोल कंपनियों से राहत मत दिलवाईए। 2014 की कीमतें वापस लेकर आईए और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करवाईए। ये हमारी बड़ी सीधी मांग है।

कांग्रेस शासित राज्यों में वैट कम करने से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ‘फ्यूल लूट’ सरकार ये जान ले कि भारत बंद का आह्वान जब कांग्रेस समेत अन्य राजनैतिक दलों ने किया था, तो उसी समय कर्नाटक की कांग्रेस और जनता दल की सांझी सरकार ने जनता को राहत देने के लिए कर्नाटक में वैट कम कर दिया था, ये बात बहुत पुरानी नहीं है इसी माह की है जो पिछला माह गया है। इसी प्रकार से, पश्चिम बंगाल में वहां की मुख्यमंत्री और वहाँ की टीएमसी की सरकार ने सुओ मोटो वैट में जनता को राहत दी। इसी प्रकार से, आन्ध्र प्रदेश में भाजपा विरोधी टीडीपी ने भी सुओ मोटो राहत दी। कांग्रेस की बाकी सरकारें भी जनता को राहत देने पर अपने तौर से जरुरी कदम उठाएंगी परंतु जैसा मैंने आपको बताया 21 प्रांतों में, जो कहते हैं कि हमारी सरकारें हैं और केन्द्र में जिनकी सरकार है, वो 40-40 प्रतिशत वैट, 35-35 प्रतिशत वैट पेट्रोल और डीजल पर क्यों लगा रहे हैं? और कई ऐसे प्रांत हैं भाजपा के, जिन्होंने पिछले 52 महीनों में पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाया है। उदाहरण के तौर पर, हरियाणा में सवा नौ प्रतिशत प्रति डीजल पर हम वैट छोड़कर गए, भाजपा सरकार ने उसे आते ही 17 प्रतिशत कर दिया। पेट्रोल पर वैट बढ़ाकर 26 प्रतिशत कर दिया और जनता की जेब काटकर लगभग 30-40 हजार करोड रुपए अतिरिक्त बटोर लिए। 13 लाख करोड़ रुपए मोदी सरकार ने बटोर लिए और लगभग इतना ही पैसा भाजपा की सरकारों ने वैट लगाकर लूट लिया और मोदी जी और जेटली जी कहते हैं हमारा टैक्स बेस बढ़ गया है। 26 लाख करोड़ की लूट से टैक्स बेस तो बढ़ेगा ही इसका जवाब भी दे दें, लगे हाथों।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सलाहकार द्वारा दिए गए बयान से संबंधित एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि अगर बांग्लादेश, जो हमारा पड़ोसी देश है और जिसे हम मित्र देश मानते हैं, उसके प्रधानमंत्री के सलाहकार एक औपचारिक बयान वहाँ के प्रधानमंत्री की तरफ से दे रहे हैं और अगर ये बयान सही है तो भाजपा का दोगलापन और प्रधानमंत्री जी का छल और कपट साबित हो गया है। अब इस बात में सच्चाई है या नहीं, इसका जवाब केवल मोदी जी को देना पड़ेगा या वो फिर राफेल की तरह, जैसे वहाँ फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा होलांदे की बात का आज तक जवाब नहीं दिया है। क्या वो बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को भी उन्होंने जो छल और कपट की बात, यानि जिस प्रकार की दोहरी नीति वो अपना रहे हैं, एक स्टैंड असम में है और एक स्टैंड बांग्लादेश के साथ है, उसका जवाब तो प्रधानमंत्री जी स्वयं दें तो अच्छा होगा।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में श्री सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में अब खट्टर सरकार का शासन नहीं, अपराधियों का शासन है। वहाँ कानून का शासन नहीं, संगठित अपराध का शासन है और शायद देश की सबसे निकम्मी, नाकारा, निखट्टू और नाकामयाब सरकार खट्टर सरकार साबित हुई है।
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