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डॉ. संजय गुप्ताः लाखों चेहरों पर मुस्कान बिखेरने वाले 'खुशहाली गुरु'

डॉ. संजय गुप्ताः लाखों चेहरों पर मुस्कान बिखेरने वाले 'खुशहाली गुरु'  वह बाबा भोलेनाथ के भक्त हैं और काशी में रहते हैं. बाबा हर हर महादेव उनके लिए मंत्र वाक्य से कहीं अधिक है. वह किसी शिव मंदिर के पुजारी नहीं, पर किसी शिवभक्त से कम नहीं. स्वभाव से मस्त और अपने हुनर के माहिर, इतने कि बिगड़े से बिगड़ा केस इनके छूने भर से ठीक. जी, हम किसी वकील, फकीर, पुजारी की नहीं आज ऐसी शख्सियत से आपकी पहचान कराएँगे, जो इस इलाके के लिए एक तरह से ईश्वर के भेजे हुए दूत हैं. जिन्होंने लाखों लोगों के चेहरे पे मुस्कान बिखेरा है और प्रयासरत हैं कि सम्पूर्ण भारत चाहे किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो, खुशियां मनाये, खुश रहे दुखी न रहे.

हम बात कर रहे हैं खुशहाली गुरु के नाम से प्रसिद्ध डॉ संजय गुप्ता की. वैसे तो 
ऊपरवाले का दिया उनके पास सब कुछ है. देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में वह प्रोफेसर हैं और मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष भी. जाहिर है तनख्वाह और प्रतिष्ठा के लिए उन्हें किसी अन्य चीज की दरकार नहीं, पर वह अपने सेवा और आध्यात्मिक भाव का क्या करें. इसीलिए इलाज के साथ-साथ वह खुशहाली बांटते हैं और अपने इन प्रयासों के लिए समाज में और देश-विदेश में काफी मशहूर हैं. घर परिवार से संपन्न खुशहाली गुरु के पास वह सब कुछ है जिसकी हसरत कोई भी इनसान अपनी जिंदगी में पालता है. इसके बाद भी कोई अगर गैरों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने भर के लिए अपने कार्य क्षेत्र को विस्तार दे,अपने फुर्सत के पलों को दूसरों पर निसार कर उनकी जिंदगी संवार दे, तो भला ऐसी शख्सियत को आप क्या नाम देंगे. जनता जनार्दन के पूर्वांचल संवाददाता अमिय पांडेय ने खुशहाली गुरु को करीब से जानने की कोशिश की है.

मनोचिकित्सक डॉ प्रोफेसर संजय गुप्ता यानी खुशहाली गुरु. बनारस और उसके आसपास के जिलों में लोग उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं. आप कभी भी तनाव में रहिए. किसी भी बात को लेकर टेंशन में हों. बस एक बार खुशहाली गुरु से मिल लीजिए. फिर देखिए. यकीन मानिए मिनटों में टेंशन को टाटा बोल देंगे आप. ना दवा ना महंगा इलाज. बस खुशहाली गुरु की संगत में कुछ पल बिताइए,और नतीजा देखिए.

दरअसल आधुनिकता के इस दौर में हर कोई आपाधापी में जी रहा है. हजारों ख्वाहिशें हैं. आगे निकलने की होड़ में खुशियां पीछे छूट रही हैं. नतीजा आदमी परेशान रहने के साथ धैर्य खोता चला जाता है. बीएचयू आईएमएस के मनोचिकित्सा विभाग में तैनात डॉक्टर संजय गुप्ता ने लोगों की इन्हीं परेशानियों को समझा. उन्होंने देखा अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीज जितना परेशान हैं. उससे कहीं ज्यादा मरीज के साथ आने वाला तीमारदार तनाव में हैं. उन्होंने महसूस किया कि तमाम लोग बिना किसी रोग-व्याधि के बेहद परेशान हैं. इन लोगों की लिस्ट में छात्र-छात्राओं के साथ ही विभिन्न आयु आय वर्ग के नौकरीपेशा और व्यापारियों के नाम हैं.

लोगों के इलाज के दौरान डॉक्टर संजय गुप्ता ने महसूस किया कि हजारों लोग ऐसे हैं जिन्हें किसी तरह की बीमारी नहीं है. फिर भी परेशान हैं. मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं. लोगों की इन परेशानियों पर संजय गुप्ता ने लंबे समय तक अध्ययन किया. देश के बड़े-बड़े विशेषज्ञों के साथ अपने छात्रों के साथ भी वार्ता की. बाद में उन्हें आभास हुआ कि हमारे हेल्थ सिस्टम में ही कमी है, जिसे दुरुस्त करने की जरुरत है. उन्होंने यह पाया कि कई बीमारियों का सबसे बड़ा कारण तनाव है.

इसलिए बीमारियों को जड़ से उखाड़ने के लिए उन्होंने तनाव को मिटाना होगा. उन्होंने पाया कि अगर तनाव को हटाना है तो लोगों के मन में अंधियारी कोठरी में खुशहाली के दीपक जलाना पड़ेगा. संजय गुप्ता ने एक ऐसे समाज का सपना देखा जिसमें लोग बेवजह तनाव से दूर खुशहाली की जिंदगी जीयें. अपने मिशन को पूरा करने के लिए मार्च 2005 में 'खुशहाली' नाम के एक अभियान की शुरुआत की. बाद में संजय गुप्ता खुशहाली गुरु के नाम से जाने लगे. वह दूसरे डॉक्टरों की तरह महंगे इलाज या फिर किसी तरह की थेरैपी में विश्वास नहीं करते. बल्कि लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए उन्होंने एक अलग तरह की पद्धति को अपनाया. 'खुशहाली' शिविर में पहुंचने वाले लोगों का संजय गुप्ता एक खास तरह से इलाज करते हैं.

वो लोगों को दो तरह के एक्सरसाइज बताते हैं. इसमें एक है वायु शक्ति अभ्यास और दूसरा है मन शक्ति अभ्यास. वायु शक्ति में जहां नकारात्मक ऊर्जा को घटाने पर जोर दिया जाता है वहीं मन शक्ति में संगीत और ध्यान के जरिए इलाज किया जाता है. यही नहीं 'खुशहाली गुरु' लोगों के साथ बातचीत कर उनकी मनोदशा को समझते हैं और अपने स्तर से बदलाव करने की कोशिश करते हैं. डॉ. संजय गुप्ता खुशहाली के सात मंत्रों के जरिए लोगों के तनाव को कम करने की कोशिश करते हैं. ये मंत्र बेहद सामान्य होते हैं. अपने शिविर में वो लोगों से खुला संवाद करते हैं. यही नहीं प्रो. गुप्ता ने खुशहाली शिविर में आने वाले लोगों के लिए खुशहाली साफा भी तैयार करवाया है जिसका रंग उगते सूरज का है. प्रो. गुप्ता का मानना है कि जिस प्रकार उगता सूरज लोगों के शरीर को स्फूर्ति प्रदान करने वाली उर्जा देता है ठीक उसी प्रकार उनके शिविर के माध्यम से लोगों में खुशियां बांटने का प्रयास किया जाता है.
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