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प्रधानमंत्री मोदी और अनिल अंबानी ने मिलकर रक्षा सेनाओं के 1.3 करोड़ रुपए चुराएः राहुल गांधी का राफेल पर हमला

प्रधानमंत्री मोदी और अनिल अंबानी ने मिलकर रक्षा सेनाओं के 1.3 करोड़ रुपए चुराएः राहुल गांधी का राफेल पर हमला नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे में ‘ऑफसेट साझेदार’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान को लेकर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि मोदी सफाई दें, क्योंकि एक दूसरे देश के पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें 'चोर' कहा है ।

राहुल ने संवाददाताओं से कहा, 'फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। एक तरह से वो कह रहे हैं कि भारत के प्रधानमंत्री चोर हैं ।' उन्होंने कहा, 'पहली बार है कि किसी दूसरे देश के पूर्व राष्ट्रपति ने हमारे प्रधानमंत्री को चोर कहा । भ्रष्टाचारी कहा है । यह भ्रष्टाचार, रक्षा और हमारे जवानों के भविष्य का मामला है। प्रधानमंत्री पूरी तरह चुप हैं। वह एक शब्द नहीं बोले।'

 कांग्रेस प्रमुख ने कहा, ' भारत के प्रधानमंत्री को सफाई देनी चाहिये। समझ नहीं आ रहा है कि वह क्यों नहीं बोल रहे हैं।' उन्होंने कहा, ' देश का चौकीदार चोर है। पूरी तरह से भ्रष्टाचार का मामला है।'

दरअसल, कांग्रेस और राहुल पिछले कई महीनों से यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसाल्ट से 36 राफेल लड़ाकू विमान की खरीद का जो सौदा किया है, उसका मूल्य पूर्ववर्ती यूपीए सरकार में विमानों की दर को लेकर बनी सहमति की तुलना में बहुत अधिक है । इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

राफेल करार में एक फ्रेंच प्रकाशक ने कथित तौर पर पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के हवाले से सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि अरबों डॉलर के इस सौदे में भारत सरकार ने अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को दसॉल्ट एविएशन का साझीदार बनाने का प्रस्ताव दिया था। इस नए खुलासे के बाद विपक्ष को मोदी सरकार पर निशाना साधने के लिये नये सिरे से मौका मिल गया है।

गांधी ने ट्वीट कर कहा, 'प्रधानमंत्री और अनिल अंबानी ने मिलकर भारतीय रक्षा बलों पर 130,000 करोड़ रुपये की सर्जिकल स्ट्राइक की है.' उन्होंने आरोप लगाया, 'मोदी जी आपने हमारे शहीदों के लहू का अपमान किया है. आपको शर्म आनी चाहिए. आपने भारत की आत्मा से विश्वासघात किया है.' गांधी ने ओलांद के कथित बयान को लेकर शुक्रवार को भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था.

उन्होंने कहा था, 'प्रधानमंत्री ने बंद कमरे में राफेल सौदे को लेकर बातचीत की और इसे बदलवाया. फ्रांस्वा ओलांद का धन्यवाद कि अब हमें पता चला कि उन्होंने (मोदी) दिवालिया अनिल अंबानी को अरबों डॉलर का सौदा दिलवाया. प्रधानमंत्री ने भारत के साथ विश्वासघात किया है. उन्होंने हमारे सैनिकों के लहू का अपमान किया है.'

फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक ओलांद ने कथित तौर पर कहा है कि भारत सरकार ने 58,000 करोड़ रुपए के राफेल विमान सौदे में फ्रांस की विमान बनाने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन के ऑफसेट साझेदार के तौर पर अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम प्रस्तावित किया था और ऐसे में फ्रांस के पास कोई विकल्प नहीं था.

ओलांद की टिप्पणी इस मामले में भारत सरकार के रूख से इतर है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शुक्रवार को रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति के इस बयान कि भारत सरकार ने एक खास संस्था को राफेल में दसॉल्ट एविएशन का साझीदार बनाने के लिये जोर दिया, की पुष्टि की जा रही है।’’

प्रवक्ता ने यह भी कहा, ‘‘एक बार फिर इस बात को जोर देकर कहा जा रहा है कि इस वाणिज्यिक फैसले में न तो सरकार और न ही फ्रांसीसी सरकार की कोई भूमिका थी।’’

फ्रेंच भाषा के एक प्रकाशन ‘मीडियापार्ट’ की खबर में ओलांद के हवाले से कहा गया है, ‘‘भारत सरकार ने इस सेवा समूह का प्रस्ताव दिया था और दसॉल्ट ने (अनिल) अंबानी समूह के साथ बातचीत की। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, हमने वह वार्ताकार लिया जो हमें दिया गया।’’

यह पूछे जाने पर कि साझीदार के तौर पर किसने रिलायंस का चयन किया और क्यों, ओलांद ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में हमारी कोई भूमिका नहीं थी।’’

विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपने हमले और तेज कर दिए। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ‘‘प्रधानमंत्री ने बंद कमरे में राफेल सौदे को लेकर बातचीत की और इसे बदलवाया। फ्रांस्वा ओलांद का धन्यवाद कि अब हमें पता चला कि उन्होंने (मोदी) दिवालिया अनिल अंबानी को अरबों डॉलर का सौदा दिलवाया।’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने भारत के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने हमारे सैनिकों के लहू का अपमान किया है।’’

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ओलांद का बयान सीधे-सीधे उस बात का विरोधाभासी है जो अब तक मोदी सरकार कहती रही है और पूछा कि क्या करार पर ‘‘अहम तथ्यों को छिपाने’’ से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में नहीं डाला गया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद का ऐलान किया था। करार पर अंतिम रूप से 23 सितंबर 2016 को मुहर लगी थी।

खबर में ओलांद ने करार का उनकी सहयोगी जूली गायेट की फिल्म से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। पिछले महीने एक अखबार में इस आशय की खबर है।

रिपोर्ट में कहा गया था कि राफेल डील पर मुहर लगने से पहले अंबानी की रिलायंस एंटरटेनमेंट ने गायेट के साथ एक फिल्म निर्माण के लिये समझौता किया था।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा, ‘‘अगर इस तरह को कोई करार हुआ है तो यह राफेल सौदा एक घोटाला है। मोदी सरकार ने झूठ बोला और भारतीयों को गुमराह किया। पूरा सच हर हाल में सामने आना चाहिए।’’

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘ सफ़ेद झूठ का पर्दाफ़ाश हुआ। प्रधानमंत्री के साठगांठ वाले पूंजीपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को 30 हजार करोड़ रुपये के ऑफसेट कांट्रैक्ट से वंचित किया गया। इसमें मोदी सरकार की मिलीभगत और साजिश का खुलासा हो गया है।’’

सरकार यह कहती रही है कि दसॉल्ट एविएशन द्वारा ऑफसेट साझीदार के चयन में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
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