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'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा हमारी पहचानः प्रधानमंत्री मोदी 'अशरा मुबारक' के दौरान मस्जिद में

'वसुधैव कुटुम्बकम्' की अवधारणा हमारी पहचानः प्रधानमंत्री मोदी 'अशरा मुबारक' के दौरान मस्जिद में इंदौर: देश में अपने किस्म के पहले वाकये में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्थानीय मस्जिद में हजारों लोगों के सामने वाअज (धार्मिक प्रवचन) फरमा रहे दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन से शुक्रवार को भेंट की। इस दौरान मोदी ने "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भारतीय अवधारणा के हवाले से कहा कि सबको साथ लेकर चलने की परंपरा को साकार रूप दिये जाने के सदियों पुराने सिलसिले के कारण दुनिया के नक्शे पर भारत का खास स्थान है।

दाऊदी बोहरा समुदाय के एक प्रवक्ता के मुताबिक यह देश के इतिहास का पहला मौका था, जब कोई प्रधानमंत्री "अशरा मुबारक" (इस्लामी कैलेण्डर के पहले महीने मोहर्रम के शुरूआती 10 दिनों की पवित्र अवधि) के धार्मिक प्रवचन के दौरान इस समुदाय के धर्मगुरु से मिलने किसी मस्जिद में पहुंचा हो। बुधवार से जारी इस नौ दिवसीय प्रवचन माला के लिये दुनिया भर से हजारों दाऊदी बोहरा इंदौर में जुटे हैं.

सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने स्थानीय सैफी नगर मस्जिद की विशाल प्रवचन सभा में प्रधानमंत्री के साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आत्मीय स्वागत किया। दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु ने इस दौरान कहा, "हर धर्म हमें दूसरों से मोहब्बत करना सिखाता है।"

उन्होंने प्रधानमंत्री को 17 सितम्बर को पड़ने वाले उनके जन्मदिन के मद्देनजर उन्हें अग्रिम बधाई भी दी।

मोदी ने मस्जिद के भीतर प्रवचन सभा में कहा, "हम वसुधैव कुटुम्बकम् की परिकल्पना के मुताबिक पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। हम सबको साथ लेकर चलने की परंपरा को जी कर दिखाने वाले लोग हैं। हमारी विरासत की यही शक्ति हमें दूसरे देशों से अलग पहचान देती है।"

उन्होंने कहा, ‘‘हमें अपने अतीत पर गर्व है और वर्तमान पर विश्वास है। हममें उज्ज्वल भविष्य के आत्मविश्वास के साथ इसका संकल्प भी है। मैं दुनिया भर में जहां भी जाता हूं, शांति और विकास के लिये हमारे समाज के योगदान का जिक्र अवश्य करता हूं।’’

प्रधानमंत्री ने इमाम हुसैन की शहादत को भी याद किया। उन्होंने कहा, "इमाम हुसैन अमन और इंसाफ के लिये शहीद हुए थे। उन्होंने अन्याय और अहंकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की थी। उनकी यह सीख तब के दौर में जितनी महत्वपूर्ण थी, उससे भी अधिक आज की दुनिया के लिये अहम है।"

उन्होंने सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के संदेश को दोहराते हुए कहा कि "लोगों को अपने घर के साथ अपने दिल भी साफ रखने चाहिये।"

प्रधानमंत्री ने अपील की कि महात्मा गांधी की आगामी 150वीं जयंती के मद्देनजर कल शनिवार से शुरू होने वाले "स्वच्छता से सेवा" पखवाड़े के आयोजनों से समाज के सभी तबकों के लोग ज्यादा से ज्यादा तादाद में जुड़ें।

उन्होंने कहा, "हम स्वच्छता और अन्य विषयों को लेकर बापू के बताये रास्ते पर चलने के लिये पूरी दुनिया को प्रोत्साहित करेंगे। इसके लिये

अगले दो साल तक अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा।"

प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि उनकी सरकार के सत्ता संभालने से पहले देश के केवल 40 प्रतिशत घरों में पक्के शौचालय थे। लेकिन अब यह दर बढ़कर तकरीबन 90 प्रतिशत पर पहुंच गयी है।

मोदी ने कहा, "मुझे भरोसा है कि खुले में शौच की प्रवृत्ति से मुक्त घोषित होने की मंजिल की ओर देश बहुत जल्द कदम बढ़ायेगा।"
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