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राष्ट्रपति ट्रंप की नई धमकी, हितों की अनदेखी की गई तो विश्व व्यापार संगठन से बाहर हो जाएगा अमेरिका

राष्ट्रपति ट्रंप की नई धमकी, हितों की अनदेखी की गई तो विश्व व्यापार संगठन से बाहर हो जाएगा अमेरिका वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब एक नई धमकी दी है. इस बार उन्होंने कहा है कि अगर विश्व व्यापार संगठन ने अमेरिका के साथ अपना रवैया नहीं बदला तो ट्रंप अपने देश को इस संगठन से बाहर ले जाएंगे.

राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्लूमबर्ग न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "अगर वो अपने तरीके नहीं बदलते हैं तो हम डब्ल्यूटीओ से बाहर निकल जाएंगे." विश्व व्यापार संगठन की स्थापना वैश्विक व्यापार के नियम बनाने और तमाम देशों के बीच व्यापारिक विवादों के सुलझाने के लिए हुई था.

डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही अमेरिका के लिए रक्षात्मक नीतियां अपनाते आए हैं और अब उनका कहना है कि डब्ल्यूटीओ अमेरिका के साथ अनुचित व्यवहार करता है.

ट्रंप की विश्व व्यापार संगठन से हटने की धमकी दि्खाती है उनकी व्यापारिक नीतियों और मुक्त व्यापार व्यवस्था में विरोधाभास है.

इस बीच अमेरिका ने विश्व व्यापार संगठन के विवाद निवारण व्यवस्था (डिसप्युट सेटलमेंट सिस्टम) के दो नए जजों के चुनाव का रास्ता रोक दिया है. जिसकी वजह से डब्ल्यूटीओ के फ़ैसले सुनाने की क्षमता कमज़ोर पड़ सकती है.

अमरीका के व्यापार प्रतिनिध रॉबर्ट लाइटहाइज़र ने भी डब्ल्यूटीओ पर अमेरिका की संप्रभुता में दख़ल देने का आरोप लगाया है.

डोनल्ड ट्रंप 'अनुचित व्यापार' से तब से ही ख़फ़ा नज़र आते रहे हैं, जब वो राष्ट्रपति बने भी नहीं थे. पिछले साल ट्रंप ने फ़ॉक्स न्यूज़ से कहा था है, "डब्ल्यूटीओ सबको फ़ायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था, सिवाय हमें...हम हर केस हार जाते हैं, हम डब्ल्यूटीओ में लगभग हर केस हार जाते हैं."

हालिया कुछ महीनों में अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ के साथ जैसे को तैसा वाला रवैया अपनाता नज़र आया है. इसका ताज़ा उदाहरण है चीन के साथ इसका ट्रेड वॉर. दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की इस लड़ाई पर पूरी दुनिया की दिलचस्पी है.

ट्रंप ने चीन से आयातित कई सामानों पर अच्छा-खासा टैक्स लगा दिया है और बदले में चीन ने भी वही किया है.ब्लूमबर्ग ने कई रिपोर्टों के हवाले से दावा किया है कि अमेरिका तकरीबन 200 बिलियन डॉलर की क़ीमत वाले चीनी उत्पादों पर नए टैक्स लगाने वाला है.

ब्लूमबर्ग के इंटरव्यू में जब ट्रंप से इसकी पुष्टि करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि ये 'पूरी तरह ग़लत' नहीं है. वहीं, चीन के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि उसे अमेरिका द्वारा डब्ल्यूटीओ के नियम तोड़ने पर 'साफ़ तौर पर शक़' है.

अमेरिका ने जब जुलाई में चीनी उत्पादों पर टैक्स की पहली घोषणा की थी तब चीन ने डब्ल्यूटीओ में इस बारे में शुरुआती शिक़ायत दर्ज कराई थी. विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1994 में हुई थी और तब से यह वैश्विक व्यापार के नियमों का केंद्र है.

ऐसा नहीं है कि ट्रंप को सिर्फ़ चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों से परेशानी है. इससे पहले उन्होंने मेक्सिको से नाफ़्टा समझौता (नॉर्थ अमेरिकान ट्रेड अग्रीमेंट) तोड़ने की धमकी दी थी.  उन्होंने 1994 में हुए इस समझौते पर नए सिरे से विचार करने की मांग की थी.

ट्रंप का कहना था नाफ़्टा समझौते की वजह से अमेरिका में मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में (ख़ासकर कार उद्योग) में नौकरियां कम हुई हैं.

उनके अड़े रहने और तक़रीबन एक साल तक चली बातचीत के बाद अमेरिका और मेक्सिको नाफ़्टा समझौते को नया रूप देने को तैयार हो गए हैं.

इस बारे में ट्रंप ने सोमवार को कहा कि यह 'वाक़ई अच्छा समझौता' है जो दोनों देशों के लिए ज़्यादा उचित होगा. कनाडा, जोकि नाफ़्टा समझौते का नया सदस्य है, उसका अभी नए शर्तों पर हस्ताक्षर करना बाक़ी है.

ट्रंप ने कहा था कि नए शर्तों पर हस्ताक्षर करने के लिए कनाडा के पास सिर्फ़ शुक्रवार तक का वक़्त है. ट्रंप कनाडा के ऑटोमेटिव सेक्टर के उत्पादों पर टैक्स लगाने या फिर इसे अमेरिका से पूरी तरह बाहर करने की धमकी भी दे चुके हैं. अमेरिका के राष्ट्रपति अपनी धमकियों के लिए भी जाने जाते हैं.
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