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हमने पिता के हत्यारों को क्षमा कर दिया, जब प्रभाकरन को मारा गया, हमें अच्छा नहीं लगा: राहुल गांधी

हमने पिता के हत्यारों को क्षमा कर दिया, जब प्रभाकरन को मारा गया, हमें अच्छा नहीं लगा: राहुल गांधी सिंगापुरः कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि जब उनके पिता राजीव गांधी के हत्‍यारे और लिट्टे के चीफ प्रभाकरन को मारा गया तो उन्हें और उनकी बहन प्रियंका को अच्‍छा नहीं लगा. राहुल गांधी को लगा कि जिस हिंसा में वो शामिल हुआ और जिसका शिकार वो बना, उसका असर उसके बच्‍चों समेत दूसरों पर पड़ेगा.

राहुल गांधी ने ये बातें सिंगपुर में आईआईएम के पुराने छात्रों से बातचीत के दौरान कहीं. राहुल गांधी ने कहा, "मेरी दादी (इंदिरा गांधी) और मेरे पिता (राजीव गांधी) दोनों की हत्या की गई थी. मैंने हिंसा की पीड़ा झेली है. मैं वास्तव में अनुभव से ये बातें कर रहा हूं. हिंसा के बाद आगे बढ़ने का एकमात्र तरीका क्षमा है. कोई और रास्ता नहीं है. किसी को माफ करने के लिए आपको समझना होगा कि वास्तव में क्या हुआ और ये क्यों हुआ."

राहुल गांधी ने आगे कहा, ''इससे उबरने का तरीका यही है कि आप दूसरों की सुने और अहिंसा के रास्‍ते पर चलें. लोग इसे कमजोरी समझ सकते हैं. लेकिन वास्‍तव में यही मेरी ताकत है. 1991 में एक आतंकवादी ने मेरे पिता की हत्‍या कर दी. 2009 में मेरे पिता की हत्‍या करने वाले उसी व्‍यक्ति को मैंने श्रीलंका के एक मैदान में मरा पड़ा हुआ देखा.''

राहुल ने कहा, ''उसकी मौत के बाद मैंने प्रियंका को फोन किया और कहा कि ये बड़ी अजीब बात है कि मुझे खुशी नहीं हो रही है. मुझे तो इस बात का जश्‍न मनाना चाहिए था कि जिस आदमी ने मेरे पिता की हत्‍या कि वो मारा गया. लेकिन पता नहीं क्‍यों मैं खुश नहीं था. मेरे मन ने कहा इस व्यक्ति के भी बच्चे हैं, जैसा हमें महसूस हुआ था, उन्हें भी हो रहा होगा. प्रियंका ने भी कहा कि आप सही कह रहे हैं, मुझे भी खुशी नहीं हो रही है.''

राहुल ने आगे कहा, ''मुझे इसलिए खुशी नहीं हुई क्‍योंकि उसके बच्‍चों में मैंने खुद को देखा. उसे मृत देखकर मुझे ये अहसास हुआ कि मेरी तरह उसके बच्‍चे भी रो रहे होंगे.''

इसके बाद राहुल गांधी ने कहा "वो एक बुरा आदमी हो सकता है, लेकिन उसके खिलाफ की गई हिंसा दूसरों पर असर डाल रही थी, जैसे कि उसने मुझे प्रभावित किया था. अगर आप गहराई से सोचेंगे तो आपको पता चलेगा कि इस हिंसा के पीछे कुछ कारण जरूर होंगे. ये ऐसे अपने आप नहीं हुआ होगा."

आपको बता दें कि 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा गांधी को उनके निवास पर उनके दो अंगरक्षकों ने गोली मार दी थी. जबकि श्रीलंका के एक तमिल टाइगर्स समूह ने आत्मघाती हमले में 21 मई 1991 को तमिलनाडु में एक चुनावी रैली में राजीव गांधी की हत्या कर दी थी. श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने प्रभाकरन को गोली मार दी और मई 2009 में तमिल टाइगर्स को पूरी तरह खत्म कर दिया गया.
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