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हरिवंश, कभी थे धर्मनिरपेक्ष पत्रकार, अब भाजपा के समर्थन से राज्यसभा के उपसभापति

हरिवंश, कभी थे धर्मनिरपेक्ष पत्रकार, अब भाजपा के समर्थन से राज्यसभा के उपसभापति नई दिल्लीः एक पत्रकार, संपादक के रूप में वह सियासत में कट्टरता के विरोधी और धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार थे, पर सियासत की चाल देखिए कि भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से वह आज राज्यसभा के उपसभापति हैं. हम बात कर रहे हैं प्रभात खरबर के संपादक रहे हरिवंश की, जो अब हरिवंश नारायण सिंह के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हैं.
 
राज्यसभा के उपसभापति को लेकर  पिछले कुछ दिनों से चला आ रहा सस्पेंस खत्म हो गया है. गुरुवार सुबह हुई वोटिंग में एनडीए के प्रत्याशी हरिवंश नारायण सिंह को बड़ी जीत मिली है. चुनाव में जीत के बाद उन्हें राज्यसभा का उपसभापति चुन लिया गया है. उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद को 20 वोट से हराया. हरिवंश को 125 वोट मिले जबकि बीके हरिप्रसाद को 105 वोट.

कांग्रेस ने अपनी पार्टी के नेता बीके हरिप्रसाद को विपक्ष के संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा था तो वहीं एनडीए ने हरिवंश नारायण सिंह को. शिवसेना और बीजेडी की ओर से हरिवंश को समर्थन की घोषणा के बाद उनकी जीत तय मानी जा रही है. भाजपा ने अपने सांसदों को वोटिंग के दिन सदन में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया था.

चुनाव शुरू होने से पहले राज्यसभा महासचिव ने सदन को वोटिंग प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया. चुनाव के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हरिवंश जी पहले एनडीए के प्रत्याशी थे, लेकिन चुनाव जीतने और उपसभापति बनने के बाद यह पूरे सदन के हो गए हैं किसी एक पार्टी के नहीं. वह अपना काम अच्छे से करें, हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन चुने जाने पर बधाई दी है. चुनाव के बाद मोदी खुद हरिवंश से मिलने उनकी सीट तक गए. उन्होंने मजाक में कहा कि अब सब कुछ सदन में हरि के भरोसे है. मोदी ने उनकी तारीफ में कहा कि हरिवंश जी कलम के बड़े धनी हैं. हरिवंश जी चंद्रशेखर जी के चहेते थे. जिस भूमि (बलिया) से यह आते हैं, आजादी की लड़ाई में उसकी बड़ी भूमिका रही. अगस्त की क्रांति में बलिया की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही है.

मोदी ने कहा कि हरिवंश ने पत्रकारिता को जन आंदोलन की तरह लिया. पूर्व पीएम चंद्रशेखर के साथ काम करते हुए भी उन्होंने अपने पद की गरिमा को बनाए रखा. मोदी ने यह भी कहा कि पूर्व पीएम चंद्रशेखर के साथ काम करते हुए वह जानते थे कि वह इस्तीफा देने वाले हैं, लेकिन उन्होंने पद की गरिमा को बनाए रखी और अपने अखबार तक में खबर नहीं छापी.

ऐसे ही एक वाकिये का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आज जिन दशरथ मांझी को दुनिया याद करती है, उनकी कहानी को पहली बार हरिवंश ने ही अपने अखबार प्रभात खबर में प्रकाशित किया था.

उल्‍लेखनीय है कि दशरथ मांझी ने पहाड़ चीरकर सड़क बनाई थी. दरअसल उनकी पत्‍नी गर्भवती थीं और प्रसव पीड़ा के दौरान अस्‍पताल ले जाते वक्‍त रास्‍ते में ही उनकी मौत हो गई. दशरथ के गांव में सड़क नहीं थी और अक्‍सर सूखे की चपेट में रहने वाला वह दूरदराज का इलाका था. दशरथ को पक्‍का यकीन था कि यदि सड़क होती तो पत्‍नी का निधन नहीं होता. इसलिए उन्‍होंने अपने गांव के पास के पहाड़ को चीरकर सड़क बनाई.

राज्यसभा में सदन के नेता अरुण जेटली ने भी नए उपसभापति हरिवंश सिंह को बधाई दी. उन्होंने कहा कि हरिवंश जी का बतौर सांसद कार्यकाल काफी अच्छा रहा है. हमें उम्मीद है कि उनके अनुभव का फायदा सदन को मिलेगा. जेटली बोले कि उपसभापति को समर्थन भले ही सत्ता पक्ष का मिलता हो लेकिन वह बैठता विपक्ष के नेता के साथ ही है.

कांग्रेस की नेता सोनिया गांधी ने कहा कि कभी हम जीतते हैं तो कभी हारते हैं. उपसभापति चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी कांग्रेस से बेहद नाराज दिखी. आप के सांसद संजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस के रवैये को देखते हुए हमने सदन से अनुपस्थित रहने का फैसला किया है. कांग्रेस विपक्षी एकता की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है.

इससे पहले, चुनाव से पहले दोनों प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए. विपक्षी उम्मीदवार बीके हरिप्रसाद ने कहा 'हमें विश्वास है कि हमारे पास जरूरी नंबर हैं. विपक्ष एकजुट है.' वहीं एनडीए उम्मीदवार हरिवंश भी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नजर आए.

इस चुनाव से आठ सदस्य अनुपस्थित रहे. आम आदमी पार्टी के तीन, वाईएसआर कांग्रेस और पीडीपी के दो-दो और डीएमके के एक सदस्य सदन से गैरहाजिर रहे.

आइए जानते हैं हरिवंश से जुड़ी अहम बातें:

1. हरिवंश का जन्‍म 1956 में बलिया के मध्‍यमवर्गीय परिवार में हुआ. उनका पूरा नाम हरिवंश नारायण सिंह है. बीएचयू से इकोनॉमिक्‍स में एमए और पत्रकारिता में डिप्‍लोमा किया.

2. कॉलेज के दिनों में वह समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (जेपी) से प्रभावित हुए. 1974 में जेपी आंदोलन में सक्रिय हिस्‍सा लिया.

3. 40 साल की लंबी पत्रकारिता की शुरुआत 1977 में टाइम्‍स ऑफ इंडिया के ट्रेनी जर्नलिस्‍ट के रूप में शुरू की थी. उसके बाद मुंबई में धर्मयुग पत्रिका से जुड़े और 1981 तक वहां काम किया. हरिवंश ने एक इंटरव्‍यू में कहा था कि उन्‍होंने 500 रुपये में अपनी पहली नौकरी शुरू की थी.

4. 1981-84 के दौरान इन्‍होंने बैंक ऑफ इंडिया में काम किया. उसके बाद अमृत बाजार पत्रिका की मैगजीन रविवार में असिस्‍टेंट एडीटर बने. 1989 में उन्‍होंने उषा मार्टिन समूह के संघर्षरत अखबार प्रभात खबर की रांची में कमान संभाली. जब वह प्रभात खबर पहुंचे तो उस वक्‍त इस अखबार का सर्कुलेशन महज 400 कॉपी ही था. 25 वर्षों तक इस अखबार के संपादक का दायित्‍व निभाने वाले हरिवंश के नेतृत्‍व में ही यह अखबार झारखंड का सर्कुलेशन के लिहाज से नंबर वन अखबार बना. इन्‍होंने झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रभात खबर के कई संस्‍करणों को लांच किया.

5.  1990 में जब चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तो वह उनके एडीशनल मीडिया एडवाइजर बने. 25 वर्षों तक प्रभात खबर की कमान संभालने के बाद 2014 में राज्‍यसभा के लिए नामांकित किए गए. नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने उनको राज्‍यसभा भेजा. रोचक बात यह है कि जब उनको राज्‍य सभा भेजा गया तो वह जदयू के प्राथमिक सदस्‍य भी नहीं थे.

6.   राज्‍यसभा में अपने निर्विरोध निर्वाचन के अनुभव के बारे में हरिवंश ने लिखा था कि वह बिना एक रुपया खर्च किए हुए राज्‍यसभा पहुंच गए. उन्‍होंने लिखा कि उन्‍होंने राज्‍यसभा के लिए नामांकन फॉर्म 10 हजार रुपये में खरीदा था. लेकिन निर्विरोध चुने जाने के कारण वह राशि उनको लौटा दिया गया. लिहाजा राज्‍यसभा तक पहुंचने में उनका एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ.
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