Monday, 14 October 2019  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

मीना कुमारी की 85वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर किया याद

मीना कुमारी की 85वीं जयंती पर गूगल ने डूडल बनाकर किया याद
नई दिल्ली: भारतीय फिल्म जगत की मशहूर हस्ती मीना कुमारी की 85वीं जयंती के मौके पर सर्च इंजन गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें याद किया है. मीना कुमारी का जन्म 1 अगस्त 1932 को बंबई में हुआ था. मीना कुमारी का असली नाम महजबीन बेगम था. भारतीय सिनेमा की ट्रैजिडी क्वीन कही जाने वाली मीना कुमारी आज भी लाखों दिलों पर राज करती हैं.

सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में शुमार होने के साथ ही मीना उम्दा शायर और गायिका भी थीं. मीना कुमारी के फिल्मी करियर की शुरुआत 1939 में फिल्म "लैदरफेस" से हुई जिसके निर्देशक विजय भट्ट थे. विजय भट्ट की फिल्म बच्चों का खेल में 13 साल की महजबीन का नाम मीना कुमारी दिया गया. जिसके बाद ही महजबीन मीना कुमारी के नाम से जानी जाने लगीं.

मीना कुमारी के जन्म के समय उनके घर में बहुत गरीबी थी. कहा जाता है कि उनके जन्म के बाद उनके परिवार के पास डॉक्टर को देने के लिए पैसे नहीं थे. जिसके चलते उनके पिता अली बख्‍श उनको अनाथालय की सीढ़ियों पर छोड़ आए थे. लेकिन पिता का मन नहीं माना और वे वापस जाकर उन्हें अनाथालय के बाहर से घर ले आए और उनकी परवरिश की.

मीना कुमारी ने कई गीतों को अपनी आवाज़ भी दी थी. दरअसल, मीना कुमारी की मां इकबाल बानो गायिका थीं. उन्हें उनकी मां से गायिकी की तालीम मिली. मीना कुमारी ने 'बहन' फिल्म में अपना पहला गीत "ले चल मुझे अपनी नगरिया गोकुल वाले सांवरिया" गाया था. जिसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में गीत गाए. साथ ही उन्होंने उन्होंने "ईद का चांद" फिल्म में संगीतकार का भी काम किया था.

अपने 30 साल के पूरे फिल्मी सफर में मीना कुमारी ने 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है. 1954  में फिल्म ‘बैजू बावरा’ ने मीना कुमारी को बेस्‍ट एक्‍ट्रेस का फ़िल्मफेयर अवॉर्ड भी दिलवाया था.

मीना कुमारी  और कमाल अमरोही की शादी के किस्से बहुत मशहूर हैं. जब कमाल अमरोही आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तब मीना कुमारी ने अपनी सारी कमाई देकर उनकी मदद की थी. लेकिन दोनों के रिश्ते में मिठास बरकरार नहीं रही थी. दोनों एक दूसरे से अगल हो गए थे.

फिल्म 'पाकीजा' से मीना कुमारी लोगों के दिलों पर छा गईं थीं. इस फिल्म के रिलीज होने के तीन हफ्ते बाद ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी थी. इलाज के 2 दिन बाद 31 मार्च 1972 को गुड फ्राइडे के दिन 38 साल की मीना कुमारी ने अंतिम सांस ली थी.
अन्य चर्चा में लेख
वोट दें

क्या विजातीय प्रेम विवाहों को लेकर टीवी पर तमाशा बनाना उचित है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack