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अलवर भीड़ हत्याकांडः पोस्टमार्टम से खुलासा, रबकर खान की सदमे से हुई मौत, टूटी थी हड्डियां

जनता जनार्दन संवाददाता , Jul 24, 2018, 16:12 pm IST
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अलवर भीड़ हत्याकांडः पोस्टमार्टम से खुलासा, रबकर खान की सदमे से हुई मौत, टूटी थी हड्डियां अलवर: राजस्थान के अलवर में मॉब लिचिंग के शिकार रकबर उर्फ अकबर खान की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर अंदरूनी चोट लगने और उसके बाद सदमे को मौत का कारण बताया गया है. बता दें कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह सामने आई है कि रकबर की पसलियां टूटी हुई थीं और फेफड़ों में पानी जमा हो गया था.

बता दें कि रबकर खान की मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ चुका है. उधर, स्थानीय विधायक पर भी आरोपियों के समर्थन का आरोप लगा रहा है. प्रत्यक्षदर्शी और रकबर के दोस्त असलम ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि हमलावर पीटने के साथ बार-बार कह रहे थे कि विधायक हमारे साथ हैं. कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

उधर राजस्थान में विधानसभा चुनाव से मॉब लिंचिंग का यह मामला बड़ा चुनावी मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है. राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा, 'भीड़ हिंसा के इस मामले में सबसे खतरनाक बात यह है कि राजस्थान पुलिस पूरी तरह से लापरवाह, संवेदनहीन और अपराधी थी. सरकार समाज के ध्रुवीकरण करने के इरादे के चलते इन गोरक्षकों के समूह और भीड़ हिंसा को अनुमति दे रही है.'

फिलहाल इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है. जांच समिति रकबर की हत्या की वजह- मॉब लिंचिंग, हिरासत के दौरान शोषण, या फिर चश्मदीद के बयान की जांच कर रही है.

राजस्थान के अलवर में बीते एक साल में ऐसे आधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं लेकिन रामगढ़ स्टेशन में तैनात पुलिस अधिकारी इस तरह के मामलों को लेकर कम गंभीर दिख रहे हैं. यहां तक कि यह भी सामने आया कि दो गिरफ्त आरोपी धर्मेंद्र यादव और परमजीत न सिर्फ पीड़ित और पुलिस के साथ थाने गए थे बल्कि उस अस्पताल भी गए थे जहां रकबर को मृत घोषित कर दिया गया था.

अलवर के रकबर हत्याकांड मामले में राजस्थान सरकार ने संबंधित पुलिस थाने के सहायक उप पुलिस निरीक्षक मोहन सिंह को निलंबित कर दिया है.
इसके साथ ही थाने के चार सिपाहियों को लाइन हाज़िर किया गया है.

आरोप है कि अलवर ज़िले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में शुक्रवार रात कथित गोरक्षकों ने रकबर की बुरी तरह पिटाई की थी, जिसके बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे. आरोप है कि रकबर को अस्पताल ले जाने में पुलिस ने कोताही बरती. पुलिस कोई तीन घंटे बाद रकबर को पास के सरकारी अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

रक़बर के क़त्ल के मामले में राजस्थान के अलवर ज़िले के रामगढ़ थाने को पहली ख़बर यही मिली थी. एफ़आईआर के मुताबिक़ घटना की ख़बर देर रात 12 बजकर 41 मिनट पर मिली. ख़बर किसी नवल किशोर शर्मा नाम के शख़्स ने दी थी.

पुलिस का कहना है कि रकबर को इसी इलाक़े के रहने वाले कुछ लोगों ने इतना पीटा था कि सरकारी अस्पताल जाते-जाते उन्होंने दम तोड़ दिया. घटना लालावंडी के जंगलों के पास की है जहाँ से पुलिस ने दो हमलावरों को मौक़ा-ए-वारदात से गिरफ़्तार किया.

एफ़आईआर में ये भी कहा गया है कि मरने से पहले रकबर ने अपने बयान में अज्ञात लोगों के हमले की बात कही थी. इस बयान को एफ़आईआर में दर्ज किया गया है. इस मामले में पुलिस को सूचना देने वाले नवल किशोर विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े बताए जाते हैं.

घटनास्थल से गिरफ़्तार किए गए अन्य लोगों का संबंध दूसरे हिन्दू संगठनों से बताया जा रहा है. इस बात का पता चलने पर ये मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है. दूसरी तरफ़ इस मामले में राज्य के बीजेपी विधायक ज्ञान देव आहूजा ने अपने बयान से पुलिस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है.

पत्रकारों से बात करते हुए आहूजा ने बताया है कि उनके कार्यकर्ताओं ने रकबर को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था. उनका ये भी कहना है कि जिस वक़्त कार्यकर्ताओं ने रकबर को पकड़ा उसने भागने की कोशिश की और उसी में वो घायल भी हो गया.

वहीं, मामले में दूसरा मोड़ तब आया जब पुलिस को ख़बर देने वाले नवल किशोर ने एक बड़े हिंदी अख़बार को बयान दिया कि वो भी पुलिस के साथ घटनास्थल पर गए थे.

उनके हवाले से अख़बार ने लिखा है कि एक बजे रात के आस-पास पुलिस दल ने रकबर को अपने क़ब्ज़े में ले लिया था. मगर उनका आरोप है कि जब रकबर को अलवर ज़िले के रामगढ़ स्थित सरकारी अस्पताल में ले जाया गया, उस वक़्त सुबह के चार बज रहे थे जबकि घटनास्थल से अस्पताल की दूरी मात्र चार से पांच किलोमीटर ही है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी ये भी कहा जा रहा है कि गायों को पहले गौशाला पहुँचाया गया और उसके बाद रकबर को अस्पताल. पुलिस ने अपनी एफ़आईआर में घटनास्थल से गिरफ्तार किए गए लोगों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं, रविवार को पुलिस ने दावा किया कि रकबर पर हमला करने की घटना में शामिल व्यक्ति को भी गिरफ़्तार किया गया है.

अब भारतीय जनता पार्टी के विधायक पूरे मामले की न्यायिक जांच मांग कर रहे हैं. वहीं, रकबर के साथ दुधारू गाय लेकर जाने वाले असलम ने किसी तरह ख़ुद को हमलावरों के चंगुल से छुड़ाने में कामयाबी हासिल की और वो रात के अँधेरे में खेतों और जंगलों से होते हुए किसी तरह अपनी जान बचा पाए.

मगर इसी बीच मेवात की पुलिस अधीक्षक नाज़नीन भसीन ने अलवर के एसपी से व्यक्तिगत रूप से बात की और कहा कि असलम का रामगढ़ जाना मुमकिन नहीं है क्योंकि उसे भी अपनी जान को ख़तरा हो सकता है.

इसलिए मेवात की पुलिस अधीक्षक की पहल पर रविवार की दोपहर राजस्थान की पुलिस मेवात के फिरोज़पुर झिरका थाने पहुँची जहां असलम का बयान दर्ज किया गया.

रकबर की पत्नी असमीना गर्भवती हैं. वो रो-रो कर बार बार बेहोश हो जाती हैं. असमीना की माँ उन्हें संभालने की कोशिश में लगी हैं मगर उनका बुरा हाल है.

रकबर के पिता सुलेमान कहते हैं की मूलतः उनका दूध बेचने का ही काम है. रकबर के पास तीन गाय पहले से मौजूद हैं और वो अपने काम को बढ़ाने के लिए दो और दूधारू गाय ख़रीदने अलवर गए थे.

सुलेमान ने कहा, "हमने बहुत मना किया कि हालात ठीक नहीं हैं. अलवर मत जाओ. मगर वो कहता रहा कि कुछ नहीं होगा. काश वो मेरी बात मान लेता."

वहीं असलम ने बताया कि वो गायों को पिकअप वाहन से लेकर आना चाह रहे थे, लेकिन पिकअप पर गाय बिदक जा रही थीं. इसलिए वो रोड के रास्ते ही अपने गाँव लौट रहे थे. उनके गाँव से रामगढ की दूरी ज़्यादा नहीं है, इसलिए वो आश्वस्त थे कि सब उन्हें पहचानते हैं और कोई उन पर हमला नहीं करेगा.

नूह के विधायक ज़ाकिर हुसैन बताते हैं चूँकि पूरे मेवात के इलाक़े में ज़मीनी जलस्तर काफ़ी नीचे है, सदियों से यहाँ के लोगों की आजीविका का एक ही सहारा है - गोपालन और दूध का व्यवसाय.

वो बताते हैं कि हिन्दुओं से ज़्यादा मेवात के मुसलमान गोपालन करते हैं और गोधन का संरक्षण भी. हरियाणा की विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष आज़ाद मुहम्मद भी रामलीला समिति और गोशाला समिति के आजीवन सदस्य हैं. वो कहते हैं कि मेवात के इलाक़े में हिन्दुओं और मुसलामानों के बीच कभी गौपालन को लेकर कोई विवाद रहा ही नहीं. गौरक्षा के नाम पर हो रहीं हिंसक घटनाओं का केंद्र राजस्थान ज़्यादा है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पहलू ख़ान से लेकर रकबर की हत्याओं के बीच उन्मादी भीड़ ने भारत के विभिन्न प्रांतों में कुल मिलाकर 44 लोगों की हत्या की है. झारखण्ड में उन्मादी भीड़ ने 13 लोगों को मार डाला है, जबकि महाराष्ट्र में आठ लोग मारे गए. तमिलनाडु और त्रिपुरा में पांच-पांच लोग मारे गए हैं. तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक गुजरात और असम भी अछूते नहीं है.
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