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मानसिक स्वास्थ्य के लिए कुछ सबसे खराब आदतें

जनता जनार्दन डेस्क , Jul 07, 2018, 10:22 am IST
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मानसिक स्वास्थ्य के लिए कुछ सबसे खराब आदतें

कई लोगों इस बात से अनजान होते हैं कि, कुछ सामान्य सी लगने वाली आदतें आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। आपके शरीर के फिटनेस के स्तर से लेकर आपकी शोशल मीडिया में सहभागिता, सभी आपके मूड, सकारात्मकता, और आपके मानसिक स्वास्थ्य को नकारात्मकक ढ़ंग से प्रभावित कर सकते हैं। तो चलिये जानते हैं ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में जो आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती हैं

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन ने अपने शोध में शारीरिक श्रम के अभाव और अवसाद की उच्च दर के बीच गहरे संबंध की बात को साबित किया। यहां तक कि हफ्ते में तीन बार एक्सरसाइज कर अवसादग्रस्त भावनाओं और नकारात्मकता को ब ीस प्रति शत तक कम कर सकते हैं। 
टॉक्सिक रिलेशन से निकलना कई बार मुश्किल हो जाता है। तो बेहतर होगा कि थोड़ा समय खुद को दें और ये जानने की कोशिश करें कि आप एक टॉक्सिक रिलेशन में हैं। यूसीएलए स्कूल ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों के अनुसार दीर्घकालिक, नकारात्मक सामाजिक संबंधों सूजन से जुड़े होते हैं, जोकि हृदय रोग, कैंसर, उच्च रक्तचाप आदि का कारण भी बन सकते हैं। हानिकारक बांड (संबंध), जैसे  साथी के साथ बांड, सहकर्मी के साथ बांड, परिवार और दोस्तों के साथ बांड भी कम आत्मसम्मान, चिंता और अवसाद का कारण बन सकते हैं।

बास्तीर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार पर्याप्त नींद अच्छे स्वास्थ्य की निशानी होती है। खासतौर पर यह अंग समारोह, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क समारोह, और पाचन को सीधे प्रभावित करती है। इस लिए सोने से तीन घंटे पहले ही इलेक्ट्रोनिक उपकरणों को बंद करने की आदत डालें और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करके सोएं। 

यदि आप देर से सो कर उठेगें तो आपकी सुबह की शुरुआत धीमी और तनाव भरी हो जाएगी। पहले तो आप इस बात कि चिंता करेगें कि आप ऑफिस के लिये लेट हो जाएंगे, तो ऐसे में आप अपना ब्रेकफास्‍ट छोड़ देंगे। इस तरह न सिर्फ आप शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहे होंगे। 

हफ्ते में एक-दो बार काम के बाद थियेटर में फिल्म देखना या कुछ देर नियमित टीवी देखना शायद लाभदायक हो, लेकिनपर हर रोज़ देर रात तक स्क्रीन के सामने समय बिताना बुरी आदत है। देर तक टीवी देखते रहने से शरीर और दिमाग दोनों थकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आदत से छुटकारा पाने के लिए टीवी देखते समय कुछ काम करते रहें। और हफ्ते में दो से तीन बार कुछ समय दोस्तों के साथ बिताएं व टीवी के बजाए खेलकूद में समय दें

धूम्रपान करने वाले अक्‍सर सोंचते हैं कि धूम्रपान करने से उन्‍हें आराम मिलता है और चिंचा दूर हो जाती है, लेकिन वैज्ञानिक डेटा के अनुसार स्‍मोकिंग तुरंत दिल की दर को बढ़ा देता है और दिमाग पर भी बुरा असर डालती है। ठीक यही बात शराब के सेवन पर भी लागू होती है। 

देखा जाए तो आज हम सब जीवन को एक मनोरंजन कार्यक्रम की तरह से लेते हैं, जिसे दर्शकों द्वारा एक स्मार्टफोन कैमरे के माध्यम से देखा जाता है, लेकिन इस सब के बीच में में असली चीजों को देखना भूल जाता हैं। वाशिंटन की बास्तीर यूनिवर्सिटी के स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिकों द्वारा किये एक शोध में पाया गया कि किसी कार्यक्रम में जितने अधिक तस्वीरें और वीडियो लिये जाते हैं, वास्तविक घटनाओं को याद रखना उतना ही मुश्किल हो जाता है। 

क्या आपको याद है कि आखिरी बार कब आपने अपने दोस्त, जीवन साथी या परिवारजन (जोकि सोशल मीडिया पर न हो) के साथ एक सुकून भरी बात-चीत की थी। अगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो शोशल मीडिया में लोगों से घिरे होने के बाद भी व्यक्ति अकेला ही महसूस करता है और मानसिक तनाव से घिर सकता है। 

कुछ लोगों को हमेशा अकेले रहने की आदत होती है। इन्हें लोगों से मेल-मिलाप और बातें करना पसंद नहीं होता है। लेकिन इस तरह के बर्ताव से सोशल लाइफ बर्बाद होती है और रिश्‍तों में दरार आ जाती है। अकेलापन दिमाग के लिए घातक सिद्ध हो सकता है, इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर असर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी दिक्‍कतें आ सकती हैं।

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