18वां शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गनाइजेशन सम्मेलनः भारत ने चीन के 'बेल्ट वन रोड' को नकारा

18वां शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गनाइजेशन सम्मेलनः भारत ने चीन के 'बेल्ट वन रोड' को नकारा चिंगदाओ: आठ देशों के 18वें शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) सम्मेलन में भारत अकेला देश रहा जिसने चीन की महत्त्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) परियोजना का समर्थन नहीं किया. चीन ने इस परियोजना के लिए करीब 80 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से समझौता कर रखा है.

एससीओ के दो दिवसीय सम्मेलन की समाप्ति पर जारी घोषणापत्र में कहा गया है कि रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिजस्तान और तजाकिस्तान ने चीन के बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) को अपने समर्थन की पुष्टि की है.

घोषणापत्र में कहा गया कि सदस्य देशों ने यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन के विकास समेत बीआरआई के क्रियान्वयन की दिशा में किए गए संयुक्त प्रयासों के लिए प्रसन्नता व्यक्त की है. इसके अलावा एससीओ के क्षेत्र में एक व्यापक, खुला, पारस्परिक रूप से लाभकारी और समान साझेदारी को विकसित करने के लिए क्षेत्रीय देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और बहुपक्षीय संघों की क्षमता के इस्तेमाल की भी बात कही गई.

आपको बता दें कि चीन की 'एक क्षेत्र एक सड़क' (ओबीओआर) परियोजना पर एक परोक्ष टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी बड़ी संपर्क सुविधा परियोजना में सदस्य देशों की संप्रभुता और अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि समावेशिता सुनिश्चित करने वाली सभी पहलों के लिए भारत की ओर से पूरा सहयोग मिलेगा.

उल्लेखनीय है कि भारत ओबीओआर का लगातार कड़ा विरोध करता रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट का एक हिस्सा, 50 अरब डॉलर का चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से होकर गुजरता है.

भारत ने कहा है कि वह किसी ऐसे प्रॉजेक्ट को स्वीकार नहीं कर सकता जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसकी मुख्य चिंता को अनदेखा करता हो. चीन ने 2013 में इस परियोजना की रूपरेखा पेश की थी जिसका लक्ष्य दक्षिणपूर्वी एशिया, सेंट्रल एशिया, गल्फ रीजन, अफ्रीका और यूरोप को रोड और सागर के नेटवर्क से जोड़ना है. शी चिनफिंग पहले ही कह चुके हैं कि चीन इस प्रॉजेक्ट में 126 अरब डॉलर का निवेश कर सकता है.

हालांकि कई देशों को इस बात की आशंका है कि इस प्रॉजेक्ट के बहाने चीन वैश्विक रूप से अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. चीन के अधिकारियों के मुताबिक करीब 80 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले ही इस प्रॉजेक्ट के लिए पेइचिंग के साथ समझौता कर लिया है. शी चिनफिंग की मौजूदगी में पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत चाबहार बंदरगाह और अशगाबाद (तुर्कमेनिस्तान) समझौते के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा परियोजना में शामिल है.

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा एक 7,200 किलोमीटर लंबी कई देशों से होकर गुजरने वाली परियोजना है. यह परियोजना भारत, ईरान, अफगानिस्तान, आर्मेनिया, अजरबेजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप को एक मालवहन गलियारे के रूप में जोड़ेगी. अशगाबाद समझौता कई खाड़ी और मध्य एशियाई देशों के बीच परिवहन सुविधाओं के विस्तार और निवेश का समझौता है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 'पड़ोसी देशों के साथ कनेक्टिविटी भारत की प्राथमिकता है.' ओबीओआर के संदर्भ में मोदी ने कहा, 'भारत ऐसी हर परियोजना का स्वागत करता है जो समावेशी, मजबूत और पारदर्शी हो और जो सदस्य देशों की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती हो.'
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