Sunday, 21 October 2018  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

इसरो एक नया ग्रह ढूंढ अंतरिक्ष विज्ञान के चुनिंदा देशों में शामिल

जनता जनार्दन संवाददाता , Jun 09, 2018, 18:03 pm IST
Keywords: New planet   Planet descovery   Sub-Saturn   Super-Neptune   ISRO   Abhijit Chakraborty   PARAS   Spectrograph   Gurushikhar Observatory   भारतीय वैज्ञानिक   ब्रह्मांड   नए ग्रह की खोज   इसरो   
फ़ॉन्ट साइज :
इसरो एक नया ग्रह ढूंढ अंतरिक्ष विज्ञान के चुनिंदा देशों में शामिल नई दिल्लीः भारतीय वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड में पृथ्वी से करीब 6 गुना बड़ा ग्रह खोज निकाला है। यह कारनामा कर के भारत भी अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने अपने दम पर किसी नए ग्रह की खोज की है.  विज्ञान की दुनिया में लगातार आगे बढ़ता भारत आज किसी भी देश से कम नहीं है। भारतीय वैज्ञानिक लगातार अपनी नई-नई खोजों से दुनिया को चकित करते रहते हैं। शुक्रवार के दिन भी भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी एक खोज से दुनिया को हैरान कर दिया।

इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन ने इस नए ग्रह का नाम EPIC 211945201b या K2-236b रखा है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह कारनामा अहमदाबाद के फिजिकल रीसर्च लैबरेटरी (पीआरएल) के वैज्ञानिकों ने किया है। प्रफेसर अभिजीत चक्रवर्ती इस खोज के मुख्य चेहरा हैं, उनके ही नेतृत्व में K2-236b नाम के ग्रह की खोज की गई। हालांकि ग्रह का तापमान 600 डिग्री सेल्सियस होने के चलते वहां जीवन असंभव है।

प्रफेसर अभिजीत ने बताया कि, खोजा गया नया ग्रह पृथ्वी से करीब 600 प्रकाश वर्ष दूर पाया गया है। यह ग्रह पृथ्वी से 27 गुना भारी और रेडियस में पृथ्वी से 6 गुना बड़ा है। हमारी खोज में पता चला है कि K2-236b नाम का यह ग्रह भी सूर्य जैसे बड़े तारे का चक्कर काटता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह खोज माउंट आबू स्थित पीआरएल गुरुशिखर ऑब्जर्वेटरी से की गई। इस ग्रह की खोज के लिए वैज्ञानिकों ने 1.2 मीटर के टेलिस्कोप का इस्तमाल किया था। ग्रह के वजन और रेडियस का पता वैज्ञानिकों ने पीआरएल अडवांस रेडियल-वेलॉसिटी अबु स्काई सर्च की मदद से ही है। इंडियन स्पेस रीसर्च ऑर्गनाइजेशन ने इस खोज को बड़ी खोजों में से एक बताया है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वेबसाइट पर डाली गई पोस्ट पर वैज्ञानिकों ने कहा कि मेजबान स्टार का नाम एपिक 211945201 और के2-236 है और इस खोजे गए ग्रह को एपिक 211945201 बी या k2-236 बी के रूप में जाना जाएगा । इस ग्रह के बारे में 19.5 दिनों में स्टार के आसपास जाने के लिए पाया गया था ।   इस ग्रह की सतह का तापमान 600 डिग्री सेल्सियस के आसपास पाया गया था, क्योंकि यह मेजबान स्टार के बहुत करीब है । पृथ्वी-सूर्य की दूरी की तुलना में यह अपने तारे के करीब सात गुना है । यही गुण इसे निर्जन बना सकता है  ।

इस खोज से इस तरह के सुपर नेपच्यून या उप शनि ग्रहों के निर्माण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी जो  कि  मेजबान स्टार के करीब हैं।  

भारत ने  स्पेक्ट्रोग्राफ पारस ग्रह के द्रव्यमान का एक स्वतंत्र माप के लिए बनाया है।  नासा के K2 (Kepler2) photometry से डेटा प्रणाली के ग्रहों की प्रकृति की पुष्टि नहीं कर सकने कारण पारस का निर्माण महत्वपूर्ण था।
अन्य विज्ञान-तकनीक लेख
वोट दें

क्या बलात्कार जैसे घृणित अपराध का धार्मिक, जातीय वर्गीकरण होना चाहिए?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack