धरती पर चंद्रमा का असरः कभी केवल 18 घंटे का था दिन, बढ़ रही दूरी से जल्द ही 25 घंटे का होगा दिन

जनता जनार्दन डेस्क , Jun 07, 2018, 12:49 pm IST
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धरती पर चंद्रमा का असरः कभी केवल 18 घंटे का था दिन, बढ़ रही दूरी से जल्द ही 25 घंटे का होगा दिन वाशिंगटन: चंद्रमा के पृथ्वी से दूर जाने के कारण हमारे ग्रह पर दिन लंबे होते जा रहे हैं. एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि 1.4 अरब वर्ष पहले धरती पर एक दिन महज 18 घंटे का होता था. संभव है कि धरती से चंद्रमा की बढ़ती दूरी के चलते आने वाले समय में धरती पर 25 घंटे का दिन होने लगे.

पत्रिका प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित यह अध्यन चंद्रमा से हमारे ग्रह के रिश्ते के गहरे इतिहास को पुन स्थापित करता है. इसमें पाया गया कि 1.4 अरब वर्ष पहले चंद्रमा पृथ्वी के ज्यादा करीब था और उसने पृथ्वी के अपनी धूरी के चारों ओर घूमने के तरीके को बदला.

अमेरिका में विस्कॉन्सिन - मैडिसन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीफन मेयर्स ने कहा कि जैसे - जैसे चंद्रमा दूर जा रहा है तो धरती एक स्पिनिंग फिगर स्केटर की तरह व्यवहार कर रही है जो अपनी बाहें फैलाने के दौरान अपनी गति कम कर लेता है. ब्रह्मांड में पृथ्वी की गति अन्य ग्रहों से प्रभावित होती है जो उस पर बल डालते हैं जैसे कि अन्य ग्रह और चंद्रमा. वैज्ञानिकों ने लाखों वर्षों की अवधि में पृथ्वी की इस गति का अवलोकन किया और इससे वह पृथ्वी तथा चंद्रमा के बीच की दूरी और दिन के घंटों का पता लगा पाए.

शोधकर्ताओं का कहना है कि चांद की सतह के नीच अंदरूनी हिस्से में बड़ी मात्रा में पानी हो सकता है. समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, उपग्रह से मिले आंकड़ों के विश्लेषण से अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ज्वालामुखी संग्रहों में या प्राचीन ज्वालामुखी के कारण चंद्रमा की सतह पर फैली चट्टानों के अंदरूनी स्तरों में प्राकृतिक रूप से पानी की पर्याप्त मात्रा होने का पता लगाया है.

पत्रिका जियोसाइंस में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि यह बताता है कि चंद्रमा की ऊपरी सतह और अंदरूनी हिस्से के बीच में पर्याप्त मात्रा में पानी है. शोध के प्रमुख लेखक रॉल्फ मिलिकेन ने कहा कि चंद्रमा पर पानी के पाए जाने के पहले के निष्कर्षो में आंतरिक स्रोतों से पानी होने का पता नहीं चलता है.
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