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ये बनाएंगे डिजीटल इंडियाः एटीएम में सूखा, नहीं है नोट, सो नहीं मिल रहा कैश, रुके काम, हाहाकार

ये बनाएंगे डिजीटल इंडियाः एटीएम में सूखा, नहीं है नोट, सो नहीं मिल रहा कैश, रुके काम, हाहाकार नई दिल्ली: देश को डिजीटल बनाने का दावा करने वाली सरकार उन्हें सही ढंग से पैसे तक मुहैया नहीं करा पा रही है. ऐसा साजिशन हो रहा या लापरवाही के चलते समझना मुश्किल है. देश में एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात नजर आ रहे हैं. कुछ राज्यों और कई शहरों में एटीएम से कैश नहीं निकल रहा है. राजधानी दिल्ली में भी कुछ इलाकों में एटीएम में ऐसी ही स्थिति बनी हुई है. कई स्थानों पर तो ऐसा हो रहा है कि मोबाइल पर निकासी का मैसेज तक आ रहा है और पैसे निकल नहीं रहे हैं. इतना ही नहीं ईमेल के जरिए भी संदेश जा रहा है लेकिन पैसे नहीं निकले हैं.

कुछ जगह एटीएम में निकासी पर कैश निकासी की सीमा तय कर दी गई है. इधर वित्त राज्यमंत्री का कहना है कि कैश की कोई किल्लत नही हैं, ये अलग बात है कि कहीं कम है तो कहीं ज़्यादा है. उन्होंने कहा है कि 2-3 दिन में सब ठीक हो जाएगा.

एटीएम के बाहर फिर से लोगों की लंबी कतारें दिख रही हैं. लोगों में डर है कि कहीं देश में फिर नोटबंदी जैसे हालात न हो जाए. वहीं हालात से निपटने के लिए बयान तो आ रहे हैं. लेकिन नोटबंदी की तरह जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं. वित्त मंत्री अरुण जेटली कर रहे हैं कि कैश का कोई संकट नहीं है जबकि वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला मान रहे हैं कि संकट तो है और दो-तीन में स्थिति सामान्य हो जाएगी.

कैश की किल्लत पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि पर्याप्त से ज्यादा करेंसी चलन में है और कुछ राज्यों में अस्थायी कमी की समस्या से जल्द निपट लिया जाएगा. जेटली ने कहा, 'कैश संकट के इस मुद्दे पर उन्होंने खुद पूरी स्थिति की समीक्षा की है. देश में कैश की कमी नहीं है, सिर्फ कुछ जगहों पर अचानक मांग बढ़ जाने से ये दिक्कत सामने आई है. बाज़ार और बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश मौजूद है.'

हालांकि वित्त मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों से कैश किल्लत की शिकायतें आई हैं, उसपर तुरंत काम किया जा रहा है. क्योंकि आरबीआई के पास कोई मुद्रा की कमी नहीं है.

कैश संकट पर आरबीआई का बयान वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलता-जुलता है. आरबीआई ने कहा है कि देश में कैश का कोई संकट नहीं है. बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश मौजूद है. सिर्फ कुछ एटीएम में ही लोजिस्टिक समस्या के कारण ये संकट पैदा हो गया है.

आरबीआई ने कहा कि एटीएम के अलावा बैंक ब्रांच में भी भरपूर मात्रा में कैश मौजूद है. आरबीआई ने सभी बैंकों को आदेश दिया है कि वह एटीएम में कैश की व्यवस्था करे. रिजर्व बैंक ने कहा है कि मार्च-अप्रैल के दौरान इस प्रकार की समस्या आती है पिछेल साल भी ऐसा हुआ था. ये सिर्फ एक-दो दिनों के लिए ही है.

यही नहीं, रिजर्व बैंक के सूत्रों का कहना है कि कैश किल्लत राज्यों में लोगों के जरूरत से ज्यादा नकदी निकालने की वजह से यह संकट खड़ा हुआ है. आरबीआई का कहना है कि नकदी की उपलब्धता में ऐसे उतार-चढ़ाव होते रहते हैं. जैसे यदि किसी राज्य में डिमांड बढ़ जाती है तो दूसरे राज्य में आपूर्ति पर थोड़ा अंकुश लगा दिया जाता है.

सरकार ने कहा है कि कुछ राज्यों में नोटों की पैदा हुई किल्लत तीन दिनों में खत्म हो जाएगी. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री शिव प्रसाद शुक्ल ने कहा है कि जिन राज्यों में कैस की किल्लत है, वहां दूसरे राज्यों के मुकाबले कम नोट पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार जरूरत के मुताबिक राज्यों के बीच नोटों का उचित वितरण करने की दिशा में कदम उठा रही है.

शुक्ल ने कहा, 'अभी हमारे पास 1 लाख 25 हजार करोड़ रुपये की कैश करंसी है. एक समस्या है कि कुछ राज्यों के पास कम करंसी है जबकि अन्य राज्यों के पास ज्यादा. सरकार ने राज्य स्तर पर समिति गठित की है. वहीं, आरबीआई ने भी नोटों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने के लिए कमिटी गठित की है.' वित्त राज्य मंत्री ने भरोसा दिलाया कि जिन राज्यों में नोटों को कमी पड़ रही है, वहां तीन दिनों में नोटों की नई खेप पहुंचा दी जाएगी.

बता दें कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश से लेकर गुजरात तक के कई शहरों में एटीएम से नकदी नहीं मिल रही है. बताया जा रहा है कि कई बैंकों की शाखाओं से भी लोगों को निराश लौटना पड़ रहा है. कहा जा रहा है कि बैंकों में बढ़ते एनपीए ने बैंकिंग प्रणाली को हिला कर रख दिया है. बैंकों की साख पर सवाल खड़ा हो गया है. इन्हें उबारने के लिए खातों में जमा रकम के इस्तेमाल की अटकलों ने ग्राहकों को डरा दिया है. ऐसे में पैसा निकालने की प्रवृत्ति एकाएक बढ़ गई है और एटीएम पर दबाव चार गुना तक बढ़ गया है.

उत्तर बिहार के ज्यादातर बैंकों में नकदी नहीं होने से शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में एटीएम व बैंक शाखाओं में रुपये के लिए हाहाकार मचा है. बिहार के मुजफ्फरपुर के बैंकों के करेंसी चेस्टों से समस्तीपुर, दरभंगा, गोपालगंज, सारण, सीवान, पूर्वी व पशिचमी चंपारण को नकदी दी जाती है. पिछले डेढ़ माह से इन जिलों में कैश की आपूर्ति नहीं हो रही है. इस कारण यहां भी कैश संकट गहरा गया है.

गुजरात में बैंकों और एटीएम में नकदी की किल्लत के कारण लोगों की मुश्किले थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले उत्तर गुजरात में पैदा हुए इस संकट ने अब लगभग पूरे राज्य में अपना पैर पसार लिया है. लोगों एक बार फिर नोटबंदी जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है. बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी है, जबकि अधिकतर एटीएम में पैसा हीं नहीं है. गुजरात के महेसाणा, पाटन, साबरकांठा, बनासकांठा, मोडासा के अलावा अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे बड़े शहरों में भी नकदी संकट बना हुआ है.

बता दें कि पिछले साल मई में दो हजार के नोटों को छापना बंद कर दिया गया था. इसकी जगह पांच सौ और दो सौ रुपये के नोटों को लाया गया. इससे एटीएम में डाले जा रहे नोटों की वैल्यू कम हो रही है. गौर करने की बात है कि अगर दो हजार के नोटों से एटीएम को भरा जाए तो 60 लाख रुपये तक आ जाते हैं. पांच सौ और सौ के नोटों से ये क्षमता महज 15 से 20 लाख रुपये रह गई है.

इसके अलावा समस्या का एक कारण यह भी है कि 200 के नोट के लिए एटीएम तैयार नहीं हैं. अभी तक महज 30 फीसदी एटीएम ही 200 रुपये को लेकर कैलीब्रेट हो सके हैं. यानी 70 फीसदी एटीएम 200 का नोट देने में सक्षम ही नहीं हैं. इतना ही नहीं आरबीआई की रैंडम जांच में पाया गया है कि करीब 30 फीसदी एटीएम औसतन हर समय खराब रहते हैं.

कैश की कमी की वजह से लोगों के महत्वपूर्ण काम रुक रहे हैं. उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक व्यक्ति ने मंगलवार सुबह से 5-6 एटीएम का चक्कर लगाने के बाद कहा कि उन्हें बच्चों का ऐडमिशन करवाने के लिए पैसे नहीं मिल पा रहे हैं. साथ ही, रोजमर्रा के सामान और सब्जियां भी नहीं खरीद पा रहे हैं.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कुछ राज्यों में शुरू हुई नोटों की कमी की समस्या पूर्वी महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात में भी फैल गई. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तो इसके पीछे गहरी साजिश की आशंका तक व्यक्त कर दी.




रिजर्व बैंक ऑफिसर कन्फेडरेशन ने दावा किया है कि देश में 30 से 40 फीसदी कैश की कमी है और यह कमी रिजर्व बैंक द्वारा लगातार डिजिटल इकोनॉमी का दबाव बनाने से हुई है.

अधिकारियों के इस संगठन ने दावा किया है कि देशभर में लोगों में केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एफआरडीआई बिल का खौफ है, लिहाजा लोग बैंक में पैसा जमा करने की जगह कैश अपने पास रखने को तरजीह दे रहे हैं.

इस संगठन के मुताबिक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया डिजिटल इकोनॉमी बनाने के लिए कैश की राशनिंग कर रहा है जिससे कई राज्यों में कैश का संकट देखने को मिल रहा है.

सर्कुलेशन में 30 से 40 फीसदी करेंसी की कमी 2000 रुपए और 500 रुपए की करेंसी सर्कुलेशन से बाहर जाने के चलते पैदा हुई है. इस तथ्य से यह साफ है कि देशभर में लोगों को बैंकिंग व्यवस्था में संभावित बदलावों का डर पनप रहा है और लोग अधिक से अधिक पैसा बड़ी करेंसी में घर पर रखने को तरजीह दे रहे हैं.

गौरतलब रिजर्व बैंक की रपट बताती है कि देश में अभी मुद्रा का स्तर नोटबंदी से पहले वाले स्तर यानी करीब 17 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है.

हालांकि, केंद्र सरकार के स्पष्टीकरण से कैश क्रंच का असली कारण पता चल चुका है. पर जनता कारण जान कर क्या करेगी? इतनी प्रचंड गरमी में उसके लिए अपने ही रुपयों के लिए धक्के खाना, भा नहीं रहा.
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