Friday, 21 September 2018  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

शी जिनपिंगः ताउम्र चीन के राष्ट्रपति बने रहेंगे, दिखाऊ संसद ने बदला कानून

शी जिनपिंगः ताउम्र चीन के राष्ट्रपति बने रहेंगे, दिखाऊ संसद ने बदला कानून बीजिंगः चीन की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है. बदलाव यह है कि वहां के मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताउम्र राष्ट्रपति बने रहेंगे. न सिर्फ राष्ट्रपति बल्कि उपराष्ट्रपति भी जिंदगी भर अपने पद पर बने रहेंगे. अभी तक वहां राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति सिर्फ दो कार्यकाल तक ही अपने पद पर बने रह सकते थे.

सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की ओर से प्रस्तावित संविधान संशोधन को पारित होने की बात पहले से तय मानी जा रही थी. आखिरकार वैसा हुआ भी. रविवार को इस संविधान संसद को संसद से मंजूरी मिल गई.

चीन की संसद ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए दो कार्यकाल की अनिवार्यता खत्म कर दिया है. इस बदलाव से शी जिनपिंग इस पद पर जिंदगी भर बने रह सकते हैं.

इस समय शी जिनपिंग का दूसरा कार्यकाल चल रहा है. दूसरा कार्यकाल 2023 में पूरा होगा. संसद के सालाना सत्र से पहले कम्युनिस्ट पार्टी आफ चाइना ने राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के दो कार्यकाल की सीमा को हटाने का प्रस्ताव पेश किया. जिससे मतदान के बाद मंजूरी दी गई.

चीन में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) के करीब 3,000 सांसदों में से दो-तिहाई बहुमत ने दो कार्यकाल की अनिवार्यता को खत्म करने के पक्ष में वोट किया.

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष संगठन सात सदस्यीय स्थाई समिति ने इस संशोधन को मंजूरी दे दी है. एनपीसी को देश के अधिकार विहीन संसद के रूप में देखा जाता है, जो हमेशा सीपीसी के सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे देता है. ऐसे में इस संविधान संशोधन के भी संसद में बिना किसी रुकावट के ध्वनिमत से पारित होने की पूरी संभावना पहले से ही थी.

सबसे पहले डेंग जियोपिंग ने दो कार्यकाल की अनिवार्यता शुरू की थी ताकि तानाशाही से बचा जा सके. संविधान संशोधन के बाद 64 साल के जिनपिंग के जीवन भर चीन का नेता बने रहने के रास्ते का रोड़ा समाप्त हो जाएगा.

फिलहाल उनका पांच साल का दूसरा कार्यकाल चल रहा है और मौजूदा प्रणाली के तहत वह शासन के 10 साल पूरे होने के बाद 2023 में रिटायर हो जाएंगे. माओ के बाद शी को देश का सबसे मजबूत नेता माना जाने लगा है, क्योंकि वह देश के राष्ट्रपति होने के अलावा सीपीसी और सेना दोनों के प्रमुख भी हैं.

शी जिनपिंग का चीन की राजनीति में क्या रुतबा है, इसका पता इसी बात से चलता है कि चीनी संविधान में शी को चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता और संस्थापक माओत्से तुंग के बराबर दर्जा दिया गया है. 2012 में चीन का राष्ट्रपति बनने के बाद से शी का दबदबा लगातार बढ़ता गया, और अब वे सर्वोच्च हो गए हैं.

शी जिनपिंग के जीवन पर एक नजर

  •     1953: शी जिनपिंग का जन्‍म 15 जून 1953 को हुआ था। उनके पिता कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के नेता थे।
  •     1975: शी जिनपिंग ने साल 1975 में सिंगुआ यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। जिनपिंग ने कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के ब्रांच सेक्रेटरी पद से शुरुआत की और बाद में पार्टी की ग्रामीण ईकाई में भी किया। यह 1966 से 1976 का वो दौर था, जिसे चीन सांस्‍कृतिक क्रांति के तौर पर जाना जाता है। शी जिनपिंग ऐसा मानते हैं कि किसानों के साथ इस दौरान उन्‍होंने जो वक्‍त बिताया, उससे उन्‍हें काफी मजबूती मिली।
  •     1979: शी जिनपिंग के लिए यह साल बेहद अहम रहा। इस वर्ष ने उन्‍हें सेंट्रल मिलिट्री कमिशन के सेक्रेटरी जनरल का सचिव नियुक्‍त किया गया था। चीन में इस कमीशन को काफी ताकतवर माना जाता है। चीनी सेना पर इस कमीशन का खास नियंत्रण है। चीन के अन्‍य शीर्ष नेताओं की तरह शी जिनपिंग भी मिलिट्री यूनिफॉर्म पहना करते थे।
  •     1982: इस साल शी जिनपिंग को बाओदिंग भेजा गया। राजधानी से कुछ घंटों की दूरी पर बसी इस काउंटी में उन्‍हें कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के डिप्‍टी सेक्रेटरी का पद सौंपा गया।
  •     1987: शी जिनपिंग ने 1987 में पेंग लियुआन से शादी कर ली। पेंग उस समय मशहूर सिंगर थीं और चीन की टेलिविजन ऑडियंस के बीच खासी लोकप्रिय भी। जिस वक्‍त शी जिनपिंग ने पेंग से शादी की थी उस वक्‍त पेंग उनसे ज्‍यादा लोकप्रिय थीं। पेंग से शादी के बाद शी जिनपिंग का प्रोफाइल थोड़ा उभरकर सामने आया। उस वक्‍त वह भी कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं की तरह एक सामान्‍य काडर ही थे।
  •     1990: 1980 से लेकर 1990 तक शी जिनपिंग को पार्टी से सरकार और सरकार से सेना में कई प्रकार की जिम्‍मेदारियां मिलती रहीं। उन्‍होंने ज्‍यादातर पूर्वी तटीय इलाकों में कार्यभार संभाला, जो कि ताईवान से सटे इलाके हैं। आर्थिक दृष्टि से यह बेहद अहम इलाका था। शी जिनपिंग एक के बाद एक सीढि़यां चढ़ते हुए फुजियान प्रांत के गवर्नर बनाए गए। इसके बाद वह चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई में सबसे ताकतवर अधिकारी बनाए गए और अब राष्‍ट्रीय पटल पर उभरकर सामने आ चुके थे।
  •     2007: इस साल शी जिनपिंग को कम्‍युनिस्‍ट पार्टी का पावर सेंटर माने जाने वाले पोलित ब्‍यूरो में जगह मिली। यहां पर जगह पाने के बाद उन्‍हें चीन के पूर्व राष्‍ट्रपति हूं जिताओ का उत्‍तराधिकारी माना जाने लगा था।
  •     2012: इस साल शी जिनपिंग को पार्टी जनरल सेक्रेटरी और सैन्‍य आयोग का चेयरमैन बनाया गया। इसके बाद शी जिनपिंग ने चीन के राष्‍ट्रपति का पद संभाला और सरकार के उन सभी आयोग की कमान संभाल ली, जिनका सेना पर नियंत्रण था।
  •     2016: कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ चाइना ने 18 अक्‍टूबर 2017 को 19वीं नेशनल कांग्रेस में शी जिनपिंग को 'कोर लीडर ऑफ चाइना' का टाइटल दिया गया। चीन के संस्‍थापक पार्टी ने पहले ही माओत्से तुंग और देंग शियाओ पिंग के बाद यह सम्‍मान पाने वाले शी जिनपिंग तीसरे नेता हैं।
  •     2018: कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ चाइना ने इस साल अपने संविधान में राष्‍ट्रपति और उपराष्‍ट्रपति के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा समाप्‍त कर दी। चीन की संसद ने 11 मार्च को दो कार्यकाल की अनिवार्यता को दो तिहाई बहुमत से खत्म कर दिया। दो कार्यकाल की अनिवार्यता को दो तिहाई बहुमत से खत्म किया है। सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना द्वारा प्रस्तावित संशोधन को संसद से मंजूरी मिलना तय ही माना जा रहा था. संवैधानिक बदलाव के साथ ही 64 वर्षीय शी जिनपिंग का आजीवन चीनी राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता साफ हो गया है. इस समय उनका दूसरा कार्यकाल चल रहा है, जो कि 2023 में खत्म होगा.
अन्य पूरब लेख
वोट दें

क्या बलात्कार जैसे घृणित अपराध का धार्मिक, जातीय वर्गीकरण होना चाहिए?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack