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राजीव की राजनीतिक अनिच्छा, मनमोहन बतौर पीएम, वाजपेयी व मोदी का मुकाबला जैसे मसलों पर सोनिया की बेवाक राय

राजीव की राजनीतिक अनिच्छा, मनमोहन बतौर पीएम, वाजपेयी व मोदी का मुकाबला जैसे मसलों पर सोनिया की बेवाक राय मुंबई: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शुक्रवार को कहा कि हम 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा को सत्ता में आने नहीं देंगे. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में उन्होंने यह बात कही.

अपने राजनीतिक सफर के बारे में सोनिया ने कहा कि वह नहीं चाहती थीं कि राजीव राजनीति में आएं, लेकिन उन्हें इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजनीति में आना पड़ा. इसी तरह वह खुद भी राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, लेकिन उन्हें भी मजबूरी में यह फैसला लेना पड़ा. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस मुश्किल में थी, तो राजनीति में आना पड़ा. अगर वह ऐसा नहीं करती तो लोग कायर कहते.'

सोनिया गांधी ने बहुत साफगोई से कहा कि मुझे स्वाभाविक तौर पर भाषण देना नहीं आता, इसलिए लोग मुझे 'लीडर' नहीं 'रीडर' यानी नेता नहीं बल्कि भाषण पढ़ने वाला कहते थे.
 
मनमोहन सिंह को पीएम बनाने के सावाल पर उन्होंने कहा कि मुझे पता था कि मनमोहन सिंह मुझसे बेहतर होंगे क्योंकि मैं अपनी सीमाओं के बारे में जानतीं थी. यही वजह रही कि हमने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया. सोनिया ने कहा कि कांग्रेस को संगठन के स्तर पर लोगों से जुड़ने का नया तरीका विकसित करने की आवश्‍यकता है. सोनिया गांधी ने राहुल गांधी की क्षमताओं में भरोसा भी जताया.

कॉन्कलेव में सोनिया ने कहा कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सब कुछ बदला, मैं नहीं चाहती थी कि राजीव गांधी राजनीति में कदम रखें, मैं भी राजनीति में आने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन राजनीति में नहीं आती तो लोग मुझे कायर कहते, कांग्रेस मुश्किल में थी तो फैसला बदला, फिर मैं राजनीति में आयी.
 
सोनिया ने कहा कि 2019 के चुनाव में भाजपा का जुमला चुनावी मुद्दा होगा, भाजपा सरकार जनता के उम्मीदों पर खरी नहीं सकी है. आगे उन्होंने कहा कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के उपचुनावों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है, आगे भी अच्छे नतीजे देखने का मिलेंगे और कर्नाटक में भी दोबारा कांग्रेस की सरकार बनने की उम्मीद हमें है.

उन्होंने कहा कि विरोधियों को भाजपा मुकदमों में फंसाकर कमजोर करने का काम कर रही है. मुझे खोखलों नारों और जुमलों पर विश्वास नहीं, हम भाजपा को दोबारा सत्ता में नहीं आने देंगे, 2019 में कांग्रेस सत्ता में आएगी, मुझे देश की जनता पर पूरा भरोसा है.

उन्होंने कहा कि सरकार अहम मुद्दे पर चर्चा से पीछे भाग रही है. सोनिया ने आरोप लगाया कि जब पीएनबी फ्रॉड पर संसद में चर्चा की मांग की गई तो सरकार ने इससे पीछे हट गई. उन्होंने कहा कि जब विपक्षी संसद में नहीं बोलेंगे तो फिर संसद क्यों है? क्यों ना संसद को बंद कर दिया जाय?

इंडिया टुडे कॉनक्लेव के 17वें संस्करण में सोनिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में कांग्रेस के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाकर और भ्रामक प्रचार कर सत्ता पाई है. उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी की मार्केटिंग पॉलिसी के सामने कांग्रेस मात खा गई. हालांकि, 10 साल के यूपीए शासनकाल के बाद एंडी इनकमबेंसी फैक्टर को उन्होंने खारिज नहीं किया.

जब इंडिया टुडे ग्रुप के अध्यक्ष अरुण पुरी ने उनसे पूछा कि 2014 के चुनाव से कांग्रेस ने क्या सीखा तो सोनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को लोगों के साथ संवाद करने का नया तरीका अपनाना होगा और पार्टी इस पर काम कर रही है.

केंद्र की नरेंद्र मोदी और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के बीच तुलना किए जाने के सवाल पर सोनिया ने वाजपेयी की तारीफ की और कहा कि वह विपक्षी नेताओं और दलों का सम्मान करते थे. सोनिया ने कहा कि वाजपेयी संसदीय परंपराओं में विश्वास रखने वाले नेता हैं जबकि मौजूदा दौर में संसदीय नियमों और परंपराओं का पालन नहीं हो रहा है.

जब अरुण पुरी ने पूछा कि आप नरेंद्र मोदी को कितना जानती हैं तो सोनिया ने कटाक्ष करते हुए कहा, “मैंने पूरी रामायण पढ़ ली, आप पूछ रहे हैं, सीता कौन है?” सोनिया ने यह भी कहा कि क्या मई 2014 से पहले देश एक ब्लैकहोल था और सिर्फ इसके बाद ही देश ने सबकुछ किया है. सोनिया ने यह भी कहा कि बीजेपी और नरेंद्र मोदी की टीम लोगों को यह समझाने में कामयाब रही कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है.

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में सोनिया ने बताया कि राहुल गांधी तीन दिन के लिए अपनी नानी से मिलने जरूर गए थे, लेकिन वे चुनाव का अपना काम करके गए थे. सोनिया से पूछा गया कि बीजेपी का नेतृत्व 24 घंटे सक्रिय रहता है, जबकि कांग्रेस और राहुल गांधी ब्रेक लेते रहते हैं. मोदी सरकार 24 घंटे राजनीतिक मशीन की तरह काम करती है, वहीं कांग्रेस की कार्यप्रणाली में ढीलापन देखा जाता है.

सोनिया के मुताबिक पार्टी में बहुत से लोग छुट्टी लेते रहते हैं, जिनके बारे में कोई खबर नहीं आती और छुट्टी लेना ठीक भी है. राहुल गांधी को सलाह देने की बात पर सोनिया ने कहा कि वह अपना मत किसी पर थोपने की कोशिश नहीं करती हैं. लिहाजा यह जरूरी कि उन्हें उनका काम करने की पूरी आजादी रहे. सोनिया ने कहा कि पार्टी के सभी नेताओं का काम करने का अपना तरीका है. राहुल की भी अपनी स्टाइल है. राहुल की कोशिश रही है कि कांग्रेस में नई जान फूंकी जाए.

खुद प्रधानमंत्री नहीं बनने पर सोनिया ने कहा कि भरोसा था कि मनमोहन सिंह उनसे बेहतर प्रधानमंत्री साबित होंगे. उन्हें अपनी क्षमताओं के बारे में पता है. हिंदी भाषा सीखने के बारे में उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें हिंदी में बोलने में दिक्कत होती थी. लेकिन इंदिरा गांधी उनसे हिंदी में ही बात करने को कहती थीं. शुरुआत में हिंदी बोलने में उन्हें खासी दिक्कत आई, यहां तक कि उनकी अंग्रेजी भी अच्छी नहीं थी.

सोनिया गांधी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के बाद अब उनके पास अधिक समय है. लिहाजा इस समय में वह राजीव गांधी से जुड़े पुराने दस्तावेजों को पढ़ने और परिवार की जिम्मेदारी निभाने में लगा रही है.
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