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डायबिटीज एक नहीं पांच अलग-अलग रोग है, जिसके लिए इंसुलिन जरूरी नहीं

डायबिटीज एक नहीं पांच अलग-अलग रोग है, जिसके लिए इंसुलिन जरूरी नहीं नई दिल्लीः डायबिटीज को लेकर दुनियाभर में शोध जारी है. योरोप में हुए नए शोध के मुताबिक डायबिटीज केवल एक रोग नहीं, बल्कि कई रोगों का मिला-जुला रूप है. इसी तरह डायबिटीज के इलाज के मामले में भारतीय डॉक्टरों ने भी एक महत्वपूर्ण खोज की है, जिसकी दुनियाभर में चर्चा है.

डॉक्टरों के मुताबिक इस खोज से डायबिटीज के प्रकार का पता कर उसका इलाज आसानी से किया जा सकता है. उनका कहना है कि डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन लेना पड़ता है जबकि टाइप-1 डायबिटीज का उपचार इंसुलिन के बिना संभव है.

बीएमसी मेडिकल जेनेटिक्स जर्नल में मैच्योरिटी ऑनसेट डायबिटीज ऑफ द यंग (एमओडीवाई) नाम से प्रकाशित इस रिसर्च में डायबिटीज के टाइप का उल्लेख किया है.  

डॉक्टरों ने बताया कि सामान्य रूप से डायबिटीज के दो प्रकार होते हैं. टाइप-1 डायबिटीज की शिकायत युवाओं या बच्चों को होती है. एमओडीवाई के साथ मरीज आमतौर पर कमजोर होते हैं और उनकी कम उम्र के कारण उन्हें टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित बताया जाता है और उन्हें जीवनभर इंसुलिन इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है.

जबकि टाइप-2 डायबिटीज आम तौर पर वयस्कों को प्रभावित करता है और बीमारी के अंतिम स्तरों को छोड़कर हाइपरग्लाइकेमिया को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन की ज़रूरत नहीं होती है.

एमडीआरएफ के निदेशक डॉक्टर वी मोहन के अनुसार, एमओडीवाई जैसे डायबिटीज के मोनोजेनिक प्रारूप का पता चलने का महत्व सही जांच तक है क्योंकि मरीज़ों को अक्सर गलत ढंग से टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित बता दिया जाता है और उन्हें गैर-ज़रूरी रूप से पूरी जिंदगी इंसुलिन इंजेक्शन लेने की सलाह दी जाती है.

जबकि सचाई यह है कि एक बार एमओडीवाई का पता चलने पर एमओडीवाई के ज्यादातर प्रारूपों में इंसुलिन इंजेक्शन से पूरी तरह बचा जा सकता है और इन मरीज़ों का इलाज बहुत ही सस्ते सल्फोनिलयूरिया टैबलेट से किया जाता है जिनका इस्तेमाल दशकों से डायबिटीज के इलाज के लिए किया जाता है. जहां तक उपचार और इन मरीज़ों के जीवन और उनके परिवारों की बात है तो यह एक व्यापक बदलाव है.”

एमडीआरएफ के जेनोमिक्स प्रमुख डॉक्टर राधा वेंकटेशन के अनुसार, दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ है जब एनकेएक्स 6-1 जीन म्युटेशन को एमओडीवाई के नए प्रकार के तौर पर परिभाषित किया गया है. एमओडीवाई का यह प्रकार सिर्फ भारतीयों के लिए अनोखा है या यह अन्य लोगों में भी पाया जाता है, यह जांचने के लिए आगे भी अध्ययन करने होंगे.
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