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.. तो बैठ जाएंगे दुनिया के शेयर बाजार

जनता जनार्दन संवाददाता , Aug 09, 2011, 11:45 am IST
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.. तो बैठ जाएंगे दुनिया के शेयर बाजार मुम्बई/वाशिंगटन: तेजी से कमाई और तरक्की की जो अंधाधुंध दौड़ अमेरिका ने दिखाई थी उससे वहां की कंपनियों ने तो खूब तरक्की की पर देश की आर्थिक व्यवस्था खोखली होती गयी, नतीजतन अमेरिका तो आज दिवालिया होने के कगार पर है ही, उसका पीछा करने की होड़ में लगे दुनिया भर के शेयर बाजार भी औंधे मुंह गिर गए हैं. रविवार के बाद से दुनिया भर के बाजारों की हालत खस्ता है.

देश के शेयर बाजारों में सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिवस मंगलवार को शुरुआती कारोबार में तेज गिरावट का रुख देखा गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 472.31 अंक गिरकर 16517.87 पर जबकि निफ्टी 170.60 अंक गिरकर 4947.90 पर खुला।

सुबह करीब 9.25 बजे बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 460.69 अंकों की गिरावट के साथ 16529.49 पर जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी सूचकांक 132.65 अंकों की गिरावट के साथ 4985.85 पर कारोबार कर रहा था।

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट का रुख था। सोमवार को भी शेयर बाजारों में जबरदस्त गिरावट आई थी।

उधर वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के बाद से अमेरिका के शेयर बाजारों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को तीनों प्रमुख सूचकांकों में पांच से सात फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

राष्ट्रपति बराक ओबामा के आश्वासनों का बाजार पर कोई सकारात्मक असर नहीं पड़ा और डाउ जोंस इंडस्ट्रीयल एवरेज सोमवार को 634 अंक यानी 5.6 फीसदी गिरकर 11 हजार के नीचे पहुंच गया जो पिछले नवम्बर के बाद से सबसे निम्न स्तर है। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स 500 सूचकांक 6.7 प्रतिशत और नास्डैक 175 अंक यानी 6.9 फीसदी गिरकर 2358 पर पहुंच गया।

ओबामा ने कहा था कि अमेरिका की समस्या समाधान करने योग्य है और यह हमेशा 'एएए' अर्थव्यवस्था रहेगी। अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछले दो सप्ताहों के दौरान 15 फीसदी की गिरावट आई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि एस एंड पी द्वारा अमेरिका की साख रेटिंग कम किए जाने से इतना असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन बाजार में खरीददारी नहीं हो रही है।

आईएनजी निवेश प्रबंधन के संपत्ति आवंटन के प्रमुख पॉल जेमस्की के हवाले से सीएनएन ने कहा, "रेटिंग में कमी को लेकर निवेशकों में एक ही धारणा है पहले शेयर बेचो फिर सवाल करो।"

इस गिरावट की आंधी से कुछ शेयर से बच सके हैं। डाउ जोंस 30 और एस एंड पी 500 के सभी शेयरों में गिरावट देखी गई। बैंक ऑफ अमेरिका के शेयरों में 20 फीसदी और सिटी समूह और मोर्गन स्टैनले के शेयरों में 15-15 फीसदी की गिरावट आई।

सच तो यह है की साख रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एस एंड पी)की अमेरिका की साख रेटिंग और कम किए जाने की चेतावनी के कारण दुनिया के शेयर बाजारों में आई गिरावट का असर सोमवार को देश के शेयर बाजारों में भी देखा गया। प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 315.69 अंक गिरकर 16990.18 पर जबकि निफ्टी 92.75 अंक गिरकर 5118.50 पर बंद हुआ।

अंतर्राष्ट्रीय साख रेटिंग एस एंड पी ने अमेरिका की साख रेटिंग 'एएए' से घटाकर 'एए+' करने के दो दिन बाद रविवार को फिर चेतावनी दी कि यदि वाशिंगटन में जारी राजनीतिक टकराव की स्थिति नहीं सुधरती है तो उसे रेटिंग को और कम करना पड़ सकता है। इसके कारण भी शेयर बाजारों में जबर्दस्त गिरावट आई है।

सुबह नौ बजे बम्बई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 398.30 अंकों की गिरावट के साथ 16907.57 पर जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी सूचकांक 127.40 अंकों की गिरावट के साथ 5083.85 पर खुला। कारोबार शुरू होने के कुछ समय बाद सेंसेक्स 546.42 अंकों की गिरावट के साथ 16759.45 पर जबकि निफ्टी 157.20 अंकों की गिरावट के साथ 5054.05 पर पहुंच गया।

दोपहर बाद केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और भारतीय रिजर्व बैंक के बयानों के बाद स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ और सेंसेक्स 58.00 अंकों की गिरावट के साथ 17247.87 पर पहुंच गया। लेकिन यह स्थिति ज्यादा देर तक नहीं रही और शाम होते-होते बाजार फिर धराशायी हो गया।

मुखर्जी ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार आर्थिक सुधार की प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाते रहेगी और अर्थव्यवस्था की जड़ मजबूत होने के कारण पूंजी का प्रवाह बना रहेगा। उन्होंने एक बयान में कहा, "अमेरिका और यूरोप की अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा घटनाक्रम के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा हो गई है। इन चीजों का भारत पर मामूली असर पड़ेगा।"

मुखर्जी ने कहा, "... भारत की विकास की कहानी... जड़ें मजबूत हैं, ऐसे में हम चुनौती से निपटने के मामले में किसी भी अन्य देश से बेहतर स्थिति में हैं।"

उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कमोडिटी की कीमतों विशेषकर, तेल की कीमत में कमी से महंगाई पर काबू पाने में सहायता मिलेगी। इससे वर्ष 2011-12 में वित्तीय संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी।"

मुखर्जी ने हालांकि स्वीकार किया इस संकट से आने वाले समय में देश में पूंजी और व्यापार की आवक में कमी आ सकती है। लेकिन ऐसी भी सम्भावना है कि विकसित अर्थव्यवस्थाओं में संकट के कारण हमारी अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचे।

उन्होंने कहा, "देश की विकास की दर अच्छी है और तात्कालिक प्रभाव के छोड़ दें तो हम विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भारत के आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में देख सकते हैं।"

इससे पहले मुम्बई में भारतीय रिजर्व बैंक ने ताजा हालात का अर्थव्यवस्था पर मामूली असर पड़ने की सम्भावना जताते हुए कहा कि वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी रही।

रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा, "जैसाकि शुक्रवार को बाजार के व्यवहार से लगा था कि भारत इन चीजों से अछूता नहीं है। यद्यपि यह ध्यान रखना होगा कि वैश्विक वित्तीय संकट के सबसे खराब दौर में भारत की विकास दर 6.8 फीसदी रही। घरेलू कारकों के कारण अर्थव्यवस्था में लचीलापन कायम है।" शीर्ष बैंक ने कहा, "वैश्विक स्थिति को देखते हुए खतरा बढ़ सकता है लेकिन इनका अर्थव्यवस्था पर सीमित असर पड़ेगा।"

बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप 100.25 अंक गिरकर 6488.60 पर जबकि स्मॉलकैप 173.97 अंक गिरकर 7641.08 पर बंद हुआ।

दिन के कारोबार में बीएसई के सभी सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी (4.46 फीसदी), सूचना प्रौद्योगिकी (4.33 फीसदी), प्रौद्योगिकी (3.60 फीसदी) और धातु (3.50 फीसदी) सेक्टर में तीन फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु (0.33 फीसदी), सार्वजनिक उपक्रम (0.53 फीसदी), तेल एवं गैस (0.57 फीसदी) और स्वास्थ्य क्षेत्र (0.72 फीसदी) में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

गिरावट के रुख के बीच हीरो होंडा (4.03 फीसदी), ओएनजीसी (2.35 फीसदी), महिंद्रा एंड महिंद्रा (1.68 फीसदी), बजाज ऑटो (0.86 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (0.31 फीसदी) और सन फार्मा (0.04 फीसदी) के शेयरों में तेजी दर्ज की गई।

इसके अलावा सभी कम्पनियों के शेयरों में गिरावट आई। डीएलएफ (6.85 फीसदी), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (6.85 फीसदी), टाटा मोटर्स (6.51 फीसदी), इंफोसिस (4.73 फीसदी), टीसीएस (4.49 फीसदी) और टाटा स्टील (4.12 फीसदी) के शेयरों में चार फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

उधर, जी-7 के देशों और यूरोपीय सेंट्रल बैंक के वित्तीय मदद देने के आश्वासन के बाद यूरोपीय बाजार में शुरुआत में कुछ स्थिरता देखी गई लेकिन बाद में इनमें भी गिरावट देखी गई। ऐसा एशियाई देशों के बाजार में आई गिरावट का परिणाम माना जा रहा है।

सोमवार को लंदन और पेरिस के बाजार सकारात्मक अंदाज में खुले। स्पेन और इटली के बाजार में तेजी देखी गई। लेकिन बाद में इनमें भी गिरावट का रुख देखा गया। जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में चार फीसदी तक की गिरावट देखी गई।
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