ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2018: पर्यावरण संरक्षण पर बातचीत

नई दिल्ली: दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ती पर्यावरण संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए साहित्य को ज़रिया बनाने की प्रतिबद्धता के तहत ज़ी जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के 11वें संस्करण में समुद्रों, नदियों, पहाड़ों, वनों, वन्य जीवन और ऐसी प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षण के लिए गंभीर संवाद शुरू किया है। इसके लिए संरक्षण एवं पर्यावरण संबंधी मुद्दे पर केंद्रित सत्रों का आयोजन किया गया।

24 जनवरी से लेकर 29 जनवरी 2018 तक दिग्गी पैलेस, जयपुर में द वैनिशिंग स्टेपवेल्स आॅफ इंडिया; द वैनि्शिंगः टाइगर्स; फाॅरेस्ट्स एंड नेचर; वाए वी मस्ट प्रोटेक्ट द अरावलीज़; कनफ्लिक्ट्स आॅफ इंटरेस्ट्सः बिट्रेयल्स आॅफ अर्थ, ग्रीड एंड ह्यूमन एस्पिरेशन; द लास्ट वेवः आईलैंड्स इन फ्लक्स और रिवर आॅफ लाइफ, रिवर आॅफ डेथः द गैंजेस एंड इंडियाज़ फ्यूचर व अन्य जैसे कई विशयों पर गहन और गंभीर चर्चाएं होंगी।

द वैनिशिंग स्टेपवेल्स आॅफ इंडिया में भारत के प्राचीन स्टेपवेल्स की वास्तुकला एवं इतिहास और भूमिगत जल संरक्षण पारिस्थितिकी में उनकी अभिन्न भूमिका पर रोशनी डालने वाली पत्रकार विक्टोरिया लाॅटमैन्स की हाल में आई पुस्तक द वैनिशिंग स्टेपवेल्स आॅफ इंडिया से चर्चा शुरू की जाएगी। यह भारत के पारंपरिक जल भंडारण व्यवस्था के ऊपर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है। लेखक एवं होटल मालिक व धरोहर पुनःस्थापन में अग्रणी रहने वाले अमन नाथ; लेखक, पुरातत्वविद् एवं इतिहासकार रीमा हूजा और पुस्तक की लेखिका इन पुराने भूमिगत कुओं व इनके पर्यावरण, सामाजिक एवं धार्मिक महत्व के बारे में चर्चा करेंगे।

जेफरी गेटलमैन और सुनीता नारायण कनफ्लिक्ट्स आॅफ इंटरेस्ट्सः बिट्रेयल्स आॅफ अर्थ सत्र में अमिता बाविस्कर के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे कि कैसे भारत और दुनिया के सामने पर्यावरण संबंधी चुनौतियां तेज़ी से बढ़ रही हैं। भले ही काॅर्पोरेट लाॅबीज़ पूंजीवाद और कार्बन के बीच के संबंधी को छिपाने की कोशिश करें लेकिन इसके जलवायु परिवर्तन पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभावों बाढ़ से लेकर ग्लोबल वार्मिंग तक, वायु प्रदू्षण एवं पर्यावरण अद्योगति की ओर उतना ध्यान नहीं दिया जाता है, जितना दिया जाना चाहिए।

एक ऐसा सत्र जिसमें वजहों और परिणामों के समाधान पर बात होगी, जलवायु की तबाही और पर्यावरण को न्याय पर चर्चा होगी और इसमें भारत व विश्व के पर्यावरण पर काफी कुछ लिखने वाले पत्रकार जेफरी गेटलमैन, कनफ्लिक्ट्स आॅफ इंटरेस्टः माई जर्नी थ्रू इंडियाज़ ग्रीन मूवमेंट की लेखिका सुनीता नारायण सो्शियोलाॅजी की प्रोफेसर अमिता बाविस्कर से बातचीत करेंगे। अमिता भी पर्यावरण व भारत में होने वाले विकास पर लिखती हैं।

ग्रीड एंड ह्यूमन एस्पिरेशन में इस विचार पर चर्चा होगी कि आधुनिक समाज की महत्वाकांक्षाओं की कभी न खत्म होने वाली भूख की वजह है लालच व उपभोग, जिसे बढ़ावा मिलता है सपनों के सौदागरों के कपट और सोच-समझकर की गई चालबाज़ी से, जो तुरंत खु्शी की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। अधिक संसाधनों के इस्तेमाल, सैन्यीकरण, विवाद और जलवायु परिवर्तन के बीच स्पष्ट और स्थापित संबंध है।

अर्थशास्त्री एवं समाजविद् बाजार अर्थव्यवस्था की भूमिका, उपभोग की राजनीतिक पारिस्थितिकी और मितव्ययिता एवं स्थिरता के आदर्शों पर चर्चा करेंगे। अंबी परमेश्वरम, अरुण मायरा, दीपांकर गुप्ता, गुरुचरण दास और स्टीफन ग्रीन के साथ श्रीनिवासन जैन इस बारे में चर्चा करेंगे।

बीज़, बटरफ्लाइज़ एंड ब्लूम्सः हाउ द डिक्लाइन इन पाॅलिनेटिंग इंसेक्ट्स थ्रेटन्स द नैचुरल वर्ल्ड में इस गंभीर वास्तविकता पर चर्चा की जाएगी कि दुनिया में मधुमक्खियों और परागण में अहम भूमिका निभाने वाले कीट संकट में हैं। यह एक जटिल समस्या है जिस पर दुनिया भर के वैज्ञानिक विचार कर रहे हैं लेकिन इसका निदान होने की उम्मीद कम ही है क्योंकि दुनिया भर में परागण कीटों की स्वस्थ आबादी के बिना भविष्य में हमारी खाद्य सुरक्षा पर जोखिम के बादल मंडरा रहे हैं। लेखक, प्रसारक और बागबन साराह रेवन शहरों, कस्बों और गांवों में फूलों की आबादी बढ़ाकर परागण कीटों की घटती आबादी रोकने के मिशन पर हैं।

पंकज शेखसरिया ने अंडमान एंड निकोबार द्वीप की कोमल पारिस्थितिकी का दस्तावेज़ीकरण किया है, वह पर्यावरण, वन्य जीवन संरक्षण और विकास के नाम पर जिन स्थानीय समुदायों की पारंपरिक जीवनशैली पर जोखिम मंडराने लगा है, के बारे में लगातार लिखते रहे हैं। द लास्ट वेवः आईलैंड्स इन फ्लक्स सत्र के दौरान लेखिका व पर्यावरणविद् अमिता बाविस्कर के साथ बातचीत में वह द्वीपों के प्रति अपने जुनून, वहां के संवेदनशील लोगों, पारिस्थितिकी और उससे संबंधित बातों के साथ ही कार्यकर्ता व रिसर्चर से लेकर इन जादुई व अस्थिर द्वीपों की इतनी समझ रखने की अपनी निजी यात्रा के बारे में बताएंगे।

भारत और शायद दुनिया की सबसे पुरानी पहाड़ श्रृंखला को बचाने की आवश्यकता के बारे में वाए वी मस्ट प्रोटेक्ट द अरावलीज़ में वक्ता इस बात पर चर्चा करेंगे कि कैसे जमीन के हिस्से टकराने और ज्वालामुखी फूटने से बने ये पहाड़ करीब 700 किलोमीटर की रेंज तक फैले हैं और ये करीब 300 करोड़ वर्ष पुराने हैं। राजस्थान में मध्य अरावली में स्थित सबसे ऊंची चोटी माउंट आबू की ऊंचाई 5650 फीट है। अत्यधिक खनन, कटने और अद्योगति के कारण ये प्राचीन और बरबाद हो चुके ये पहाड़ क्षेत्र के पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए बेहद अहम हैं। प्रदीप कृष्ण और प्रणय लाल इन उबड़-खाबड़ एवं इतने शोषण के बावजूद अपना अस्तित्व बचाए हुए इन पहाड़ों के भूविज्ञान, इतिहास और संस्कृति के साथ ही उनके वन्य जीवन, वनस्पति और वन्य क्षेत्र के बारे में बताएंगे। वे इन्हें बचाने की गंभीर जरूरत पर भी जोर देंगे और इस सत्र का परिचय प्रेरणा सिंह बिंद्रा देंगी जबकि विजुअल्स होंगे आदित्य आर्य के।

हमारे ग्रह पर मनुष्यों एवं अन्य प्रजातियों के बीच संबंध कभी भी आज जितने कमजोर नहीं रहे। द वैनिशिंगः इंडियाज़ वाइल्ड लाइन क्राइसिस और वेह्न आई ग्रो अप आई वान्ट टु बी ए टाइगर की लेखिका प्रेरणा सिंह बिंद्रा बच्चों व वयस्कों का ध्यान इस बात की ओर दिलाएंगी कि उनके लिए वन्य जीवन को समझना संरक्षित करना और उसे बचाकर पोषित करना हमारे संसार को बचाए रखने के लिए कितना जरूरी है। शिक्षक एवं संरक्षणविद् हेमा मायरा द वैनिशिंगः टाइगर्स, फाॅरेस्ट्स एंड नेचर में नुपुर पाइवा के साथ बातचीत में हमें बाघों, घटते वन्य जीवन और प्रकृति में रह रही प्रजातियों के बीच नाजुक संतुलन के बारे में बताएंगी।

नर्सरियों और विश्वविद्यालयों, मधुमक्खियों एवं आवंटन, शहरों व थिएटरों, वुडलैंड्स और त्योहारों, चैरिटी व अभियानों और फोटोग्राफी, फिल्मों, संगीत, विजुअल एवं प्लास्टिक आर्ट और पूरे साहित्य में हरित लेखन में नवचेतना आई है। लेकिन प्रकृति के बारे में कोई कैसे लिखे? और ऐसा क्या हुआ है कि हाल के वर्षों में प्रकृति को विषय बनाकर लिखने का चलन बढ़ गया है? प्रकृति और साहित्य के बारे में बिलकुल भिन्न तरीकों से लिखने वाले एडम निकोलसन, एलेक्जेंड्रा हैरिस, ह्यू थाॅमसन इस लेखन श्रेणी के बारे में वनस्पतिज्ञ प्रदीप कृष्ण से द ग्रीन रोड इनटू द हिल्सः राइटिंग द नैचुरल वल्र्ड में बात करेंगे।

भारत के पहले डायनासोर टाइटनोसाॅर को उसका नाम देने में करीब 50 साल का समय लगा था जबकि अन्य भारतीय डायनासोर राजासाॅर्स को टिरेनोसाॅरस रेक्स से काफी खूंखार माना जाता है। बायोकेमिस्ट एवं कलाकार प्रणय लाल द राइज़ एंड फाॅल आॅफ डायनासोर्स इन इंडिया में प्रदीप कृ्ष्ण बताएंगे कि कैसे टेक्नोलाॅजी की सीमित उपलब्धता और उत्सुकता की कमी ने भारत में पाए जाने वाले जीवाश्मों के प्राकृतिक संसार के बारे में जानकारी और संरक्षण को सीमित कर दिया है।

विक्टर मैलेट लिखते हैं ’’इंडिया इज़ किलिंग द गैंजेस’’ ’’एंड द गैंजेस इन टर्न इस किलिंग इंडिया’’। करीब तीन सहस्राब्दियों से किसी भी अन्य जल स्रोत के मुकाबले कहीं अधिक संख्या में लोगों का भरण-पो्षण करने वाली गंगा अब कचरे और हानिकारक पदार्थों से इतनी ज्यादा प्रदूषित हो चुकी है कि वह मनुष्यों एवं जानवरों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन चुकी है। फाइनैंशियल टाइम्स के पूर्व भारतीय करेस्पोंडेंट मैलेट इस पवित्र नदी के स्रोत से लेकर उसके मुंह और प्राचीन समय से लेकर आधुनिक समय तक गंगा की यात्रा पर रिवर आफ लाइफ, रिवर आॅफ डेथः द गैंजेस एंड इंडियाज़ फ्यूचर में नजर डालेंगे।
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