डोकलाम हमारा, सेना तैनात रहेगीः जनरल बिपिन रावत के बयान पर चीन के तेवर उग्र

डोकलाम हमारा, सेना तैनात रहेगीः जनरल बिपिन रावत के बयान पर चीन के तेवर उग्र नई दिल्लीः चीन ने भारतीय सैन्य प्रमुख जनरल बिपिन रावत के बयान के जवाब में उग्र तेवर दिखाना जारी रखा है. चीन ने विवादित क्षेत्र डोकलाम में अपनी सेना की तैनाती बरकरार रखने की बात कही है.

चीन ने कहा है कि डोकलाम पर कोई विवाद नहीं है और उसकी सेना यहां पैट्रोलिंग जारी रखेगी. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने पाक में सैन्य बेस बनाने और अरुणाचल प्रदेश पर भी अपने देश का नजरिया सामने रखा है.

इससे पहले जनरल रावत ने कहा था कि डोकलाम में चीनी सैनिकों की संख्या में कमी आ रही है. इस पर चीन ने कहा है कि वह अपने सैनिकों को डोकलाम से नहीं हटाने जा रहा है. चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है, 'डोकलाम चीन का इलाका रहा है और हमेशा से चीन के प्रभावी अधिकार क्षेत्र में है. इस विषय पर कोई विवाद नहीं है.'

चीनी विदेश मंत्रालय ने आगे कहा है, 'चीन की सीमा पर तैनात सैनिक यहां पैट्रोलिंग करते रहेंगे और ठिकाने भी बनाएंगे. ऐतिहासिक समझौतों और संप्रभु देश होने के नाते ऐसा करना चीन का अधिकार है.'

बता दें कि सिक्किम सेक्टर स्थित डोकलाम के मुद्दे पर पिछले साल भारत और चीन के बीच 73 दिन तक गतिरोध कायम रहा था. यह गतिरोध 28 अगस्त को खत्म हुआ था.

रावत ने सोमवार को कहा था कि भारतीय और चीनी सैनिकों ने अरुणाचल प्रदेश के ट्यूटिंग में भारतीय सीमा में एक सड़क बनाने की चीनी टीमों की हालिया कोशिश का मुद्दा सुलझा लिया है. थलसेना प्रमुख ने यह भी कहा था कि डोकलाम इलाके में चीनी सैनिकों की संख्या में काफी कमी आई है.

सैनिकों की संख्या में कमी पर टिप्पणी नहीं की. लू ने जनरल रावत की इस टिप्पणी पर भी प्रत्यक्ष तौर से कुछ नहीं कहा कि भारत और चीन ने अरुणाचल प्रदेश के ट्यूटिंग में भारतीय क्षेत्र में सड़क बनाने की चीनी सैनिकों की योजना से जुड़ा मसला दिसंबर के आखिरी हफ्ते में सुलझा लिया. उन्होंने अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को दोहराया. चीन अरुणाचल को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता रहा है.

लू कांग ने अरुणाचल प्रदेश पर कहा, 'यह फिर से दोहराया जाना चाहिए कि पूर्वी चीन और भारत की सीमा पर बड़ा विवाद है. इसलिए हमें आपसी सहमति से एक नतीजे पर पहुंचना होगा. इससे पहले हमें वहां सुरक्षा और शांति कायम करनी होगी.'

कांग ने आगे कहा, 'हम सभी प्रासंगिक विवादों को सीमा संबंधी ऐतिहासिक समझौतों के तहत व्यवस्थित तरीके से सुलझा सकते हैं.'

चीनी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बनाने पर कहा, 'हमें नहीं पता कि इस बारे में बाहर क्या कहा जा रहा है. सीपीईसी का निर्माण 'बेल्ट एंड रोड' बनाने का काफी अहम हिस्सा है. चीन और पाकिस्तान की कोशिश है कि सीपीईसी से दोनों देशों और वहां के लोगों को फायदा हो. इसलिए दूसरे देशों को इस बारे में ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.'
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