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रोक के बावजूद जिग्नेश मेवाणी ने की हुंकार रैली, कहा प्रधानमंत्री को भीमा-कोरेगांव पर बोलना चाहिए

जनता जनार्दन संवाददाता , Jan 09, 2018, 19:19 pm IST
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रोक के बावजूद जिग्नेश मेवाणी ने की हुंकार रैली, कहा प्रधानमंत्री को भीमा-कोरेगांव पर बोलना चाहिए नई दिल्लीः युवा हुंकार रैली के लिए दिल्ली पुलिस से मंजूरी नहीं मिलने के बाद भी दलित नेता और गुजरात से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने दिल्ली के संसद मार्ग पर रैली की. मेवाणी के साथ आरटीआई कार्यकर्ता अखिल गोगोई और वामपंथी छात्र नेता शहला राशिद ने रैली में शिरकत की. मेवाणी की इस रैली के समर्थन में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी पहुंचे.

हुंकार रैली को संबोधित करते हुए जिग्नेश मेवानी कहा कि जिस तरह भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी जैसे जरूरी मुद्दों को घर वापसी, लव जेहाद और गाय से छिपा दिया गया है, हम उसके खिलाफ खड़े हैं.

हालांकि इससे पहले मेवाणी को अन्य नेताओं के साथ कनॉट प्लेस पर रोक दिया गया था. साथ ही मेवाणी के समर्थकों को पूर्वी दिल्ली के रानी गार्डन इलाके में रोका गया था. जिस पर जिग्नेश मेवाणी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि, 'हम लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने जा रहे थे, लेकिन सरकार ने हमें निशाना बनाया और एक चुने हुए प्रतिनिधि को अपनी बात रखने से रोका गया.'

जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि, 'सरकार हमारी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. दलितों और गरीबों पर अत्याचार हो रहा है. हमें रैली की इजाजत मिलनी चाहिए. हम संविधान में दायरे में रहकर काम करेंगे.'

दरअसल, राजधानी दिल्ली में हुंकार रैली के आयोजन पर विवाद हो गया था. एनजीटी के आदेश का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पर मेवाणी की रैली को मंजूरी नहीं दी.

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मेवाणी को रामलीला मैदान में रैली करने को कहा गया, लेकिन मेवाणी ने लिखित तौर पर कुछ नहीं दिया. दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पर युवा हुंकार रैली के आयोजन के मद्देनजर भारी सुरक्षाबल तैनात किया है.  
 
रैली का मकसद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद को रिहा कराने की मांग के साथ ही सामाजिक न्याय की आवाज बुलंद करना है. रैली में बड़ी संख्या में शिक्षक और महिला संगठनों के कार्यकर्ता पहुंचे हैं.

रैली से पहले जिग्नेश मेवाणी के खिलाफ संसद मार्ग में पोस्टर्स लगे थे, जिसमें मेवाणी पर भड़काऊ भाषण देने, नक्सलियों से संबंध और जातीय हिंसा करवाने के आरोप लगाए गए.
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