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पद्मावती रिलीज हुई तो फिल्मकार, सरकार, सेंसर बोर्ड सभी परिणाम भुगतेंगेः करणी सेना

पद्मावती रिलीज हुई तो फिल्मकार, सरकार, सेंसर बोर्ड सभी परिणाम भुगतेंगेः करणी सेना नई दिल्लीः पद्मावती फिल्म के निर्माताओं और सेंसर बोर्ड के बीच फिल्म की रिलीज को लेकर हुए समझौते को मूवी का विरोध कर रहे संगठन करणी सेना ने खारिज कर दिया है. राजपूत करणी सेना ने शुक्रवार को कहा कि यदि फिल्म रिलीज होती है तो इससे जुड़े लोगों के साथ ही सरकार और सेंसर बोर्ड को इसके परिणाम भुगतने होंगे. निर्माता संजय लीला भंसाली की ओर से फिल्म को काल्पनिक बताए जाने पर करणी सेना ने कहा कि हम इस पर पूरी तरह से बैन लगाए जाने की मांग करते हैं.

फिल्ममेकर्स और सरकार को खुली धमकी देते हुए राजपूत करणी सेना के नैशनल प्रेजिडेंट सुखदेव सिंह गोगामेदी ने कहा फिल्म रिलीज होने के बाद जो परिणाम होंगे, उसके लिए बीजेपी सरकार और सेंसर बोर्ड पूरी तरह जिम्मेदार होंगे. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि साल के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में राजनीतिक जमीन को भांपते हुए करणी सेना इसके तीखे विरोध में जुटी है ताकि उस वक्त इसे भुनाया जा सके.

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक करणी सेना आगामी चुनाव में राजनीतिक पदार्पण की तैयारी में है. इसके लिए वह बीजेपी पर दबाव बना रही है. 28 दिसंबर को सेंसर बोर्ड की परीक्षण समिति, इतिहासकारों के पैनल और फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से समीक्षा किए जाने के बाद कहा गया था कि यदि फिल्म निर्माता 5 बदलाव करते हैं तो इसे यूए सर्टिफिकेट दिया जा सकता है.

यही नहीं सेंसर बोर्ड ने कहा था कि निर्माता को फिल्म के नाम से 'आई' हटाना होगा और इसे सिर्फ पद्मावत लिखना होगा. इसके अलावा निर्माताओं को यह डिसक्लेमर भी देना होगा कि यह पूरी तरह काल्पनिक है. फिल्म की शुरुआत में यह डिसक्लेमर भी देना होगा कि मूवी किसी भी तरह से सती प्रथा की परंपरा को बढ़ावा नहीं देती है.

करणी सेना के नेता सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने जौहर प्रथा के उल्लेख पर नाराजगी जताई. कहा, जौहर इसलिए किया गया था क्योंकि माता पद्मिनी नहीं चा‍हती थीं कि खि‍लजी उनके मृत शरीर को भी हाथ लगा सके. अगर जान देनी होती तो वो जहर पीकर भी दे सकती थीं. उनका ये बलिदान महान था.

हालांकि इन सब बातों को खारिज करते हुए सुखदेव सिंह ने कहा, 'जिस प्रकार भंसाली की फिल्म काल्पनिक है, उसी प्रकार जब हम सिनेमा हॉल पर फूल बरसाएंगे, वह भी काल्पनिक ही होगा. इसके जिम्मेदार केंद्र सरकार और फिल्म सेंसर बोर्ड ही होंगे.'

यही नहीं सुखदेव सिंह ने फिल्म के गाने 'घूमर' की अडवांस रिलीज को लेकर भी भंसाली पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस गाने में रानी पद्मावती को गलत ढंग से दिखाया गया है. इतिहास में किसी भी राजपूत रानी ने इस तरह से डांस नहीं किया था.

पद्मावती की फंडिंग पर सवाल उठाते हुए करणी सेना ने कहा, फिल्म उस दौरान बनी जब देशभर में नोटबंदी लागू की गई थी. करणी हमारे पास नोटबंदी के दौर में 4 हजार रुपये भी नहीं थे और इनको फिल्म के लिए कहां से करोड़ों की फंडिंग मिल गई. सरकार इसकी भी जांच कराए.

करणी सेना ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि अब तक जब फिल्म को सरकार ने अनुमति नहीं दी और ना ही सेंसर बोर्ड ने अनुमति दी तो फिर क्यों संजय लीला भंसाली पर देशद्रोह का केस क्यों दर्ज नहीं हुआ. करणी सेना ने संजय लीला भंसाली पर हिन्दू संस्‍कृति को बेचने का आरोप लगाया.

केंद्रीय खेल राज्य मंत्री नेशनल शूटर राज्यवर्धन सिंह राठौर के अब तक इस्तीफा ना देने पर भी सवाल उठाए. कहा, राज्यवर्धन माता पद्मीनी के राज्य से आते हैं फिर भी उन्होंने अब तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया.

करणी सेना ने पद्मावती को रिलीज करने को लेकर बीजेपी को भी धमकी दी. कहा, आगे चलकर राजस्थान में 3 उपचुनाव हैं. बीजेपी की वादाखि‍लाफी का हम जवाब दे सकते हैं. हम बीजेपी को वोट से वंचित भी कर सकते हैं. 28 दिसंबर को पद्मावती को लेकर हुई बैठक में फिल्म पद्मावती पर लिए गए फैसले पर करणी सेना ने कहा कि प्रसून जोशी को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए. करणी सेना ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी का भी विरोध किया.

प्रसून जोशी ने पिछले शनिवार को कई मीडिया चैनलों को पांच सवालों के जवाब दिए थे, जो ये हैं

1. क्या फिल्म में कई कट्स लगाए जा रहे हैं?

प्रसून : गलत. सेंसर बोर्ड ने कोई भी कट लगाने का सुझाव नहीं दिया है. सिर्फ 5 बदलाव सुझाए हैं. जो इस तर‍ह हैं-

a). डिस्क्लेमर को बदलना जो कि फिल्म के ऐतिहासिक तथ्यों का सही होने का दावा नहीं करता.

b). विचार विमर्श के बाद फिल्म के टाइटल को 'पद्मावती' से 'पद्मावत' करना, जि‍ससे ये साफ हो सके कि निर्माताओं की फिल्म की रचना महाकाव्य 'पद्मावत' पर आधारित है.

c). फिल्म के गाने घूमर में चरित्र के मुताबिक जरूरी बदलाव किए जाएं.

d). फिल्म में गलत, भ्रामक संदर्भ और ऐतिहास‍कि जगहों के नाम बदले जाएं.

e). फिल्म में एक डिस्क्लेमर शामिल किया जाए जो साफतौर से बताए कि 'जौहर' का महिमा मंडन नहीं किया जा रहा है.

2. क्या बदलावों पर फिल्म निर्माता राजी हैं?

प्रसून : हां, फिल्म के निर्माता पूरी तरह से इस समझौते के साथ हैं. इसमें निर्माता और निर्देशक शामिल हैं.

3. CBFC ने कब देखी फिल्म?

प्रसून : 28 दिसंबर की शाम फिल्म देखी गई, जहां एग्जामिनिंग कमेटी, स्पेशल पैनल के साथ मैं मौजूद था. स्क्रीनिंग के बाद मेकर्स के साथ मुलाकात भी की गई और लंबी चर्चा हुई.

4. इस तरह का स्पेशल पैनल क्यों?

प्रसून : फिल्म को लेकर बने माहौल और जटिलताओं को देखते हुए इस तरह के पैनल की जरूरत पड़ी ताकि सेंसर बोर्ड अंतिम फैसले से पहले तमाम पहलुओं पर अच्छी तरह से सोच-विचार सके.

मीटिंग में शामिल

मीटिंग में CBFC चीफ प्रसून जोशी, उदयपुर पूर्व राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़, जयपुर यूनि‍वर्सिटी के डॉ चंद्रमणी सिंह और प्रोफेसर के.के. सिंह शामिल थे. पैनल के सदस्यों ने पद्मावती से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं और कई पहलुओं पर दावों के साथ सुझाव दिए.

पद्मावती विवाद

फिल्म को लेकर लंबे समय से हंगामा है. आरोप है कि भंसाली ने पद्मावती के व्यक्तित्व को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है. आरोप है कि फिल्म में रानी पद्मावती और खि‍लजी के बीच ड्रीम सीक्वेंस है. हालांकि भंसाली खुद इस बात को खारिज कर चुके हैं. बाद में एक बयान में उन्होंने ये भी कहा था कि उनकी फिल्म मालिक मोहम्मद जायसी की पद्मावत पर आधारित है.

विवाद की वजह से 12 दिसंबर को प्रस्तावित फिल्म सेंसर में अटक गई और इसकी रिलीज डेट टालनी पड़ी. भंसाली को संसदीय कमेटी के सामने भी पेश होना पड़ा, जहां वो कई सवालों का जवाब नहीं डे पाए. चर्चा है कि अगर फिल्म अगले साल रिलीज हो सकती है. हालांकि अभी सेंसर को इसे पास करना है. पद्मावती को लेकर विवाद भी शांत नहीं हुए हैं. इस फिल्म में दीपिका पादुकोण पद्मावती की भूमिका जबकि रणवीर सिंह अलाउद्दीन खि‍लजी और शाहिद राज रतन सिंह रावल के किरदार में नजर आएंगे.
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