तीन तलाक विधेयक लोकसभा में पेशः पीएम मोदी की आम सहमति की अपील, कांग्रेस ने की स्‍टैंडिंग कमेटी की बात

जनता जनार्दन संवाददाता , Dec 28, 2017, 17:06 pm IST
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तीन तलाक विधेयक लोकसभा में पेशः पीएम मोदी की आम सहमति की अपील, कांग्रेस ने की स्‍टैंडिंग कमेटी की बात नई दिल्ली: लोकसभा में आज पेश हुए तीन तलाक विधेयक पर चर्चा जारी है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विधेयक को पेश किया. इसपर राजद, ओवैसी व अन्‍य कुछ दलों द्वारा विरोध जताया गया वहीं कांग्रेस की ओर से इसे समर्थन दिया गया है.

कानून मंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सभी इस्‍लामी मुल्‍कों में भी तीन तलाक नहीं है. वहां भी तलाक से पहले नोटिस देते हैं. इससे तलाक पीड़ितों को मदद मिलेगी न कि शरिया में दखल दिया जाएगा.

कानून मंत्री ने आगे कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक पर रोक लगाने के बावजूद अभी भी यह जारी है. आज सुबह मैंने अखबार में रामपुर का एक मामला देखा जिसमें देर से जगने पर पत्‍नी को तलाक दे दिया.

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, ‘बिल संसदीय समिति में भेजी जाए. वहां सभी पार्टी के लोग होंगे. बिल पर बातचीत के लिए कुछ वक्त दिया जाए. हम सब बिल को सपोर्ट करते हैं. लेकिन इसमें कुछ खामियां हैं जिसे संसदीय समिति में दूर किया जाएगा. हम सब साथ बैठकर एक तय समय में इन कमियों को दूर कर सकते हैं.'

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद जयप्रकाश यादव ने कहा कि "इस मसले पर मुस्लिम पर्सनल बोर्ड से मशविरा और सहमति की कोशिश की जानी चाहिए. पति जेल में, पत्नी घर में, बच्चों की परवरिश कौन करेगा. सकारात्मक पहल होना चाहिए."

"ये कैसे संभव है कि जो आदमी जेल में हो और भत्ता भी अदा करे. आप कैसा क़ानून बना रहे हैं. मंत्री जी ने शुरुआत में ही कहा कि बिल पर मशविरा नहीं किया गया है. अगर ये बिल पास हो जाता है तो मुस्लिम महिलाओं के साथ नाइंसाफ़ी होगी. लोग अपनी पत्नियों को छोड़ देंगे."

"देश में 20 लाख ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें उनके पतियों ने छोड़ दिया है और वो मुसलमान नहीं हैं. उनके लिए क़ानून बनाए जाने की ज़रूरत है. इनमें गुजरात में हमारी भाभी भी है. उन्हें इंसाफ़ दिलाए जाने की ज़रूरत है. ये सरकार ऐसा नहीं कर रही है."

मोदी सरकार ने लोकसभा में तीन तलाक के खिलाफ बिल को पेश कर दिया है. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को बिल पेश किया, तो राजद, बीजेडी समेत कई विपक्षी पार्टियों ने बिल में सजा के प्रावधान का विरोध किया. लेकिन सदन में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार के साथ है.

कांग्रेस तीन तलाक बिल का विरोध नहीं करेगी, ना ही कोई संशोधन लाएगी. कांग्रेस की ओर से सिर्फ तीन सुझाव दिए जाएंगे.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पार्टी तीन तलाक बिल का समर्थन करेगी, हालांकि कुछ सुझाव सरकार के सामने जरूर रखे जाएंगे. कांग्रेस की ओर से ये दो बड़े सुझाव दे सकती हैं.

1. तलाक के बाद मुस्लिम महिला को कितना भत्ता मिलेगा, पत्नी को पति की आय का कितना हिस्सा मिलेगा. इसका फॉर्मूला क्या होगा.

2. अगर पति तीन साल के लिए जेल जाएगा, तो पत्नी को भत्ता किस प्रकार मिलेगा.

सूत्रों की मानें, तो पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में बुधवार देर रात कांग्रेसियों इस मुद्दे पर बैठक की. सूत्रों के मुताबिक बैठक में तीन तलाक बिल के पक्ष में कांग्रेस दिखी थी. ऐसे में मुमकिन है कि इस बिल को पास करवाने में केंद्र सरकार को कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए.

रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस ने तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत के मुद्दे को हमेशा इस मापदंड पर आंका है कि महिला अधिकारों की सुरक्षा हो और महिलाओं की बराबरी संविधान सर्वमत्ति तरीके से हो.

इस बीच सरकार ने बिल को स्‍टैंडिंग कमिटी में भेजने की मांग ठुकराई. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अधिकांश तीन तलाक की पीड़ित महिलाएं हैं जो कह रही हैं कि सजा तीन साल है. इसे और आगे बढ़ाएं. अगर इनको कोई सुझाव देना है तो सदन में दीजिए. अगर सही होगा तो हम उसे शामिल करेंगे. बाकि खड़गे जी ने कहा है कि मैं ठीक-ठाक वकील हूं तो मैं उन्हे समझा दूंगा.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तीन तलाक के बारे में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तीन तलाक को प्रतिबंधित करने वाले कानून का समर्थन करती है. हमारा यह मानना है कि महिलाओं के संगठन और मुस्लिम संगठनों की राय के अनुसार इस कानून को और पुख्ता बनाने की आवश्यकता है.

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में मुस्लिम महिला को गुजारा भत्ता देने की बात कही गई है. किंतु गुजारे के निर्धारण का तौर तरीका नहीं बताया गया है, सरकार को इस बारे में व्याख्या करनी चाहिए. सुष्मिता ने कहा कि 1986 के मुस्लिम महिला संबंधी एक कानून के तहत तलाक पाने वाली महिलाओं को गुजारा भत्ता मिल रहा है. कहीं नए कानून के कारण उन्हें यह गुजारा भत्ता मिलना बंद न हो जाए.

लोकसभा में जब बिल पेश हुआ तो राजद, बीजेदी समेत कुछ विपक्षी पार्टियों ने सजा के प्रावधान का विरोध किया. असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस बिल का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये बिल संविधान के मुताबिक नहीं है. ओवैसी ने कहा कि तलाक ए बिद्दत गैरकानूनी है, घरेलू हिंसा को लेकर भी कानून पहले से मौजूद है फिर इसी तरह के एक और कानून की जरूरत क्या है?

कांग्रेस ने कहा बिल को स्‍टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाएगा. खड्गे ने कहा बिल में कुछ खामियां हैं, जो कमेटी दूर कर सकती है हम इसके समर्थन में हैं. कांग्रेस की ओर से की गयी इस मांग को सरकार ने ठुकरा दिया और कहा कि जो भी चर्चा हो सदन में ही होनी चाहिए.

कानून मंत्री ने आज के दिन को ऐतिहासिक करार दिया. लेकिन इस विधेयक के प्रावधानों पर राजद, बीजद और ओवैसी ने विरोध दर्ज कर सवाल उठाए. वहीं कांग्रेस को कोई संशोधन नहीं चाहिए केवल वे अपना सुझाव देंगे. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वसम्‍मति से संसद में ट्रिपल तलाक बिल पारित कराने की अपील की थी.

ऑल इंडिया मुस्‍लिम वूमंस पर्सनल लॉ बोर्ड की शाइस्‍ता अंबर ने कहा, 'यह ऐतिहासिक दिन है, कई सालों से महिलाएं इसे झेलती आ रही हैं और यह उनके धैर्य का ही पुरस्‍कार है. सभी सांसदों से मेरा आग्रह है कि इस विधेयक को पारित करें.'

एआइएमआइएम के प्रेसिडेंट असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा, 'बिल में मूलभूत अधिकारों का हनन है जब पहले से ही घरेलू हिंसा के लिए कानून है तो इस विधेयक की क्‍या जरूरत है.'  

केरल से मुस्लिम लीग के सांसद मोहम्मद बशीर ने कहा, ये विधेयक संविधान के अनुच्छद 25 का उल्लंघन है. ये विधेयक पर्सनल लॉ में अतिक्रमण करता है.

बीजद की ओर से भी विधेयक के प्रावधानों को लेकर विरोध जताया गया. बीजद की ओर से कहा गया कि तीन तलाक बिल की दोबारा समीक्षा की जाए. बीजू जनता दल के सासंद भृतहरि महताब ने कहा, इस बिल में कमियां हैं. इस बिल में कई विरोधाभास हैं.

कानून मंत्री ने कहा, आज ऐतिहासिक दिन है. सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक को पाप बताया गया था. तीन तलाक बिल पूरी तरह संवैधानिक है. यह नारी गरिमा सम्‍मान का बिल है. यह बिल किसी मजहब संप्रदाय के खिलाफ नहीं है. कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक जारी था.

तीन तलाक को खत्‍म करने वाला कानून, इसका मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है.

प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या 'तलाक ए बिद्दत' पर लागू होगा. इसके तहत पीड़िता अपने व अपने नाबालिग बच्चों के लिए संरक्षण व गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है.

इस मामले पर मजिस्‍ट्रेट अंतिम फैसला करेंगे. इसके तहत किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.

तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने पर पति को तीन साल की जेल की सजा हो सकती है. तलाक-ए-बिद्दत मुस्लिम समाज में लंबे समय से चली आ रही एक प्रथा है जिसमें कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर सकता है.

इसको सायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जिसपर कोर्ट ने अपने फैसले में इसे अवैध करार दिया था.

सत्तारूढ़ दल भाजपा ने लोकसभा में ट्रिपल तलाक का बिल पारित कराने के लिए अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया था.

बता दें कि कानून मंत्री ने कहा था कि मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ट्रिपल तलाक बिल पारित कराने को भाजपा ने कमर कस ली है.

गौरतलब है कि सरकार ‘द मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स इन मैरिज एक्ट’ नाम से इस विधेयक को ला रही है. ये कानून सिर्फ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर ही लागू होगा. इस कानून के बाद कोई भी मुस्लिम पति अगर पत्नी को तीन तलाक देगा तो वो गैर-कानूनी होगा.

इसके बाद से किसी भी स्वरूप में दिया गया तीन तलाक वह चाहें मौखिक हो, लिखित और या मैसेज में, वह अवैध होगा. जो भी तीन तलाक देगा, उसको तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है. यानि तीन तलाक देना गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा. इसमें मजिस्ट्रेट तय करेगा कि कितना जुर्माना होगा.

पीएम नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक पर कानून बनाने के लिए एक मंत्री समूह बनाया था, जिसमें राजनाथ सिंह, अरुण जेटली,  सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, पीपी चौधरी और जितेंद्र सिंह शामिल थे.
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