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चारा घोटाला फैसलाः लालू और उनकी टीम के बारे में जो कुछ आपको जानना चाहिए

चारा घोटाला फैसलाः लालू और उनकी टीम के बारे में जो कुछ आपको जानना चाहिए पटनाः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों लालू प्रसाद और डॉ जगन्नाथ मिश्र समेत 22 आरोपियों पर चारा घोटाले के एक मामले में फैसला हो चुका है. सीबीआई के विशेष जज शिवपाल सिंह की अदालत ने फैसला सुना दिया. पर यह केस है क्या, जिसने देश और बिहार की सियासत को हिला कर रख दिया था.

यह चारा घोटाला (आरसी 64ए/96) देवघर कोषागार से 89.4 लाख रुपए की अवैध निकासी से संबंधित है. 21 साल पुराने इस केस में सीबीआई ने शुरू में 38 लोगों को आरोपी बनाया था. इसमें 11 की मौत ट्रायल के दौरान हो गई. दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए और निर्णय के पूर्व ही अपना दोष स्वीकार कर लिया. सीबीआई ने इस मामले में देवघर कोषागार से फर्जी बिल बना कर राशि की निकासी करने का आरोप लगाया है.

आपूर्तिकर्ताओं पर बिना सामान की आपूर्ति किए बिल देने और विभाग के अधिकारियों पर बिना जांच किए उसे पास करने का आरोप है. लालू प्रसाद पर गड़बड़ी की जानकारी होने के बाद भी  इस पर रोक नहीं लगाने का आरोप है.

डॉ जगन्नाथ मिश्र पर पशुपालन विभाग के उन अधिकारियों को सेवा विस्तार की सिफारिश करने का आरोप है, जो इस घोटाले में शामिल थे. इस मामले में लालू की ओर से 22 गवाह पेश किए गए. सभी पक्षों को सुनने और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद अदालत ने 14 दिसंबर को सुनवाई पूरी कर  23 दिसंबर को  फैसले की तिथि निर्धारित की. इस दिन  सभी आरोपियों को अदालत में सशरीर हाजिर होने का निर्देश भी अदालत ने दिया था.

इनका फैसला
राजनीतिज्ञ आरोपी - लालू प्रसाद, डॉ जगन्नाथ मिश्र,  पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, पूर्व मंत्री डॉ आरके राणा, बिहार के पूर्व पशुपालन मंत्री विद्या सागर निषाद व पीएसी के पूर्व अध्यक्ष ध्रुव भगत।
आईएएस अधिकारी - पूर्व पशुपालन सचिव बेक जुलियस, महेश प्रसाद, पूर्व वित्त आयुक्त फूलचंद सिंह एवं पूर्व आयकर आयुक्त अधिप चंद्र  चौधरी, कृष्ण कुमार प्रसाद, सुबीर भट्टाचार्य, त्रिपुरारी मोहन प्रसाद, संजय कुमार अग्रवाल,ज्योति कुमार झा, गोपीनाथ दास, सुनील गांधी, सरस्वती चंद्रा, साधना सिंह, राजाराम जोशी, सुशील कुमार.

करीब 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले मामले में अब तक 47 मामलों में फैसला आ चुका है. यह 48 वां मामला है. इस घोटाले में कुल 53 केस दर्ज किए गए हैं.

एक नजर मामले परः (आरसी 64ए/96) जानें कब-क्या हुआ
प्राथमिकी - 27.01.1996    
सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी 27.03.1996    
घोटाला- 84.54 लाख रुपए    
कोषागार-देवघर    
स्पेशल पीपी- राकेश प्रसाद    
अंतरिम चार्जशीट- 28.10.97    
धारा- आईपीसी 420, 467, 468, 120बी एवं पीसी एक्ट 13(2)    
आरोपियों की संख्या- 38    
सुनवाई के दौरान मौत- 11
सरकारी गवाह बने- 2    
निर्णय पूर्व दोष स्वीकार - 2    
ट्रायल के आरोपी- 22    
आरोप गठन- 29.05.2005    
313 का बयान- जुलाई 2014    
अभियोजन गवाही- 208    
बचाव गवाही- 22
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