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आईएनएस कलवरी राष्ट्र को समर्पित: पीएम मोदी ने कहा हिंद महासागर में बढ़ेगा भारतीय नौसेना का दम

आईएनएस कलवरी राष्ट्र को समर्पित: पीएम मोदी ने कहा हिंद महासागर में बढ़ेगा भारतीय नौसेना का दम मुंबईः आईएनएस कलवरी को राष्ट्र को सौंपने के बाद पीएम मोदी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि आज सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए गौरव से भरा हुआ महत्वपूर्ण दिवस है. मैं सभी देशवासियों को इस उपलब्धि पर बधाई देता हूं. आईएनएस कलवरी को राष्ट्र को समर्पित करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है. मैं देश की जनता की तरफ से नौसेना का आभार व्यक्त करता हूं.

पीएम मोदी ने कहा कि यह पनडुब्बी मेक इन इंडिया और भारत-फ्रांस के सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है. भारत में सामुद्रिक परंपरा बहुत पुरानी है. इतिहासकार बताते हैं कि लोथल के जरिए 84 देशों से व्यापार हुआ करता था.

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर ने भारत के इतिहास को गढ़ा है. अब वह भारत के वर्तमान को और मजबूती दे रहा है. हिंद महासागर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व के लिए महत्वपूर्ण है. यह दुनिया के दो तिहाई ऑइल शिपमेंट्स का भार वहन करता है.

एक डीजल- इलेक्ट्रिक युद्धक पनडुब्बी है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए मझागांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने बनाया है। यह स्कॉर्पिन श्रेणी की उन 6 पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी है, जिसे भारतीय नौसेना में शामिल किया जाना है। यह मेक इन इंडिया पहल की कामयाबी को दर्शाता है। इस परियोजना को फ्रांस के सहयोग से चलाया जा रहा है।

आधुनिक फीचर्स से लैस यह पनडुब्बी दुश्मन की नजरों से बचकर सटीक निशाना लगा सकती है. ये टॉरपीडो और ऐंटी शिप मिसाइलों से हमले कर सकती है. इसका प्राथमिक काम दुश्मन के व्यापार और उर्जा मार्गों पर नजर रखना, अपने क्षेत्र को ब्लॉक करना और युद्धक उपकरणों की रक्षा करना है. जरूरत पड़ने पर दूर तक मार कर सकने की क्षमता के कारण दुश्मन पर अटैक भी इन पनडुब्बी के जरिए किया जा सकता है.

न्यूक्लियर ताकतों से लैस पनडुब्बी और बैलिस्टिक मिसाइल नौसेना की ताकत और दक्षता को बढ़ाएंगे. साथ ही रणनीतिक मजबूती के लिए भी यह महत्वपूर्ण है. भारत ने नौसेना की ताकत को बढ़ाने के लिहाज से पिछले साल आईएनएस अरिहन्त को लॉन्च कर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया. अग्नि लैंड मिसाइल और फाइटर बॉमर भी उसी उद्देश्य से उठाए कदम थे. पिछले कुछ सालों से पानी के अंदर आक्रमण कर सकने में सक्षम आधुनिक हथियारों की कमी भारत के लिए एक चिंता जरूर रही.

जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वहां इस साल अबतक 200 से ज्यादा आतंकी मारे जा चुके हैं. पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है. उत्तर-पूर्व में भी सुधार दिखा है.

खास बातेंः

- आईएनएस कलवरी भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्ते का सबूत है. आईएनएस कलवरी से भारतीय नौसेना का और मजबूती मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कलवरी के विकास में लगे सभी कर्मचारियों को शुक्रिया और बधाई कहा.

- उन्होंने कहा कि कलवरी को राष्ट्र को समर्पित करना सौभाग्य की बात. 21वीं सदी के विकास का रास्ता हिंद महासागर से निकलेगा. प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना को बधाई दी.

- चाहे समुद्र के रास्ते आने वाला आतंकवाद हो, पाइरेसी की समस्या हो, ड्रग्स की तस्करी हो या फिर अवैध फिशिंग, भारत इन सभी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

- आज सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए बहुत गौरव का दिन है. मैं सभी देशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं.

- आईएनएस कलवरी पनडुब्बी को राष्ट्र को समर्पित करना, मेरे लिए बहुत सौभाग्य की बात है. मैं देश की जनता की तरफ से भारतीय नौसेना को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं अर्पित करता हूं.

- कलवरी की शक्ति, या कहें टाइगर शार्क की शक्ति हमारी भारतीय नौसेना को और मजबूत करेगी. यह मेक इन इंडिया का उत्तम उदाहरण है.

- हम हिंद महासागर में अपने वैश्विक, सामरिक और आर्थिक हितों को लेकर पूरी तरह सजग हैं, सतर्क हैं. इसलिए भारत की मॉडर्न और मल्टी डायमेंशनल नौसेना पूरे क्षेत्र में शांति के लिए, स्थायित्व के लिए आगे बढ़कर नेतृत्व करती है.

- मैं इसे एक स्पेशल नाम से बुलाता हूं- S. A. G. A. R.- “सागर” यानि सेक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन.

- अपने पड़ोसियों की मदद के लिए भारत सदैव तत्पर है. चाहे वो मालदीव हो या श्रीलंका, बांग्लादेश हो या कोई और देश... भारतीय नौसेना मदद में कभी पीछे नहीं रही. यमन में अपने नागरिकों को बचाने में नौसेना का अहम योगदान रहा है.

- पीएम ने कहा- आज सवा सौ करोड़ भारतीयों के लिए बहुत गौरव का दिन है। मैं सभी देशवासियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बहुत-बहुत बधाई देता हूं.

- पीएम ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास का हमारा मंत्र जल-थल-नभ में एक समान है। पूरे विश्व को एक परिवार मानते हुए, भारत अपने वैश्विक उत्तरदायित्वों को लगातार निभा रहा है. भारत अपने साथी देशों के लिए उनके संकट के समय first responder बना है.

- प्रधानमंत्री ने कहा कि आईएनएस कलवरी के निर्माण में लगभग 12 लाख लोग लगे हैं. इसके निर्माण के दौरान जो तकनीकी दक्षता भारतीय कंपनियों को, भारतीय उद्योगों को, छोटे उद्यमियों को, हमारे इंजीनियरों को मिली है, वो देश के लिए एक तरह से “Talent Treasure” हैं. ये स्किल सेट हमारे लिए एक एसेट है.

इससे पहले प्रधानमंत्री रात करीब 11 बजे मुंबई पहुंचे और राजभवन गए, जहां उन्होंने रात बिताई. मुंबई हवाईअड्डे पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने प्रधानमंत्री की अगवानी की.

आईएनएस कलवरी एक डीजल-इलेक्ट्रिक युद्धक पनडुब्बी है, जिसे भारतीय नौसेना के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने बनाया है. यह स्कॉर्पीन श्रेणी की उन 6 पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्बी है, जिसे भारतीय नौसेना में शामिल किया जाना है. यह मेक इन इंडिया पहल की कामयाबी को दर्शाता है. इस परियोजना को फ्रांस के सहयोग से चलाया जा रहा है.

फ्रांस की रक्षा एवं उर्जा कंपनी डीसीएनएस द्वारा डिजाइन की गयी पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत बनायी जा रही हैं.

टाइगर शार्क के नाम रखा गया कलवरी नाम

कलवरी का नाम हिंद महासागर में पाई जाने वाली खतरनाक टाइगर शार्क के नाम रखा गया है. नौसेना की परंपरा के मुताबिक शिप और सबमरीन के सेवामुक्त होने पर उन्हें दोबारा अवतरित किया जाता है. वैसा ही कलवरी के साथ भी हुआ.

ये साल भारतीय सबमरीन ऑपरेशंस के पचासवें साल को गोल्डेन जुबली के तौर पर मनाया जा रहा है. इसके लिए फ्रांस की डीसीएनएस और एमडीएल के बीच अक्टूबर 2005 में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए समझौता हुआ था.

पहली कलवरी 8 दिसंबर 1967 में भारतीय नौसेना में शामिल हुई थी और यह भारत की पहली सबमरीन भी थी. इसे 31 मार्च 1996 को 30 साल की राष्ट्रसेवा के बाद भारतीय नौसेना से रिटायर किया गया.

एक सच्ची नॉटिकल परंपरा के मुताबिक कलवरी का फिर से अवतरण होगा. स्कार्पीन सबमरीन एक बार फिर से समुद्र की गहराई में राष्ट्र के नौसैनिक हितों की रक्षा के लिए कुलांचे भरेगी.

कितनी ताकतवर है स्कार्पीन सबमरीन कलवरी

- सबमरीन कलवरी में स्टेट ऑफ आर्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है.

- कलवरी एडवांस्ड साइलेंसिग टेक्निक से लैस है.

- शोर और ध्वनि को कम रखने के लिए सबमरीन में रेडिएटेड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है.

- कलवरी को हाइड्रो-डॉयनामिकली ऑप्टिमाइज्ड शेप दिया गया है.

- ये सबमरीन दुश्मनों पर अपने घातक हथियारों से हमला करने में सक्षम है.

- कलवरी टारपीडो और ट्यूब तरीके से एंटी-शिप मिसाइल का इस्तेमाल कर सकती है.

नौसैनिक टास्कफोर्स के साथ मिलकर काम कर सकती है कलवरी

स्कार्पीन सबमरीन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह कई तरह के अभियानों में हिस्सा ले सकती है. जैसे एंटी सरफेस वॉर, एंटी सबमरीन वॉर, इंटेलिजेंस इकट्ठा करना, माइंस बिछाना और एरिया सर्विलांस जैसे काम हैं. कलवरी सभी तरह के थियेटर में काम कर सकती है. इसका मतलब ये है कि नौसैनिक टास्क फोर्स के साथ मिलकर भी यह काम कर सकती है.

कलवरी के निर्माण के साथ एमडीएल ने सबमरीन के कॉम्लेक्स ऑर्ट में अपनी महारत साबित कर दी है. भारत अब सबमरीन बनाने वाले देशों में अपनी जगह मजबूत कर चुका है. एमडीएल ने दूसरी स्कार्पीन खांदेरी बनाई थी और इसे जनवरी 2017 में लॉन्च किया गया था. खांदेरी का अभी समुद्र में ट्रायल चल रहा है.

एक तीसरी स्कार्पीन करंज को इसी साल के आखिर में लॉन्च किया जाएगा. हालांकि डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस प्रोडक्शन के प्रोत्साहन और सहयोग के बिना स्कार्पीन प्रोजेक्ट का इतनी सफलता हासिल कर पाना आसान नहीं था. यह याद रखे जानी वाली बात है कि एमडीएल की बनाई दो एसएसके सबमरीन राष्ट्रसेवा में लगी हुई हैं.
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