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यरुशलम, इजरायल की राजधानी! राष्ट्रपति ट्रंप की यह मान्यता बदल देगी खाड़ी देशों का समीकरण

यरुशलम, इजरायल की राजधानी! राष्ट्रपति ट्रंप की यह मान्यता बदल देगी खाड़ी देशों का समीकरण वाशिंगटनः डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि वह यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देंगे. उन्होंने वादा किया था कि वह अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम शिफ्ट करेंगे.

फिलिस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को यरुशलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने का ऐतिहासिक ऐलान करने वाले हैं. ट्रंप के इस कदम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध के साथ-साथ अमेरिका में भी विरोध हो रहा है.

आइए जानते हैं कि यरुशलम का मुद्दा क्यों इतना संवेदनशील है और क्यों यह विवादों की जड़ है...

भूमध्य और मृत सागर से घिरे यरुशलम को यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों ही धर्म के लोग पवित्र मानते हैं. यहां स्थित टेंपल माउंट जहां यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है, वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान बेहद पाक मानते हैं.

मुस्लिमों की मान्यता है कि अल-अक्सा मस्जिद ही वह जगह है जहां से पैगंबर मोहम्मद जन्नत पहुंचे थे. इसके अलावा कुछ ईसाइयों की मान्यता है कि यरुशलम में ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. यहां स्थित सपुखर चर्च को ईसाई बहुत ही पवित्र मानते हैं.

एक तरफ जहां इजरायल यरुशलम को अपनी राजधानी बताता है, वहीं दूसरी तरफ फिलिस्तीनी भी इजरायल को अपने भविष्य के राष्ट्र की राजधानी बताते हैं. संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के ज्यादातर देश पूरे यरुशलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते.

1948 में इजरायल ने आजादी की घोषणा की थी और एक साल बाद यरुशलम का बंटवारा हुआ था. बाद में 1967 में इजरायल ने 6 दिनों तक चले युद्ध के बाद पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया.

1980 में इजरायल ने यरुशलम को अपनी राजधानी बनाने का ऐलान किया था. लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक प्रस्ताव पास करके पूर्वी यरुशलम पर इजरायल के कब्जे की निंदा की. यही वजह है कि यरुशलम में किसी भी देश का दूतावास नहीं है. जो भी देश इजरायल को मान्यता देते हैं उनके दूतावास तेल अवीव में हैं. तेल अवीव में 86 देशों के दूतावास हैं.

यरुशलम में कभी भी अमेरिका का दूतावास नहीं रहा. 1995 में यूएस कांग्रेस ने एक कानून पास किया जिसके तहत अमेरिका को तेल अवीव स्थित अपने दूतावास को यरुशलम शिफ्ट करना था. हालांकि 1995 के बाद से हर अमेरिकी राष्ट्रपति दूतावास शिफ्ट करने से बचते रहे हैं और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कानून के अमल पर रोक लगाते रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान दूतावास शिफ्ट करने का वादा किया था. हालांकि इस साल उन्होंने एक खास प्रावधान के लिए दस्तखत किए जिसके तहत दूतावास को शिफ्ट करने पर 6 महीने के लिए रोक लग गई.

वह इस सप्ताह एक बार फिर ऐसा करने वाले हैं लेकिन वह अपनी भाषण में दूतावास को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी ऐलान करने वाले हैं. ट्रंप ऐलान कर सकते हैं कि वह इजरायल के उस दावे का समर्थन करते हैं कि यरुशलम उसकी राजधानी है.

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए. यह दशकों पुरानी अमेरिकी नीति का भी उल्लंघन होगा जिसमें यरुशलम के भाग्य पर निर्णय को इजराइल और फिलीस्तीनियों के भरोसे पर छोड़ दिया गया. दोनों देशों के बीच यरुशलम पर बातचीत करने और निर्णय लेने के आधार पर ही यह नीति बनाई गई थी.

अधिकारियों ने कहा कि यदि ट्रंप यरुशलम को राजधानी के रूप में मान्यता दे देते हैं तो पूरे विश्व के मुस्लिम या फिलीस्तीनी समर्थक हिंसा या प्रदर्शन शुरू कर सकते हैं. यरुशलम का मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि वहां यहूदियों का पवित्र मंदिर पर्वत और मुसलमानों का हरम अल-शरीफ भी वहां मौजूद है. इसके अलावा इस्लाम में तीसरी सबसे पवित्र स्थल अक्सा मस्जिद और स्वर्ण गुंबद भी वहां मौजूद हैं, जबकि यहूदी धर्म में सबसे पवित्र स्थान एक प्राचीन यहूदी मंदिर भी है.

एक अमेरिकी अधिकारी ने हाल में कहा था कि ट्रंप इस बारे में कल तक घोषणा कर सकते हैं, जबकि इस मसले पर ट्रंप के सलाहकार जैरेड कुशनर ने आज कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने यरुशलम को औपचारिक तौर पर इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता देने पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है और वे इसके सभी पहलुओं पर विचार कर रहे हैं.

इस सूचना से की तेल अवीव स्थित अमेरिकी दूतावास को यरुशलम शिफ्ट किए जाने की ट्रंप प्रशासन की योजना है, फिलिस्तीनियों में नाराजगी है. वे पूर्वी यरुशलम को अपनी राजधानी मानते हैं.

इजराइल और फलस्तीन के बीच विवाद में यरुशलम का दर्जा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है. ये दोनों यरुशलम को अपनी राजधानी बताते हैं.

फलस्तीन के राष्ट्रपति कार्यालय ने एएफपी को शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका यदि यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देता है तो इससे शांति प्रक्रिया तबाह हो जाएगी.

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ऐसा करता है तो इससे क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ जाएगी. कई देशों ने भी ट्रंप से अपील की है कि वह इस तरह का ऐलान न करें.

फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप से बात कर यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने के उनके फैसले पर चिंता जताई. एलसी पैलेस ने यह जानकारी दी.

दोनों नेताओं के बीच फोन कॉल की जानकारी देने वाले वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘ यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता देने को लेकर अमेरिका के समर्थन की संभावना पर फ्रांस के राष्ट्रपति ने चिंता जताई. ’’ इसमें कहा गया कि ऐसा कोई भी फैसला इजराइल और फलस्तीन के बीच बातचीत के तय पैमाने के भीतर होना चाहिए.
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