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मैंने आजादी मांगी थी, पर अभी भी मैं अपने प्रेमी से मिलने को आजाद नहीं, कॉलेज जेल हैः अखिला उर्फ हादिया

जनता जनार्दन संवाददाता , Nov 29, 2017, 13:41 pm IST
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मैंने आजादी मांगी थी, पर अभी भी मैं अपने प्रेमी से मिलने को आजाद नहीं, कॉलेज जेल हैः अखिला उर्फ हादिया नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अखिला उर्फ हादिया अपनी पढ़ाई पूरी करने तमिलनाडु के सलेम के होमियोपैथी कॉलेज पहुंच गई है, पर कॉलेज के नियमों के मुताबिक यहां उसे अपने परिवारवालों को छोड़ किसी बाहरी से मिलने की आजादी नहीं है, जिस पर एतराज जाहिर करते हुए बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए हादिया ने कहा कि मैंने कोर्ट से आजादी मांगी और मैं अपने पति से मिलना चाहती हूं लेकिन सच यही है कि मैं अभी तक आजाद नहीं हूं.

 केरल के कथित लव जिहाद से जुड़े बहुचर्चित मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने हादिया की मांग पर उसे पिता की 'देखरेख' से आजादी दे दी. हादिया (अखिला) वही लड़की है जिसने इस्लाम कबूलने के बाद एक मुस्लिम युवक शफीन जहां से निकाह किया.

हादिया के परिवारवालों का आरोप है कि उसका जबरन धर्मांतरण कराया गया. उसकी शादी को भी वे लव जिहाद का उदाहरण बताते हैं और कहते हैं कि उनकी बेटी का ब्रेनवॉश किया गया है. इसी दलील पर केरल हाईकोर्ट ने निकाह को रद्द करते हुए लव जिहाद की जांच करने का आदेश दिया था.

हाईकोर्ट के इस फैसले को शफीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने हादिया को कॉलेज हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई जारी रखने को कहा.

सुनवाई में हालांकि लव जिहाद वाला पहलू अभी नहीं आया है, लेकिन अब तक की सुनवाई में यह बात बिल्कुल साफ हो चुकी है कि हादिया पर किसी तरह की जोर-जबरदस्ती नहीं की गई.

निकाह रद्द किए जाने का हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद छह महीने अपने पैतृक घर में बंद रहते हुए, लगातार अपने परिजनों के साथ होने के बावजूद हादिया के विचारों में रत्ती भर भी बदलाव नहीं आया. सुप्रीम कोर्ट ने इस यथार्थ को रेखांकित किया और ब्रेनवॉश की दलील को जरा भी तवज्जो नहीं दी.

भारतीय समाज के संदर्भ में यह दलील खास अहमियत रखती है. यहां बेटियों के मामले में यह बात अक्सर दोहराई जाती है कि कोई उन्हें फुसला कर अपने प्रेम जाल में फंसा लेगा. 'ब्रेनवॉश' इसी सनातनी चिंता का अंग्रेजी नाम है.

समझना जरूरी है कि अपनी संतान को, खासकर बेटी को अपने कहे में रखने की उत्कट इच्छा से उपजा यह सामंती तर्क वैयक्तिक गरिमा के खिलाफ जाता है. किसी भी वयस्क व्यक्ति के विचारों को किसी और के प्रभाव का नतीजा बताना उसके व्यक्तित्व को कमतर करना है, जिसकी इजाजत हमारा संविधान नहीं देता.

आतंकवाद और साजिश से जुड़े पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बाद में आएगा, लेकिन हादिया मामले में उसके आदेश की रोशनी में ब्रेनवॉश की दलील को हमेशा के लिए दफना देने में अब कोई हिचक नहीं होनी चाहिए.

कॉलेज पहुंचकर अखिला उर्फ हादिया ने कही ये बातें
  •     हादिया ने कहा कि मैं उस इंसान के साथ रहना चाहती हूं जिससे सबसे ज्यादा प्यार करती हूं.
  •     हादिया ने कहा कि कॉलेज वापस जाकर खुश हूं. मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाया है.
  •     हादिया ने कहा कि मैं वह अधिकार मांग रही हूं, जो हर नागरिक के पास हैं. इसका राजनीति और जाति से कुछ लेना-देना नहीं है.
  •     हादिया ने कहा, इसका राजनीति और जाति से वास्ता नहीं है.
  •     मैं उनसे बात करना चाहती हूं जिन्हें पसंद करती हूं.
  •     होमियोपैथी कॉलेज के प्रिंसिपल ने कहा कि मेरी मंजूरी से वो अपने पति समेत हर किसी से मिल सकती है.
  •     प्रिंसिपल ने कहा कि वो हमारे यहां कॉलेज हॉस्टल ज्वाइन कर रही है. वो कॉलेज ज्वाइन करने आई है और प्रक्रिया शुरू हो गई है. उसे हर वक्‍त पुलिस की सुरक्षा मिलेगी.
  •     प्रिंसिपल ने कहा कि हम दूसरे छात्रों की तरह ही उसका स्वागत करते हैं. दूसरे छात्र भी कॉलेज में उसका स्वागत करेंगे.
  •     सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हादिया के पिता केएम अशोकन ने उसके पति शेफीन जहां को आतंकी बताते हुए कहा कि वो अपने परिवार में एक आतंकी को नहीं रख सकते.
  •     हादिया के पिता ने कहा कि इस्लाम धर्म कबूलने के हादिया सीरिया जाना चाहती थी, लेकिन उसे सीरिया की हकीकत का पता नहीं है. मुझे डर था कि इन सबके बीच उसकी पढ़ाई खत्म हो जाएगी, लेकिन अब ख़ुशी है कि कोर्ट ने उसे पढ़ाई पूरा करने का आदेश दिया है.
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