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लोकतंत्र में हिंसक विरोध की परिपाटी स्वीकार्य नहींः टाइम्स लिटरेचर फेस्टिवल में उपराष्ट्रपति

जनता जनार्दन संवाददाता , Nov 26, 2017, 12:18 pm IST
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लोकतंत्र में हिंसक विरोध की परिपाटी स्वीकार्य नहींः टाइम्स लिटरेचर फेस्टिवल में उपराष्ट्रपति नई दिल्लीः किसी भी मसले पर कहीं भी कभी भी धार्मिक भावनाओं के आहत होने के नाम पर विरोध की बढ़ती प्रवृत्ति पर कटाक्ष करते हुए उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि पहले विरोध किया जाता है, लेकिन कुछ लोग इस दौरान सीमा पार कर जाते हैं और इनामों के ऐलान करने लगते हैं।

टाइम्स लिटरेचर फेस्टिवल में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने शनिवार को सीधे पद्मावती फिल्म का बिना नाम लिए भी इस फिल्म का विरोध करने वालों को साफ-साफ कहा कि देश में कानून के शासन को बनाए रखना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'कुछ लोग विरोध के दौरान आगे बढ़कर इनाम घोषित कर देते हैं। लेकिन, मुझे संदेह है कि इन लोगों के पास इनाम घोषित करने के लिए पर्याप्त राशि होती भी है या नहीं। हर कोई 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित करने में लगा है। क्या पास में एक करोड़ रुपये होना बहुत आसान है?'

फिल्मों और आर्टवर्क्स के हिंसक विरोध की परिपाटी को लेकर नायडू ने कहा, 'लोकतंत्र में यह स्वीकार्य नहीं है। आपको लोकतांत्रिक तरीके आंदोलन करने का हक है, सही अथॉरिटीज के पास आपको जाना चाहिए। आप किसी को शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा सकते या हिंसक धमकियां नहीं दे सकते। आप कानून के शासन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।'

पूर्व में प्रतिबंधित फिल्मों गरम हवा, किस्सा कुर्सी का और आंधी जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए नायडू ने कहा कि यह बात मैं किसी एक फिल्म को लेकर नहीं कह रहा हूं।

विचार और संवाद का मंच मुहैया कराने को लेकर टाइम्स ग्रुप की सराहना करते हुए नायडू ने कहा कि नोटबंदी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। यही नहीं दर्शकों से उन्होंने अपनी मातृभाषा के महत्व को याद रखने की भी अपील की।

नायडू ने कहा कि किसी भी घटना को धर्म विशेष से जोड़ना और सेलेक्टिव निंदा करना गलत है। नायडू ने कहा कि सेलेक्टिव विरोध सही नहीं है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हमें आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। हम यह नहीं कह सकते कि एक समुदाय का विरोध सही है और दूसरे समुदाय का गलत है।
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