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लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन बनाए रखने का जनादेश आपकोः आईपीएस प्रशिक्षुओं से राष्ट्रपति

लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून का शासन बनाए रखने का जनादेश आपकोः आईपीएस प्रशिक्षुओं से राष्ट्रपति नई दिल्लीः भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द ने आज राष्ट्रपति भवन में भारतीय पुलिस सेवा के 69 आरआर (2016 बैच) के अधिकारी प्रशिक्षार्थियों से मुलाकात की और उनका स्वागत करते हुए कहा कि अखिल भारतीय सेवा के एक सदस्य के रूप में, निःसंदेह आप किसी एक राज्य की सेवा करेंगे परंतु आप एक राष्ट्रीय विचारधारा के प्रतिनिधि भी होंगे. इसलिए आपको अपने कर्तव्यों का पालन पूरे मनोयोग से करना है.

भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के अभिभाषण का मूल पाठः

1. मैं आप सबका राष्ट्रपति भवन में स्वागत करता हूं। मैं आप सबको एक बहुत कठिन और प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए और भारतीय पुलिस सेवा में आपके प्रवेश के लिए भी बधाई देना चाहता हूं।

2. भारतीय पुलिस सेवा हमारी राष्ट्रीय प्रशासनिक प्रणाली के स्तंभों में से एक है। अखिल भारतीय सेवा के एक सदस्य के रूप में, निःसंदेह आप किसी एक राज्य की सेवा करेंगे परंतु आप एक राष्ट्रीय विचारधारा के प्रतिनिधि भी होंगे। विधि शासन और हमारी लोकतांत्रिक राजव्यवस्था की आम अवधारणा को बनाए रखना आपकी अनिवार्यता होगी। इस प्रकार से, आप केवल लोक व्यवस्था और ईमानदार आचरण के ही संरक्षक नहीं होंगे बल्कि कानून की महिमा के निगहबान भी होंगे।

3. आपका पद आपको वह अधिकार और शक्तियां देता है जो लोगों की सेवा में वास्तविक साधन हैं। लोक सेवक के रूप में, लोक-सेवा करना और सबसे गरीब तबके के लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करना आपका दायित्व होगा। ऐसी बहुत कम सरकारी सेवाएं हैं जिनका केवल कुछेक लोगों पर ही नहीं, बल्कि हजारों लोगों पर फर्क पड़ता है। पुलिस सेवा वह गिनी-चुनी सेवा है जो आपको ऐसा करने का मौका देती है। यह आपमें से प्रत्येक को राष्ट्र निर्माता बनाती है।

4. आप हमेशा याद रखें कि ऐसे देश या समाज जिनमें सर्वाधिक प्रोफेशनल पुलिस फोर्स और सबसे अधिक जागरूक शासन होता है, वहां प्राय: सभी नागरिक कानून से डरते हैं। यह जरूरी नहीं कि वे कानून लागू करने वाले से डरते हों। इसे अपना मंत्र बना लें। और अपने कर्तव्यों को बिना किसी डर के और विनम्रता के साथ बगैर विलंब किए निभाएं। व्यवसायिक सिविल सेवकों की हैसियत से कृपया निडर होकर राजनीतिक कार्यकारी को ईमानदार और पक्षपातरहित सलाह दें। संविधान को अपना ग्रंथ और सतत मार्ग दर्शक समझें।

5. भारतीय पुलिस सेवा की पुरानी 19वीं शताब्दी की परंपरा है। आज भी इसके बुनियादी मूल्य और राष्ट्रीय प्रयोजन की भावना वही है। फिर भी 21वीं सदी में नई और अलग चुनौतियां हैं। मैं इनमें से दो का जिक्र करना चाहूंगा। पहली चुनौती है आतंकवाद और वाम उग्रवाद। इनके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों पहलू हैं। आपको इन चुनौतियों का सामना करना है, परंतु इस बात का ध्यान रखते हुए कि सामान्य जनता को कष्ट न पहुंचे।

6. अब मैं दूसरी चुनौती पर आता हूं। जैसे हमारी आर्थिक स्थिति में प्रगति हुई है, सफेदपोश और सामूहिक अपराध के भी मार्ग खुल गए हैं। इससे हमारी पुलिस फोर्स के कुछेक विंग्स में और अधिक विशिष्ट होने की मांग बढ़ गई है। जबकि टेक्नालॉजी और इंटरनेट हमारे समाज में बेहतर ढंग से बदलाव ला रहे हैं, वे जटिल, डिजिटल अपराधों के मार्ग भी निकाल रहे हैं। ये चुनौतियां हैं जिनका सामना आप पुलिस अधिकारियों की पीढ़ी को करना पड़ेगा और मुझे विश्वास है कि आप इस पर जीत हासिल अवश्य करेंगे।

7. टेक्नालॉजी एक चुनौती भी है और एक हथियार भी। टेक्नालॉजी आपको आपकी जिम्मेदारी बड़ी दक्षता से निभाने में मदद करती है। यह नागरिकों को अपने घर से, कंप्यूटर से या मोबाइल से पुलिस फोर्स के साथ बातचीत और शिकायत तक दर्ज भी करने की सुविधा देती है। कृपया इस प्रक्रिया को प्रोत्साहन दें। एक आदर्श पुलिस प्रणाली वह है जहां नागरिक को पुलिस स्टेशन जाने की कम से कम आवश्यकता पड़े।

8. अंत में, मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि शिक्षा या पद या अन्य किसी प्रकार से, आप सब भाग्यशाली हैं और आपको यह नहीं भूलना चाहिए। इस प्रकार आपके लिए यही पर्याप्त नहीं होगा कि आप केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और ईमानदारी से करें। वह तो करना ही है। आपको समाज को भी उसका देय या ऋण लौटाना है। यह मैं आप पर छोड़ता हूं कि आप इससे कैसे निपटते हैं। परंतु आप यह अवश्य याद रखें कि हममें से प्रत्येक का दायित्व है कि हम समाज और  लोगों के जीवन में सहायता पहुंचाएं।  और जो अपेक्षा गरीब या कमजोर वर्ग के लोग हमसे करते हैं, उसे पूरा करने का प्रयास करें।  

9. इन शब्दों के साथ, मैं आप सबके सफल सेवा जीवन और देश के प्रति निरंतर सेवा के लिए शुभकामनाएं देता हूं।
जय हिन्द।

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