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पैराडाइज पेपर्स से भंडाफोड़: अमिताभ बच्चन, विजय माल्या समेत 714 अमीर भारतीयों ने ऐसे की कर चोरी

जनता जनार्दन संवाददाता , Nov 06, 2017, 11:48 am IST
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पैराडाइज पेपर्स से भंडाफोड़: अमिताभ बच्चन, विजय माल्या समेत 714 अमीर भारतीयों ने ऐसे की कर चोरी वॉशिंगटनः पैराडाइज पेपर्स ने दुनिया के कई रसूखदारों और सेलिब्रिटीज के विदेशों में इन्वेस्टमेंट की बात कही है. 'द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक, अमिताभ बच्चन समेत 714 भारतीयों ने टैक्स हेवंस कंट्रीज में इन्वेस्टमेंट किया है. अमिताभ का नाम पनामा पेपर्स में भी आया था. रिपोर्ट में 180 देशों को शामिल किया गया है, इसमें शामिल नामों के लिहाज से भारत 19वें पायदान पर है.

मोदी सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर 2016 को कालेधन पर कड़ा प्रहार करने के दावे के साथ पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए थे, जिससे आम व्यावसायी तबाह हो गया. इसके बाद उम्मीद से काफी कम मात्रा में काला धन बाहर आया और इसमें बड़े हिस्से की हेरा-फेरी होने की बात सामने आई. अब जब सरकार नोटबंदी की सालगिरह को कथित तौर पर 'ऐंटी ब्लैक मनी डे' के तौर पर मनाने की तैयारी कर रही थी, तभी भारतीय अमीरों द्वारा काले धन की चोरी को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है.

कर चोरी के इस खेल में दुनिया के सबसे बड़े व्यावसायिक घरानों, देशों के राष्ट्राध्यक्षों, राजनीति में वैश्विक पकड़ रखने वाले लोगों, मनोरंजन और खेल से जुड़ी शख्सियतों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने टैक्स हैवन कंट्रीज में अपना पैसा छिपाया है. यह जानकारी 1.34 करोड़ दस्तावेज के लीक होने के बाद सामने आई है, जिसे पैराडाइज पेपर्स के नाम से जाना जा रहा है.

कर चोरी का यह मामला काफी जटिल है और यह उन आर्टिफिशियल तरीकों को दिखाता है, जिनके जरिये अरबपति कानूनी रूप से अपना धन बचा रहे हैं. यह खुलासा जर्मनी के जीटॉयचे साइटुंग नामक अखबार ने किया है. बताते चलें कि इसी मीडिया हाउस ने 18 महीने पहले पनामा पेपर्स का खुलासा किया था. करीब 96 मीडिया ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर इंटरनेशनल कॉन्सोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ने 'पैराडाइज पेपर्स' नामक दस्तावेजों की छानबीन की है.

इस खुलासे के जरिये उन फर्मों और फर्जी कंपनियों के बारे में बताया गया है, जो दुनिया भर में अमीर और ताकतवर लोगों का पैसा विदेशों में भेजने में उनकी मदद करते हैं. पैराडाइज पेपर्स लीक में भी पनामा की तरह ही कई भारतीय राजनेताओं, अभिनेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आए हैं.

प्राप्त किए गए दस्तावेज दो विदेशी सर्विस प्रोवाइडर्स और 19 टैक्स हैवन देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों से मिले हैं. आईसीआईजे के भारतीय सहयोगी मीडिया संस्थान इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस लिस्ट में कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं. वहीं, दुनिया भर की बात करें तो इस लिस्ट में कुल 180 देशों के नाम हैं. इस लिस्ट में भारत 19वें नंबर पर है.

इस खुलासे से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे सहित विश्व के कई बड़े नेताओं पर दबाव पड़ेगा, जो आक्रामक कर चोरी की योजनाओं को रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस जांच के प्रकाशन के लिए 380 से अधिक पत्रकारों ने एक साल तक जांच की. वे 70 साल पहले तक के आंकड़ों की जांच करते हुए इस नतीजे पर पहुंचे हैं.

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक आर्थिक असमानता बढ़ रही है. प्रमुख अर्थशास्त्री गैब्रियल जुकमैन ने कहा कि वैश्विक असमानता बढ़ने के लिए जो सबसे बड़ा कारण है, वह है टैक्स हैवन देश. जैसे-जैसे असमानता बढ़ती जा रही है, ऑफशोर टैक्स इवेजन (कर चोरी) एक विशिष्ट खेल बनती जा रही है.

इस लीक के केंद्र में बरमूडा की लॉ फर्म ऐपलबाय है. यह कंपनी वकीलों, अकाउंटेंट्स, बैंकर्स और अन्य लोगों के नेटवर्क की एक सदस्य है. इस नेटवर्क में वे लोग भी शामिल हैं जो अपने क्लाइंट्स के लिए विदेशों में कंपनियां सेट अप करते हैं और उनके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करते हैं. यह ऑफशोर इस्टैबलिशमेंट के लिए काम करती है, जो क्लाइंट्स को ऐसे स्ट्रक्चर मुहैया कराती है, जो कानूनी रूप से अपने टैक्स बिल को कम करने में मदद करें.

इन आरोपों पर कंपनी ने सफाई देते हुए कहा कि उसने सभी आरोपों की जांच की है और पाया है कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि उन्होंने या उनके क्लाइंट्ल ने कोई गलत काम किया है. इस कंपनी ने कहा कि हम एक लॉ फर्म हैं, जो क्लाइंट्स को उनका बिजनेस चलाने के लिए कानूनी रास्तों के बारे में बताते हैं. हम गैरकानूनी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करते हैं.

इस लिस्ट में अपना नाम आने पर मोदी सरकार के मंत्री जयंत सिन्हा ने सफाई दी है. रिपोर्ट में जिस ओमिडयार नेटवर्क का जिक्र है, उससे कभी जयंत भी जुड़े थे.

अमेरिका के इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स के पैराडाइज पेपर्स जिसने पिछले साल पनामा पेपर्स के जरिए कई अहम खुलासे किए थे, ने यह काम कैसे किया. आइए जानें पूरा मामला

* कैसे सामने आया मामला?
- इसे सबसे बड़ा फाइनेंशियल डाटा लीक बताया जा रहा है. बरमूडा के एपलबाय और सिंगापुर के एशियासिटी समेत दुनिया की 19 टैक्स हेवंस कंट्रीज में ताकतवर शख्सियतों और सेलिब्रिटीज के इन्वेस्टमेंट की जांच की गई.
- इसकी लिस्ट में 180 देशों के नाम हैं. नामों के लिहाज से इस लिस्ट में भारत 19वें नंबर पर है.

*किस फर्म के ज्यादातर डॉक्युमेंट्स?
- जिन डॉक्युमेंट्स की छानबीन की गई है, उनमें से ज्यादातर बरमूडा की लॉ फर्म एपलबाय के हैं.
- 125 साल पुरानी यह कंपनी वकीलों, अकाउंटेंट्स, बैंकर्स और अन्य लोगों के नेटवर्क की एक मेंबर है. इस नेटवर्क में वे लोग भी शामिल हैं, जो अपने क्लाइंट्स के लिए विदेशों में कंपनियां सेटअप करते हैं और उनके बैंक अकाउंट्स को मैनेज करते हैं.

* किन भारतीयों और फर्म के नाम?
- इस लिस्ट में कुल 714 भारतीयों के नाम शामिल हैं. इनमें अमिताभ बच्चन, केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा और संजय दत्त की पत्नी मान्यता दिलनशीं नाम से लिस्ट में हैं.
- सन टीवी (एयरसेल-मैक्सिस केस), एस्सार-लूप (2जी केस), एसएनसी लावलिन (इसमें केरल के सीएम पी.विजयन का नाम आया था, हालांकि बाद में हट गया) का भी नाम है.

* क्या बोले जयंत सिन्हा?
- "मैं पूरा डिटेल इंडियन एक्सप्रेस को मुहैया करा चुका हूं. मैं ओमिडयार नेटवर्क और उससे जुड़े डी.लाइट बोर्ड से जुड़ा था. सारे ट्रांजैक्शन लीगल तरीके से किए गए. ट्रांजैक्शंस की सारी जानकारी अथॉरिटीज को बताई गई थीं."
- "ओमिडयार छोड़ने के बाद मुझसे डी.लाइट बोर्ड का इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में कंटीन्यू करने को कहा गया. लेकिन केंद्रीय मंत्री बनने के बाद मैंने तुरंत डी.लाइट बोर्ड से इस्तीफा दे दिया."

* दुनिया की कौन सी ताकतवर शख्सियतों का विदेशो में इन्वेस्टमेंट?
- ट्रम्प के विदेश और कॉमर्स मंत्री समेत 13 अफसर. ब्रिटेन की क्वीन एलिजाबेथ II. कनाडियन पीएम जस्टिन ट्रूडो के लिए पैसा जुटाने वाले स्टीफन ब्रोनफमैन.
- इनके अलावा पाक के पूर्व पीएम शौकत अजीज समेत दुनिया के 120 राजनीतिज्ञ.

* क्या है पैराडाइज पेपर्स, कितने डॉक्युमेंट्स मिले?
- जर्मन अखबार Süddeutsche Zeitung को बरमूडा की कंपनी Appleby, सिंगापुर की कंपनी Asiaciti ट्रस्ट और टैक्स चोरी करने वालों के हैवन समझे जाने वाले 19 देशों में कराई गई कार्पोरेट रजिस्ट्रियों से जुड़े करीब एक करोड़ 34 लाख डॉक्युमेंट्स मिले.
- यह खुलासा जर्मन अखबार Süddeutsche Zeitung ने किया है. यह वही अखबार है, जिसने 18 महीने पहले पनामा पेपर्स का खुलासा किया था.
- जर्मन अखबार ने ये डॉक्युमेंट्स इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स के साथ साझा किया.
- इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स ने अपनी वेबसाइट पर भी दस्तावेजों की जांच के बाद सामने आए तमाम नामों कि लिस्ट जारी की है जिसे आप www.icij.org पर भी देख सकते हैं.

*कितने दिन चला इन्वेस्टीगेशन?
- 10 महीने से ज्यादा. 40 इन्वेस्टीगेटिव रिपोर्ट में पब्लिश किया जाएगा.

* एपलबाय क्या है?
- 125 साल पुरानी लीगल फर्म है. 1980 में मेजर रेगिनाल्ड ने इसे शुरू किया था.
- ये दुनिया भर की कंपनियां, फाइनेंशियल इंस्टीटयूट और सेलिब्रिटीज और अमीरों को सलाह देती है.
- इस कंपनी में 740 इम्प्लॉइज काम करते हैं. वहीं, इसके पास 200 एडवोकेट और 60 से ज्यादा पार्टनर हैं. 10 देशों में दफ्तर हैं.
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