कालीघाट शक्तिपीठ कोलकाता का एक क्षेत्र, जहां माँ काली है विराजमान

कृष्णा तिवारी , Sep 27, 2017, 5:39 am IST
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कालीघाट शक्तिपीठ कोलकाता का एक क्षेत्र, जहां माँ काली है विराजमान कालीघाट शक्तिपीठ:(कृष्णा तिवारी की रिपोर्ट): कालीघाट शक्तिपीठ कोलकाता का एक क्षेत्र है, जो अपने काली माता  के मंदिर के लिये प्रसिद्ध है। इस शक्तिपीठ  में स्थित प्रतिमा की प्रतिष्ठा कामदेव ब्रह्मचारी (सन्यासपूर्व नाम जिया गंगोपाध्याय) ने की थी। शक्तिपीठ बनने का मुख्य कारण माँ सती के दाये पैर की कुछ अंगुलिया इसी जगह गिरी थी। आज यह जगह काली भक्तो के लिए सबसे बड़ा मंदिर है। माँ की प्रतिमा में जिव्हा सोने की है जो की बाहर तक निकली हुई है.

हिन्दू धर्म  के अनुसार जहां सती  देवी के शरीर के अंग गिरे, वहां वहां शक्ति पीठ बन गईं। ये अत्यंय पावन तीर्थ कहलाये। ये तीर्थ पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर फैले हुए हैं,हिन्दू धर्म ) एक (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत  और नेपाल में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है। विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है।

यह वेदो  पर आधारित धर्म है, जो अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए है। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं।हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है.

काली हिन्दू धर्म  की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। उनको ख़ासतौर पर बंगाल और असम में पूजा जाता है। काली की व्युत्पत्ति काल  अथवा समय  से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए है जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अत: माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है।इनको महाकाली  भी कहते हैं।

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