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कोलेस्ट्रॉल है क्या? जानें, समझें और बचें इन उपायों से

जनता जनार्दन डेस्क , Aug 24, 2017, 13:27 pm IST
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कोलेस्ट्रॉल है क्या? जानें, समझें और बचें इन उपायों से लंडन: कोलेस्ट्रॉल एक वसा है, जो लिवर द्वारा उत्पन्न होती है। यह शरीर के सुचारु रूप से कार्य करने के लिए जरूरी है। हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका को जीवित रहने के लिए कोलेस्ट्रॉल की आवश्यकता होती है। कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा चिकना पदार्थ है, जो ब्लड प्लाज्मा द्वारा शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंचता है।

कोलेस्ट्रॉल दो तरह का होता है, एलडीएल (लो डेन्सिटी लिपोप्रोटीन) और  एचडीएल (हाई डेन्सिटी लिपोप्रोटीन)। एलडीएल को लोग अक्सर बुरा कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को लिवर से कोशिकाओं में ले जाता है। अगर इसकी मात्रा ज्यादा होगी तो यह कोशिकाओं में हानिकारक रूप में इकट्ठा होने लगेगा। समय बीतने के साथ एलडीएल धमनियों को संकरा कर देता है, जिससे रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से नहीं हो पाता।

मानव रक्त में एलडीएल की मात्र औसतन 70 प्रतिशत होती है। यह कोरोनरी हार्ट डिसीजेज और स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण है। एचडीएल को अच्छा कोलेस्ट्रॉल माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कोरोनरी हार्ट डिसीज और स्ट्रोक को रोकता है। एचडीएल, कोलेस्ट्रॉल को कोशिकाओं से दूर वापस लिवर में ले जाता है। लिवर में या तो यह टूट जाता है या व्यर्थ पदार्थों के साथ शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है।

कोलेस्ट्रॉल का सामान्य स्तर क्या है?
मानव रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर 3.6 मिलिमोल्स प्रति लिटर से 7.8 मिलिमोल्स प्रति लिटर के बीच होता है। 6 मिलिमोल्स प्रति लिटर कोलेस्ट्रॉल को उच्च माना जाता है और ऐसी स्थिति में धमनियों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बहुत बढ़ जाता है। 7.8 मिलिमोल्स प्रति लीटर से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल को अत्यधिक उच्च कोलेस्ट्रॉल का स्तर कहेंगे। इसका उच्च स्तर हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका कई गुना बढ़ा देता है।

कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टैस्ट
कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टैस्ट में रक्त में एचडीएल और एलडीएल दोनों के स्तर की जांच होती है। 20 साल की उम्र में पहली बार कोलेस्ट्रॉल स्क्रीनिंग टैस्ट करवा लेना चाहिए। इसके बाद हर पांच साल में एक बार यह टैस्ट करवाएं। पर अगर जांच में यह बात सामने आती है कि रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से अधिक है या आपके परिवार में दिल की बीमारियों का पारिवारिक इतिहास रहा है तो डॉक्टर हर 2 या 6 माह में जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

केवल बुरा ही नहीं होता कोलेस्ट्रॉल
कोलेस्ट्रॉल हमारे रक्त का एक महत्वपूर्ण घटक है, क्योंकि यह कई लाभकारी हार्मोन्स के स्राव में सहायता करता है। यहां तक कि जिन लोगों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है, उन्हें इम्यून सिस्टम से संबंधित कई समस्याएं होती हैं और उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न किए विषैले पदार्थों को सोखने के लिए स्पंज का कार्य करता है। मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के लिए भी कोलेस्ट्रॉल बहुत जरूरी है। जो लोग अल्जाइमर्स से पीड़ित होते हैं, उनके मस्तिष्क में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक पाई जाती है।

कोलेस्ट्रॉल के कार्य
- कोलेस्ट्रॉल कोशिकाओं की बाहरी परत का निर्माण करता है और उनका रखरखाव करता है।- यह एड्रिनल ग्रंथि द्वारा स्नवित हार्मोनों कार्टिसोल, एल्डोस्टेरन आदि के स्राव के लिए जरूरी है।
- यह सूरज की किरणों को विटामिन डी में बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- वसा में घुलनशील विटामिनों (विटामिन ए, डी, ई और के) के मेटाबॉलिज्म के लिए भी यह कोलेस्ट्रॉल जरूरी है।

इन्हें खाएं, कोलेस्ट्रॉल रहेगा नियंत्रित
चाय: चाय में पाया जाने वाला कैटेचिन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है। पारंपरिक काली चाय की तुलना में ग्रीन टी में इसकी मात्रा अधिक होती है।
ओट्स: छह सप्ताह तक नाश्ते में रोजाना ओट्स खाने से कोलेस्ट्रॉल का स्तर 5.3 प्रतिशत कम हो जाता है।
नाशपाती: ताजी नाशपाती में पेक्टिन की मात्रा बहुत अधिक होती है। यह कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और उसे शरीर से बाहर निकाल देता है। इसके अलावा केला, संतरा और सेब में भी पेक्टिन पाया जाता है।

कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कुछ मिथक
मिथ 1:  कोलेस्ट्रॉल एक बुरा पदार्थ है
तथ्य: हम कोलेस्ट्रॉल के बिना जीवित नहीं रह सकते। यह हमारे शरीर में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाता है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए एक बुरा पदार्थ है। कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर में विटामिन डी के निर्माण में सहायता करता है और बाइल एसिड के निर्माण में भी सहायता करता है, जो हमारे शरीर में वसा के पाचन के लिये आवश्यक है। यह सेक्स हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रन आदि के निर्माण के लिए भी आवश्यक है।

मिथ 2: कोलेस्ट्रॉल का निम्न स्तर अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है
तथ्य: वैसे एलडीएल का निम्न स्तर हमेशा अच्छे स्वास्थ्य की निशानी माना जाता है, लेकिन एक नये अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिन लोगों को कैंसर होता है, उनके शरीर में  कुछ  वर्ष पहले से ही कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य से कम होने लगता है।

मिथ 3: उच्च एलडीएल का अर्थ है कि आप हार्ट अटैक की ओर बढ़ रहे हैं
तथ्य:  हार्ट अटैक के कारणों में एलडीएल का उच्च स्तर ही नहीं, एचडीएल का निम्न स्तर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आधुनिक जीवनशैली और मोटापा के कारण लोगों में एचडीएल का स्तर कम और एलडीएल का स्तर बढ़ रहा है। हृदय रोगों से पीड़ित केवल 2% लोगों में एलडीएल और एचडीएल का आदर्श स्तर पाया जाता है।

मिथ 4: अंडे का सेवन धमनियों को अवरुद्घ कर देता है
तथ्य: यह सही है कि अंडे में डाएट्री कोलेस्ट्रॉल की मात्रा काफी होती है, विशेषकर पीले भाग में। हालांकि एक सप्ताह में छह अंडे खाना सामान्य बात है, लेकिन प्रतिदिन 3 या उससे अधिक अंडे खाने से रक्त में अच्छे और बुरे कोलेस्ट्रॉल दोनों का स्तर बढ़ जाता है।

मिथ 5: खाद्य तेल शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाते हैं
तथ्य: वनस्पति तेल हृदय को स्वस्थ रखते हैं और रक्त वाहिनियों में रक्त के प्रवाह को आसान बनाते हैं। ये रक्त में एलडीएल का स्तर नहीं बढ़ाते। इनमें सैचुरेटेड वसा और अनसैचुरेटेड वसा दोनों होती हैं। सीमित मात्रा में तेल का सेवन हानिकारक नहीं, बल्कि आवश्यक है।
(विशेषज्ञ: डॉ. के के अग्रवाल, अध्यक्ष, हार्ट फाउंडेशन ऑफ इंडिया, डॉ. वी. एस. गंभीर, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, कैलाश हॉस्पिटल)

किसे है ज्यादा खतरा
- आपके परिवार में या निकट संबंधियों में से कोई कोरोनरी हार्ट डिसीज या स्ट्रोक से पीड़ित रहा हो तो आपको उच्च कोलेस्ट्रॉल होने की आशंका ज्यादा होगी।
- डायबिटीज, हाइपरटेंशन, किडनी डिसीज, लिवर डिसीज और हाइपर थाइरॉयडिज्म से पीड़ित लोगों में भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक पाया जाता है।
- पुरुषों में महिलाओं के मुकाबले कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर होने की आशंका ज्यादा होती है।
- उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने का खतरा बढ़ता जाता है।
- जिन महिलाओं को मेनोपॉज जल्दी होता है, उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने की आशंका दूसरी महिलाओं के मुकाबले अधिक होती है।

ताकि कोलेस्ट्रॉल हमेशा रहे नियंत्रित
- फल, सब्जियां, साबुत अनाज अधिक मात्रा में खाएं।
- सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन न करें।
- भरपूर सोएं।
- अपना वजन सामान्य रखें।
- धूम्रपान और शराब से बचें।
- ज्यादा से ज्यादा फाइबरयुक्त भोजन का सेवन करें।
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