स्कूलों में खेल एवं शारीरिक शिक्षा का हिस्सा होगा योग

स्कूलों में खेल एवं शारीरिक शिक्षा का हिस्सा होगा योग लखनऊः यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त प्रदेश के 25 हजार से अधिक स्कूलों में जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में बच्चों को योग शिक्षा के अंतर्गत कपालभाती से लेकर हठयोग और ताड़ासन तक के प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक पक्ष की जानकारी दी जाएगी. बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक में पढ़ाए जाने वाले नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा के कोर्स में व्यापक बदलाव किया है.

इसका गजट आठ मई को जारी हो गया था और अब इसे स्कूलों को भेजा जा रहा है ताकि नये सत्र से लागू किया जा सके. पतंजलि योगपीठ के विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद 50-50 नंबर के लिखित एवं प्रायोगिक प्रश्नपत्र में सबसे अधिक 20-20 नंबर योग के लिए निर्धारित हैं. हालांकि इसके प्राप्तांक को श्रेणी निर्धारण में नहीं जोड़ा जाता।

विभिन्न कक्षाओं में योग के पाठः
नौवीं-
योग एवं योगशिक्षा: अर्थ एवं परिभाषा, योग की भ्रांतियां: पारम्परिक एवं आधुनिक। आसन: आसन की परिभाषा, उद्देश्य व आसनों का वर्गीकरण एवं इसके शारीरिक मानसिक व चिकित्सकीय प्रभाव। अष्टांग योग: संक्षिप्त परिचय, यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान व समाधि। किशोरावस्था में शारीरिक एवं मानसिक परिवर्तन व विशेषताएं। किशोरावस्था में मार्गदर्शन एवं योग की भूमिका। सात्विक आहार, राजसिक आहार, तामसिक आहार व आहार संबंधी आवश्यक नियम को शामिल किया गया है।

दसवीं-
योग: कला एवं विज्ञान, योग के प्रकार (मंत्रयोग एवं हठयोग) समन्वित वर्गीकरण, कर्मयोग व प्रमुख योग प्रकारों ज्ञानयोग, कर्मयोग, लययोग, मंत्रयोग, राजयोग व हठयोग का विवेचन। अष्टांग योग-प्राणायाम प्रत्याहार: प्राणायाम वैज्ञानिक व्याख्या, श्वसन प्रक्रिया, आक्सीजनेशन (जारण क्रिया), वैज्ञानिक अनुसंधानात्मक निष्कर्ष। षट्कर्म एवं स्वास्थ्य: षटकर्म का परिचय, जल नेति व सूत्र नेति। किशोरावस्था: संबंध संवेदनाएं, दुष्प्रभाव और यौगिक निदान, किशोरावस्था स्वस्थ्य यौनिकता में किशोरावस्था: परिवर्तन के साथ सावधानी बरतने की अवस्था टॉपिक को रखा गया है।

ग्यारहवीं-
योग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: हिरण्यगर्भशास्त्र, सांख्य एवं औपनिषदिक प्राणवद्यिा के संदर्भ में योग के ऋषि पतंजलि तथा योगसूत्र का उद्भव एवं योगदर्शन की परंपरा। वर्तमान में योगशिक्षा का माहत्व: योग का शरीर क्रियात्मक आधार, योग एक विकासात्मक उत्प्रेरक। अष्टांग योगधारणा एवं ध्यान: धारणा प्रक्रिया, प्रयोगजन व लाभ, ध्यान: स्वरूप एवं परिभाषा। अष्टचक्र एवं पंचकोश: मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, मणिपुर चक्र, हृदय चक्र, अनाहत् चक्र, विशुद्धि चक्र, आज्ञा चक्र, सहस्त्रार चक्र। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा: प्राकृतिक चिकित्सा क्या है, विधियां एवं लाभ में जल, वाष्प, मृत्तिकोपचार चिकित्सा, वायुसेवन अभ्यंग, आतपोपचार, उपवास एवं विश्रमण। प्रैक्टिकल में खड़े होकर किए जाने वाले आसन (ताड़ासन, तिर्यकताड़ासन, वृक्षसन), बैठकर किए जाने वाले आसन (सुखासन)। चन्द्र नमस्कार: परिचय एवं यौगिक दृष्टिकोण, मुद्रा और स्वास्थ्य: मुद्राओं का महत्व, मुद्रा का भेद, बंध और स्वास्थ्य: महाबन्ध, प्राणायाम परिचय: उज्जायी, उद्गीथ, शीतली सत्कारी, योगनिद्रा: योगनिद्रा मनोवैज्ञानिक व्याख्या व त्राटक के प्रकार को कोर्स में रखा गया है।

बारहवीं-
प्राचीन, मध्यकालीन व आधुनिक युग में योग परम्परा एवं उसका विकास, अष्टांगयोग-समाधि: समाधि का अर्थ एवं परिभाषा, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य: वैदिक मान्यता, पारम्परिक मान्यता, आधुनिक मान्यता। किशोरवय की समस्याएं एवं रोग: मानसिक परिवर्तन, समस्याएं एवं उलझनें, योग निर्देशन.

योग एवं आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति: आयुर्वेद क्या है, अर्थ एवं परिभाषा, आयुर्वेद चिकित्सा की विशेषताएं, आयुर्वेद का विषय क्षेत्र। प्रैक्टिकल में पेट के बल किए जाने वाले आसन (नौकासन व भेकासन),
प्राणायाम एवं स्वास्थ्य (कर्णरोगान्तक, सूर्यभेदी, चन्द्रभेदी तथा पूर्व के अभ्यास).
योगनिद्रा: चित्त की वृत्तियां, बीटा, अल्फा, थीटा एवं डेल्टा तरंगे.

शैल यादव, सचिव यूपी बोर्ड का कहना है, नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में संशोधन का गजट स्कूलों को भेजा जा रहा है. जुलाई से शुरू होने जा रहे सत्र में संशोधित पाठ्यक्रम के अनुसार योग शिक्षा प्रदान की जाएगी.
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