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रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष स्वामी आत्मस्थानंद नहीं रहे, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने जताया दुख

रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष स्वामी आत्मस्थानंद नहीं रहे, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने जताया दुख कोलकाता: रामकृष्ण मठ व मिशन के अध्यक्ष स्वामी आत्मस्थानंद जी महाराज का रविवार की शाम को निधन हो गया. वह 99 वर्ष के थे.

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन, बेलूर मठ ने एक बयान में कहा कि बेहतर इलाज के बाद भी उनकी स्थिति पिछले कुछ सालों में गिरती गयी तथा उनका रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान अस्पताल में शाम में साढे पांच बजे निधन हो गया.

बयान में कहा गया है कि उनका अंतिम संस्कार कल किया जाएगा तथा बेलूर मठ का द्वार आज रात तथा कल उनके अंतिम संस्कार तक खुला रहेगा. प्रधानमंत्री ने उनके निधन पर शोक जताते हुए इसे व्यक्तिगत नुकसान बताया.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनकी निधन पर शोक जताते हुए कहा : स्वामी आत्मस्थानंद जी के निधन से मर्माहत हूं. मैं आज दोपहर को उनसे मिलने गयी थी. उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज व धार्मिक सेवा में व्यतीत किया. उनका निधन मानवता के लिए बड़ी क्षति है.

उल्लेखनीय है कि वृद्धावस्था जनित रोगों के कारण वह इस वर्ष फरवरी से रामकृष्ण मिशन सेवा प्रतिष्ठान अस्पताल में भर्ती थे. शनिवार से उनकी तबीयत बिगड़ गयी और स्थिति गंभीर बन गयी थी.

रात में उनकी स्थिति और बिगड़ गयी थी. महाराज को जीवन रक्षण उपकरणों पर रखा गया था. स्वामी आत्मस्थानंद जी महाराज की शारीरिक स्थिति की सूचना पा कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रविवार सुबह को उन्हें देखने अस्पताल गयीं थी. जहां उन्होंने महाराज को देखने के बाद उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों से उनकी शारीरिक स्थिति व उपचार की स्थिति की जानकारी ली थी.
 
उल्लेखनीय है कि स्वामी आत्मस्थानंद जी रामकृष्ण मिशन के 15वें अध्यक्ष थे. उनका जन्म 10 मई, 1919 को बांग्लादेश के ढाका के नजदीक सबाजपुर में हुआ था. उन्होंने 1938 में विजनानंद महाराज से दीक्षा ली थी.

22 वर्ष की आयु में 3 जनवरी, 1941  को बेलूर मठ से जुड़े थे. 1945 में तात्कालीन अध्यक्ष स्वामी विरजानंद ने उन्हें ब्रह्मचर्य की शपथ दिलायी थी तथा 1949 में सन्यास लेने के बाद आत्मस्थानंद के नाम से परिचित हुए थे.
 
आत्मस्थानंद जी महाराज 3 दिसंबर, 2007 को रामकिशन मठ एवं रामकिशन मिशन के 15 वें अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आत्मस्थानंद महाराज के अनुयायी हैं.

राजकोट में रहने के दौरान कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी तथा उनसे योगी बनने की इच्छा जतायी थी, लेकिन आत्मस्थानंद महाराज ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और कहा कि उनकी कहीं अन्य स्थान पर जरूरत है. बाद में उन्हें राजकोट, गुजरात में स्वामी आत्मास्थानंद का आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिला। उसके बाद श्री मोदी राजनीति में आये थे.

प्रधानमंत्री कोलकाता आने पर वह आत्मस्थानंद महाराज से मिलने बेलूर मठ जाया करते थे.
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