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योगी जी सुनिए चंदौली के किसानों का दुखः सूखा, आग, पानी की निकासी और कर्ज माफी

योगी जी सुनिए चंदौली के किसानों का दुखः सूखा, आग, पानी की निकासी और कर्ज माफी उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा किसानों की क़र्ज़ माफ़ी की घोषणा क्या केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के गृह जनपद चंदौली के किसानों की उम्मीद को भी पूरा कर पाएगी? इस पर किसानों की राय क्या है, जानने के लिए जनता जनार्दन किसानों के बीच गई. आइए जानते हैं चंदौली के किसानों का मत.

    उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों को 36 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज माफ कर उन्हें बड़ी राहत दी है. इसे किसी राज्य की ओर से अब तक की सबसे बड़ी ऋण माफी माना जा रहा है. इससे महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी कर्ज माफ करने की मांग तेज होगी। खासकर चुनाव को देखते हुए कर्नाटक और गुजरात में किसानों का आंदोलन तेज हो सकता है।

    यूपीए ने दी थी राहत
    केंद्र की यूपीए सरकार ने 2008 में देश भर के लघु और सीमांत किसानों का करीब 60 हजार करोड़ रुपये का ऋण माफ किया था। इसका लाभ करीब तीन करोड़ लघु और सीमांत किसानों को मिला था। इसके तहत 75 फीसदी कर्ज चुकाने वाले एक करोड़ अन्य किसानों को भी 25 फीसदी कर माफी का एकमुश्त लाभ भी दिया गया. इसमें 1 से 2 हेक्टेयर जोत वाले किसानों को फायदा दिया गया।

    12.6 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण देश भर में
    86.2 हजार करोड़ रुपये का कृषि ऋण उत्तर प्रदेश में
    8-10% के यूपी के राजस्व के बराबर कर्ज माफी की रकम

    पंजाब-महाराष्ट्र में मांग
    -पंजाब में किसानों का ऋण करीब 69 हजार 355 करोड़ रुपये है। कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था।
    -महाराष्ट्र में शिवसेना और अन्य दल किसानों का करीब 30 हजार करोड़ रुपये का ऋण माफ करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं.

    उत्तर प्रदेश में किसानी का हाल

    कार्यबल
    6 करोड़ 58 लाख कृषि क्षेत्र में
    कृषी क्षेत्र में
    3.88 करोड़ (59 %)
    40% परिवार कृषि कार्यों में लगे हुए हैं
    92% इनमें लघु एवं सीमांत किसान हैं

    कर्ज लेने का कारण
    60% बीज, खाद, कीटनाशक आदि खरीदना
    23% कृषि उपकरण की खरीदारी
    17% अन्य

    पंजाब-महाराष्ट्र में मांग
    -पंजाब में किसानों का ऋण करीब 69 हजार 355 करोड़ रुपये है। कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया था।
    -महाराष्ट्र में शिवसेना और अन्य दल किसानों का करीब 30 हजार करोड़ रुपये का ऋण माफ रने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

    आंध्र में 35 हजार करोड़ माफ
    आंध्र प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2014 में किसानों का 50 हजार रुपये तक का ऋण माफ किया था। 27 लाख किसानों को इसका फायदा मिला। राज्य पर करीब 35 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ा था।

    तेलंगाना: 17 हजार करोड़ का कर्ज माफ
    2014 में तेलंगाना में किसानों का करीब 17 हजार करोड़ का कर्ज माफ हुआ था। राज्य ने लगातार तीन साल भयंकर सूखे की मार झेली थी। हालांकि अब भी वहां किसानों की आत्महत्याएं बढ़ी हैं।

    तमिलनाडु में भी राहत
    2006: डीएमके सरकार ने किसानों का करीब 7 हजार करोड़ रुपये माफ किया था। सहकारी बैंकों से ऋण लेने वाले किसानों को इसका लाभ मिला था।

    2016: जयललिता ने सत्ता में आते ही 5780 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ किया था,इसका फायदा सहकारी बैंकों से कर्ज लेने वाले 22 फीसदी किसानों को ही मिला।

    ग्राउंड रिपोर्टः गृह मंत्री राजनाथ सिंह के गृह जनपद चंदौली से किसानों की मन की बात

    बात करते हैं उत्तर प्रदेश के एक ऐसे जिले की, जो अपने आप में खास है. उस जिले का नाम है चंदौली. चंदौली को हम धान का कटोरा के रूप में भी जानते हैं.

    यूपी का यह नक्सल प्रभावित जिला देश के गृह मंत्री का गृह जनपद भी है.

    यहां की पैदावार व उपज कई राज्यों में जाती है. यहां धान की खेती सबसे अधिक नरवन क्षेत्र में होती है.

    ऐसे में किसानों की कर्जमाफी से यहाँ के किसान काफी उत्साहित हैं और किसानों के चेहरे पर तब सबसे ज्यादा ख़ुशी आई जब यहाँ के किसानों की धान और गेहूं की खरीद फरोखस्त के लिए जगह-जगह धान क्रय केंद्र खुलने लगे.

    अब देखना यह होगा कि यूपी की योगी सरकार की नीतियां किसान हितों के लिए कितना साबित होती हैं.

    आंकड़ों की बात की जाए तो लगभग 48 % लोगों की पृष्ठभूमि किसानी की है या हम यों कह सकते हैं कि 48% से अधिक लोगों के पास कुछ  न कुछ खेत है,  जिससे वह अपना व अपने परिवार का भरण पोषण किसानी से करते आ रहे हैं.

    सच की दस्तक और जनता जनार्दन की टीम ने गांव के किसानों के बीच उनकी राय जाननी चाही.

    इस सिलसिले में हम सबसे पहले चंदौली ब्लाक और चकिया विधानसभा के हलुआ नरहन गांव गए. यह एक ऐसा गांव है, जहाँ किसानों की समस्या सबसे ज्यादा है. इस गांव के युवा किसान सौरभ तिवारी पर हमारी नज़र गयी. वह चिलचिलाती धूप में अपने खेत को दुखी मन से देख रहे थे. हमने अपना परिचय देते हुए उनकी समस्या पूछा?

    सौरभ तिवारी ने बताया कि किसानों की कर्जमाफी कर योगी जी की कैबिनेट ने जो किया वह ठीक किया, किन्तु इसमें वह किसान घाटे में रहे जो कर्ज लेकर समय से पैसा चुका देते हैं. सरकार को ईमानदार किसानों को अपनी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं करना चाहिए. ऐसे किसानों के लिए ब्याज दर माफ़ होनी चाहिए, साथ ही किसानों को खाद, बीज कम दाम पर उपलब्ध हो और उनके फसल का सही ठीक ढंग से बाजार मूल्य मिले, जिससे आत्म सम्मान के साथ किसान खुद पर गौरवान्वित होते हुए आगे बढ़े और गर्व करे कि हम चंदौली के किसान हैं

सौरभ तिवारी के अनुसार सरकार अगर सिंचाई के लिए समय से बिजली मुहैया करा दे जो 24 घंटे मिले, नहरों की सफाई समय से हो ताकि टेल तक सिंचाई और बीज के लिए पानी समय से पहुंचे, और किसानों को सूखा पड़ने पर उचित मुआवजा बिना भेदभाव के मिले, तो भी सरकार की सफलता मानी जाएगी, और इससे युवाओं का पलायन तो रुकेगा ही, खेतीबाड़ी में भी युवाओं की रूचि बढ़ेगी.

    इसके बाद हम वीरों की शहीदी धरती धानापुर पहुंचे और वहां कादिराबाद के किसान राजेश सिंह से मिले. किसानों की समस्या पर राजेश सिंह ने बताया कि किसान को सबसे अधिक दिक्कत अनाज को बेचने में ही आती है, लेकिन योगी सरकार की पहल के बाद अब लगता है किसानों की सारी परेशानी ख़त्म हो जायेगी. राजेश सिंह के मुताबिक आपदा राहत का पैसा सीधे किसानों के खाते में जाना चाहिए. किसानों को अपने अनाज का उचित मूल्य भी मिलना चाहिए, जिससे किसान अपने परिवार का भरण पोषण कर सके.

    इसके बाद हम सब चंदौली जनपद के फेसुड़ा गांव, तहसील सकलडीहा विधानसभा सैयदराजा के किसान वकील यादव जी से मिले. यह पुराने और अनुभवी किसान भी हैं. वकील यादव के साथ कई दर्जन किसान बैठे थे. सभी से हमने बारी-बारी उनकी राय जाननी चाही. सभी  किसानों ने बताया की जल निकासी ही हमारे गांव की प्रमुख समस्या है. हमारे गांव फेसुड़ा के आस-पास के गांव जैसे पंचदेवरा, बरंगा, जमुनीपुर, दिघवट सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां पानी निकासी नहीं होने के कारण रवि फसल की समय से बुआई नहीं हो पाती. इससे इस इलाके के हम जैसे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है. सरकार द्वारा भी हम लोगों    की मदद नहीं हो पाती. सबसे अटल सच्चाई यह है कि हम किसान खाद बीज बीमा योजना का प्रीमियम देते हैं लेकिन आज तक किसी भी किसान को इसका लाभ नहीं मिला. अब योगी सरकार से आस जगी है कि कब हम किसानों के दिन भी लौटेंगे ताकि हम किसान कह सकें गर्व से कि हम किसान हैं और हमारे लिए कोई सुलभ रास्ता योगी सरकार बनाएं.

    इसी सैयदराजा विधानसभा के बगही गांव के रहने वाले किसान बलराम यादव बताते हैं कि भइया सबसे बड़ी समस्या यही है कि योगी जी ने किसानों की जो कर्जमाफी की है वह अभी तक कागजों पर ही सीमित है. साथ ही हम किसान योगी सरकार से यह उम्मीद करते हैं कि लागत से अधिक अनाज बेचने पर बाजार मूल्य मिले साथ ही किसानों को बीज मुफ़्त मिले या उचित दर पर मिले और अधिक से अधिक सब्सिडी मिले. कीटनाशक दवा भी हम किसानों को मुफ़्त मिले.

    यह तो थी चंदौली के किसानों के मन की बात जो 'जनता जनार्दन' और 'सच की दस्तक' टीम ने अप्रैल के महीने में किसानों के मन की बात चिलचिलाती धुप में जाना. चंदौली में इस बार गेंहू की फसल में आग भी अधिक लगी है. यह देखना दिलचस्प होगा कि जिला प्रशासन किसानों की कितना हितैषी बनती है और क्या किसान हितों में योजना बनाकर कार्य करती है.
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