तकनीक का काम है सहयोग देना, निर्भर करना नहीं: कुल्लू साहित्य महोत्सव में रचनाकार

तकनीक का काम है सहयोग देना, निर्भर करना नहीं: कुल्लू साहित्य महोत्सव में रचनाकार कुल्लूः देव भूमि कुल्लू में हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादेमी, शिमला और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के सयुंक्त तत्वावधान में गवर्मेंट डिग्री कॉलेज कुल्लू में दो दिवसीय साहित्य महोत्सव की शुरुआत हुई.

इस मौके पर मंगलाचरण की एक सांस्कृतिक प्रस्तुति कालेज की छात्राओं ने दीं. इस अवसर पर अकादेमी के उपाध्यक्ष डॉ प्रेम शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर साहित्य समारोह का शुभारंभ किया. न्यास की तरफ से डॉ ललित मंडोरा ने भी दीप प्रज्ज्वलित किया.

इस मौके पर सचिव अकादेमी डॉ अशोक हंस ने स्वागत करते हुए इस आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा, निश्चित ही हम ऐसे आयोजन को आगे भी नियमित रूप से न्यास के सहयोग से चलाना चाहेंगे. इससे पूर्व अकादमी द्वारा आयोजित पुस्तक एवं पाण्डुलिपि प्रदर्शिनी का उद्धाटन उपाध्यक्ष डॉ प्रेम शर्मा ने किया.

न्यास संपादक डॉ ललित किशोर मंडोरा ने न्यास का परिचय देते हुए कहा, न्यास,अपने अध्यक्ष श्री बल्देव भाई शर्मा जी के दिशा-निर्देशों के तहत पुस्तक उन्नयन की दिशा में अग्रसर है. न्यास की कोशिश यही है कि न्यास के साथ रचनाकारों का एक सतत संवाद बना रहे,इस दिशा में भी न्यास प्रतिबद्ध है.

न्यास की पुस्तकों से जुडने की भी डॉ मंडोरा ने अपील की. उन्होंने यह भी कहा, पुस्तकें बेहतर मित्र हो सकती हैं, बशर्ते आप उन्हें अपने जीवन में सम्मानपूर्वक दर्जा प्रदान  करें. न्यास की कई योजनाओं की भी जानकारी डॉ मंडोरा ने उपस्तिथ श्रोताओं और पाठकों से सांझा की.

अकादेमी के उपाध्यक्ष डॉ प्रेम शर्मा ने बताया कि इस दो दिवसीय साहित्य महोत्सव कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के बेहतरीन रचनाकारों को निमंत्रित किया गया है. निकट भविष्य में भी राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,भारत के साथ अकादेमी अन्य दुर्गम क्षेत्रों में भी योजना बना रही है, जिसमें हिमाचल के दुर्गम इलाकों को शामिल किया जायेगा.

समारोह में संगीत विभागध्यक्ष डॉ सूरत ठाकुर की पुस्तक कुल्लू की देव परम्परा का लोकार्पण मंचस्थ विद्वानों ने किया. इस अवसर पर आमंत्रित रचनाकारों का हिमाचली टोपी और शाल से सम्मानित किया गया.

संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ ओम प्रकाश शर्मा भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. न्यास के आगामी कार्यक्रम हेतु उन्होंने न्यास को अपनी और से सहयोग करने के लिए आमंत्रित भी किया.

गाजियाबाद से आमंत्रित साहित्यकार श्री सुभाष चन्दर ने अपने वक्तव्य में कहा, आगे बढ़ने के लिए पुस्तकों को पढ़ना होगा क्योंकि अपनी संस्कृति, अपनी भाषा के प्रति लगाव का ज्ञान और किताबों से वह शक्ति प्राप्त होंगी. इसलिए बढ़ने के लिए पुस्तकों को पढ़ना बेहद जरुरी नहीं नितांत अनिवार्य भी है. पुस्तक की मरती हुई संस्कृति को बचाने के लिए पुस्तकों के प्रति अलख को जगाना ही होगा.

न्यास के दूसरे सत्र में परिचर्चा पुस्तक के सामने भविष्य की वैश्विक चुनौतियां विषय पर बोलते हुए डॉ नंदलाल शर्मा ने कहा, आज किंडल, सोशल मीडिया पुस्तक पर हावी हुआ है, लेकिन मैं यह समझता हूं क़ि कितने प्रतिशत लोग इन उपकरणों को अपना समय देते होंगे, ये उपकरण महंगे भी हैं और बैटरी भी खाते हैं, यानी रिचार्ज की समस्या बनी रहती है.



मेरा तो यह भी मानना है कि इसके ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग और आंखों की बीमारियां जन्म ले रही हैं, याददाश्त जाने की समस्या भी बनी हुई है जिसका उपयोग करने में आज युवा वर्ग ज्यादा सक्रिय हैं. मेरा मानना है कि अभिभावकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरुरी है, जितना आपका और हमारा सजग रहना है.

वहीँ शिमला से आमंत्रित सुश्री कंचन शर्मा ने कहा, मेरे जन्मदिन पर मेरी मौसी ने मुझे बाल पत्रिका चंपक दी, उसका ही नतीजा है कि मैं पुस्तकों से जुड़ पाई. ज्यादा उपकरणों से एल्जाइमर जैसी बीमारियां संक्रमित होती दिख रही है. सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए पुस्तकों को बचाना बेहद जरुरी है. आज हमें अपने बच्चों को टेलीविजन से बचाना पड़ेगा. इंटरनेट की वजह से आज रचनाकार बहुतायात में दिखने लगा है. यह एक बड़ी समस्या है जो बताती है कि हमारे पारंपरिक मूल्यों का बहुत तेजी से हनन हुआ है. हमें अपने चश्मे को बदलने की आवश्यकता है, तभी हमारा विजन क्लीयर होगा.

हिमाचल की जनजातीय संस्कृति के महत्वपूर्ण लेखक डॉ तोपदन ने कहा, आज पढ़ने वालों की संख्या का इजाफा हुआ है,बेशक आप हम ई-पुस्तक के फायदे गिना लें, लेकिन पुस्तक का अपना वर्चस्व है. उसकी भूमिका को कोई नहीं छेड़ सकता.इसलिए पुस्तक के प्रति पाठकों की रूचि को विकसित करना होगा. इसमें सरकार के साथ निजी क्षेत्रों की ऐसी संस्थाओं को आगे लाना होगा, तभी पुस्तक का भविष्य बचाया जा सकता है.

लाहौल स्पीति से आए वरिष्ठ लेखक डॉ छेरिंग दोरजे ने कहा, दुनिया की एक पुरानी सभ्यता मिस्र की रहीं. पत्थर पर उन्होंने उकेरा और पर अपनी बात कही. दुनिया में सबसे पहले छपाई का काम चीन में शुरु हुआ. पुस्तकों के प्रति हमें सम्मान रखना पड़ेगा, तभी पुस्तकों के प्रति हमारी संस्कृति का उन्नयन होगा. ताम्रपत्र और भोजपत्र हमारे सामने आज भी उदारहण हैं, जो अपनी पारंपरिक मूल्य के साथ हमारे कई संग्रहालय में मौजूद हैं. संस्कृत महाविद्यालय के डॉ ओम शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये.

हिमाचल के वरिष्ठ साहित्यकार पालमपुर से डॉ सुशील कुमार फुल्ल ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा, विषय को देखते हुए इतना कहूंगा कि न्यास ने बेहद प्रासंगिक विषय का चयन परिचर्चा हेतु रखा है. मेरा यह मानना है कि शब्द के समक्ष वैश्विक वर्चस्व जब इतना हावी है पर उसके सामने भी डिजिटल इंडिया का सब्जेक्ट उभर का आया है,ऐसे में भी पुस्तक का भविष्य उज्जवल है.

गाँव-देहात तक भी मोबाईल पहुँच गया है. पर अभी भी पुस्तकों के प्रति अलख जगाने की आवश्यकता है. पुस्तक का विकल्प न आज है, न कल होगा, न कभी भी. पर हमारी संस्कृति जिसमें पुस्तक संस्कृति भी शामिल है उसका विस्तार हुआ है, लेकिन पुस्तक का वर्चस्व बना रहेगा, आने वाली कई शताब्दियों तक. इंटरनेट ने वाकई हमारी बात को आवाज दीं है.

हमारे कई टेलीविजन धारावाहिक देखने के बाद पुस्तक की मांग पैदा हुई, जिनमें तमस, बाजीराव प्रमुख हैं,जिनमें रामायण, महाभारत की कृतियाँ तक शामिल हैं. निसंदेह पुस्तकें आज भी प्रासंगिक हैं,कल भी रहेंगी. हां,तकनीक का काम सहयोग देना है, उसपर निर्भर होना नहीं. सत्र का संचालन डॉ सूरत ठाकुर ने किया.

सनद रहे इस महोत्सव में चिंतक, विद्वान रचनाकारों को शामिल किया गया है, जिसमें व्यंग्य और कविता के हस्ताक्षरों को जोड़ा गया है. इसके साथ ही साहित्य अकादेमी, दिल्ली से सम्मानित युवा रचनाकार नीलोत्प्ल मृणाल (डार्क हॉर्स के लेखक)और प्रेम की नगरी आगरा(उत्तरप्रदेश)से दीपक सरीन भी कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं.

व्यंग्य आलोचना के मर्मज्ञ विद्वान श्री सुभाष चन्दर भी महोत्सव में शामिल हुए. हिमाचल के वरिष्ठ लेखकों में डॉ सुशील कुमार फुल्ल, डॉ प्रत्युष गुलेरी, डॉ ओम प्रकाश सारस्वत, डॉ सुदर्शन वशिष्ठ, अशोक गौतम, श्री मनमोहन बाबा, शैली किरण, रेखा वशिष्ठ, विनोद भावुक, डॉ दयानंद गौतम सहित कुल्लु शहर के भी पच्चीस कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे.

स्थानीय कवियों में प्रमुख हैं, वरयाम सिंह, हुकुम ठाकुर, ओम कुमार शर्मा, छेरिंग दोरजे, सतीश लोप्पा, कविता कटोच, सैनी अशेष, कृष्ना ठाकुर, जयदेव विद्रोही, दीपक कुल्व्वी समेत सोम लता शामिल हैं.
यह आयोजन शहर के गवर्मेंट डिग्री कालेज में आयोजित हो रहा है. समारोह का संचालन अकादेमी के सांस्कृतिक प्रभारी डॉ कर्म सिंह ने किया.
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