Wednesday, 23 January 2019  |   जनता जनार्दन को बुकमार्क बनाएं
आपका स्वागत [लॉग इन ] / [पंजीकरण]   
 

स्वामी दयानंद सरस्वती और मोदी भक्त

स्वामी दयानंद सरस्वती और मोदी भक्त नई दिल्लीः यह कहानी स्वामी दयानंद सरस्वती के 'सत्यार्थ प्रकाश' से प्रधानमंत्री जी के भक्तों के लिए।
-
एक खाखी का चेला ‘स्रीगने साजनमें’ बोलते हुए कुएं पर जल भरने गया।

कुएं पर एक पण्डित बैठा था। वह उसे ‘स्रीगने साजनमें’ बाेलते देखकर कहने लगा, अरे साधु! अशुद्ध बोल रहा है। बोल : ‘श्री-ग-णे-शा-य न म:’।

खाखी के चेले ने आंखें तरेरीं और झट लोटा भर गुरु जी यानी खाखी महाराज के पास जा पहुंचा। गुरुजी से कहने लगा : ए बम्मन मेरे घोखने को असूद्ध कहता है।

यह सुन कर खाखी जी झट उठे और कुएं पर जाकर पण्डित से कहने लगे : ए पंडत, तूं मेरे चेले को बहकाता है? तूं गुरु की लंडी क्या पढ़ा है? देख, तूं एक परकार का पाठ जान्ता है, हम तीन परकार का जान्ते हैं। सुन : ‘स्रीगनेसाजन्नमें’, ‘स्रीगनेसा यन्नमें’ ‘श्रीगनेसाय नमें’।

(पण्डित) सुनो साधु जी! विद्या की बात बहुत कठिन है। बिना पढ़े नहीं आती।

(खाखी) चल बे, सब बिदबान तो हम ने रगड़ मारे। गांजे-भांग और सुलफे में घोट एकदम सब उड़ा दिये। सन्तों का घर बड़ा है। तू बाबूडा क्या जाने?

(पण्डित) देखो! जो तुम ने विद्या पढ़ी होती तो ऐसे अपशब्द क्यों बोलते? सब प्रकार का तुम को ज्ञान होता।

(खाखी) अबे तू हमारा गरू बन्ता है? तेरा उपदेस हम नहीं सुन्ते।
(पण्डित) सुनो कहां से? बुद्धि ही नहीं है। उपदेश सुनने समझने के लिये विद्या चाहिये।

(खाखी) जो सब बेद छास्त्र पढ़े, लेकिन सन्तों को नहीं माने तो जानो कि वह कूछ बी नहीं पढ़ा। तूम लोगों का काम है हम सन्तों की सेवा करनी। मीन मेख नीकालना नहीं।

(पण्डित) हां! हम सन्तों की सेवा करते हैं परन्तु तुम्हारे से हुर्दंगों की नहीं करते, क्योंकि सन्त, सज्जन, विद्वान्, धार्मिक, परोपकारी पुरुषों को कहते हैं।

(खाखी) देख! हम रात दिन नंगे रहते, धूनी तापते, गांजा चरस के सैकड़ों दम लगाते, तीन-तीन लोटा भांग पीते, गांजे, भांग, धतूरा की पत्ती की भाजी (शाक) बना खाते, संखिया और अफीम भी चट निगल जाते, नशा में गर्क रात दिन बेगम रहते, दुनिया को कुछ नहीं समझते, भीख मांगकर टिक्कड़ बना खाते, रात भर ऐसी खांसी उठती जो पास में सोवे उस को भी नींद कभी न आवे, इत्यादि सिद्धियां और साधूपन हम में हैं, फिर तू हमारी निन्दा क्यों करता है? चेत बाबूड़े! जो हम को दिक्क करेगा हम तुम को भस्म कर डालेंगे।

(पण्डित) ये सब लक्षण असाधु मूर्ख और गवर्गण्डों के हैं; साधुओं के नहीं! सुनो! ‘साध्नोति पराणि धर्मकार्याणि स साधु ’ जो धर्मयुक्त उत्तम काम करे, सदा परोपकार में प्रवृत्त हो, कोई दुर्गुण जिसमें न हो, विद्वान्, सत्योपदेश से सब का उपकार करे उस को ‘साधु’ कहते हैं।

(खाखी) चल बे, तू साधू के कर्म क्या जाने? सन्तों का घर बड़ा है। किसी सन्त से अटकना नहीं, नहीं तो देख एक चीमटा उठाकर मारेगा, कपाल फुड़वा लेगा।

(पण्डित) अच्छा खाखी! जाओ अपने आसन पर, हम से बहुत गुस्से मत हो। जानते हो राज्य कैसा है? किसी को मारोगे तो पकड़े जाओगे, कारावास भोगोगे, बेंत खाओगे वा कोई तुम को भी मार बैठेगा फिर क्या करोगे? यह साधु का लक्षण नहीं।

(खाखी) चल बे चेले! किस राक्षस का मुख दिखलाया।

(पण्डित) तुम ने कभी किसी महात्मा का संग नहीं किया है। नहीं तो ऐसे जड़, मूर्ख नहीं रहते।

(खाखी) हम आप ही महात्मा हैं। हम को किसी दूसरे की गर्ज नहीं।

(पण्डित) जिन के भाग्य नष्ट होते हैं उन की तुम्हारी सी बुद्धि और अभिमान होता है।

खाखी चला गया आसन पर और पण्डित घर को गये। जब सन्ध्या आर्ती हो गई तब उस खाखी को बुड्ढा समझ बहुत से खाखी ‘डण्डोत-डण्डोत’ कहते साष्टांग करके बैठे।

खाखी जी ने सबसे प्रश्न पूछने शुरू किए।

खाखी ने एक-एक चेले को बुलाया। एक युवा साधु रामदास आगे आया तो खाखी बोले : अबे रामदासिया! तू क्या पढ़ा है?

(रामदास) महाराज! मैंने ‘वेस्नुसहसरनाम’ पढ़ा है।

अबे गोविन्ददासिये! तू क्या पढ़ा है?

(गोविन्ददास) मैं ‘रामसतबराज’ पढ़ा हूं; अमुक खाखी जी के पास से।

तब नरेंद्रदास बोला : महाराज आप क्या पढ़े हैं?

(खाखी) हम गीता पढ़े हैं।

(रामदास) किसके पास?

(खाखी) चल बे छोकरे! हम किसी को गुरु नहीं करते। देख! हम ‘परागराज’ में रहते थे हम को अक्खर नहीं आता था। जब किसी लम्बी धोती वाले पण्डत को देखता था तब गीता के गोटके में पूछता था कि इस कलंगीवाले अक्खर का क्या नाम है? ऐसे पूछता-पूछता अठारा अध्याय गीता रगड़ मारी। गुरु एक भी नहीं किया।

इस कहानी के अंत में स्वामी दयानंद सरस्वती लिखते हैं : देश में ऐसे-ऐसे साधु और ऐसे-ऐसे उनके शिष्य हैं। मूर्ख शिष्य और वज्रमूर्ख गुरु। आंध के अंधे, गांठ के पूरे।विद्या और ज्ञान के ऐसे शत्रुओं को अविद्या और मूढ़ता घर करके नहीं ठहरे तो कहां जाए?

# वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन की फेसबुक वाल से साभार.
वोट दें

क्या 2019 लोकसभा चुनाव में NDA पूर्ण बहुमत से सत्ता में आ सकती है?

हां
नहीं
बताना मुश्किल
 
stack