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जल्लीकट्टू उत्सव शुरू: हजारों ले रहे हिस्सा, 2 की मौत, 83 घायल

जल्लीकट्टू उत्सव शुरू: हजारों ले रहे हिस्सा, 2 की मौत, 83 घायल मदुरे: पुडुकोट्टई जिले में आज जल्लीकट्टू के दौरान 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 अन्य लोगों को मामूली चोटें आई. वहीं इस खेल के आयोजन के लिए एक ‘स्थायी समाधान’ की मांग को लेकर मदुरै में प्रदर्शन के दौरान शरीर में पानी की कमी से एक व्यक्ति की मौत हो गई.

पुलिस ने कहा कि पुडुकोट्टई में कई लोगों और सांडो ने जल्लीकट्टू में हिस्सा लिया और इस दौरान इस घटना में घायल हुए लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए एक अध्यादेश लाए जाने के साथ पुडुकोट्टई जिले में रपुसाल सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस खेल का आयोजन किया गया.

पुडुकोट्टई के रपुसाल में जल्लीकट्टू के दौरान एक सांड द्वारा सींग घुसा देने से 2 लोगों की मौत हो गई. इस बीच, मदुरै में विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे 48 वर्षीय चन्द्रमोहन की डिहाइड्रेशन के चलते मृत्यु हो गई. तिरनेलवेली में लड़कियों सहित कुछ विद्यार्थी विरोध प्रदर्शन में बेहोश हो गए जिसके बाद उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया.

पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम यहां झंडी दिखाकर जलीकट्टू की शुरुआत करने वाले थे, लेकिन यहां जारी विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए यह आयोजन कहीं और किए जाने की तैयारी होने लगी. फिर विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए मदुरै में इसका आयोजन फिलहाल टाल दिया गया है.

उधर तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में जलीकट्टू का आयोजन शुरू हो चुका है. तमिलनाडु के राज्यपाल विद्यासागर राव ने जलीकट्टू से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी और इसके साथ ही प्रदेश में जलीकट्टू के आयोजन का रास्ता साफ हो गया.

सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश को राज्यपाल द्वारा मंजूरी मिलने के बाद तय किया गया कि मुख्यमंत्री पन्रीरसेल्वम मदुरै के अलंगनल्लूर में रविवार को जलीकट्टू की शुरुआत करने वाले थे, लेकिन यहां प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध खत्म नहीं किया है. उनकी मांग है कि जलीकट्टू पर लगाए गए प्रतिबंध को स्थायी तौर पर खत्म कर दिए जाए.

मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारी युवाओं से अपील की है कि वे जलीकट्टू के आयोजन में शामिल हों और आंदोलन खत्म करें. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की पूरी कोशिश होगी कि जलीकट्टू पर प्रतिबंध स्थायी रूप से हट जाए.

पन्नीरसेलवम ने कहा कि अध्यादेश की जगह एक मसौदा विधेयक बिना किसी बाधा के 23 जनवरी से शुरू हो रहे तमिलनाडु विधानसभा सत्र में पेश और स्वीकार किया जाएगा. इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षाएं पूरी करने के लिए सारी कोशिशें की जा रही हैं.

अन्नाद्रमुक की अंतरिम महासचिव शशिकला ने जलीकट्टू को फिर से शुरू कराने का श्रेय एक तरह से खुद को दिया. उन्होंने कहा कि उन्होंने ही पार्टी को निर्देश दिया था कि वह इस खेल को फिर से शुरू कराने के लिए समयबद्ध तरीके से प्रयास करे.

शशिकला ने कहा, 'हमारी पार्टी अम्मा के पदचिह्नों पर चल रही है. मैं लोगों के लिए हूं और लोगों के कारण हूं. मेरा पूरा ध्यान लोगों के लिए काम करने पर केंद्रित है.

तमिल लोगों के अधिकार और समवेदनाएं मेरी दो आंखें हैं. यही कारण है कि जैसे ही तमिलनाडु के युवाओं ने जलीकट्टू के लिए आंदोलन शुरू किया, तो मैंने और पार्टी ने उनको पूरा समर्थन दिया. तभी मैंने पार्टी नेताओं को इसका जल्द हल तलाशने का निर्देश दिया.'

शशिकला ने अध्यादेश को एक तरह से तमिल लोगों की शक्ति की जीत बताया। उन्होंने इस मामले में केंद्र सरकार के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया.

मदुरै के डीएम के वीरा राघव ने कहा कि जिला प्रशासन आलंगल्लुर में जलीकट्टू खेल का आयोजन करने को पूरी तरह से तैयार है। इस मामले में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.

मदुरै के अलावा अन्य शहरों में तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी अन्नाद्रमुक के नेता जलीकट्टू के आयोजन की अगुआई करेंगे। पन्नीरसेलवम ने आंदोलनकारी युवाओं से अपील की कि वे जलीकट्टू के आयोजन में शामिल हों और आंदोलन खत्म करें.

आंदोलनकारी युवाओं ने कहा कि हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक आधिकारिक रूप से जलीकट्टू पर प्रतिबंध हटा नहीं लिया जाता है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जलीकट्टू पर छूट छह महीने के लिए दी गई है, लेकिन वह चाहते हैं कि इस खेल पर प्रतिबंध स्थायी रूप से हट जाए.

अन्नाद्रमुक ने केंद्र सरकार को आगाह भी किया कि अगर वह क्षेत्रीय आकांक्षाओं और तमिलनाडु के लोगों के हितों को लगातार 'नजरअंदाज' करती है, तब इसके खतरनाक निहितार्थ होंगे.

पार्टी के सांसदों के साथ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात के बाद पार्टी के नेता और लोकसभा उपाध्यक्ष एम थंबीदुरई ने शिकायती लहजे में कहा, 'हमारे राज्य की ओर से उठाए कई मुद्दों को केंद्र नजरअंदाज कर रहा है. एक देश, एक टैक्स जीएसटी के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन एक भाषा, एक संस्कृति की अवधारणा संघवाद के लिए अच्छी नहीं है.

"हम कावेरी, मुल्लापेरियार, कच्चातीवू, तमिल मछुआरे, श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा और तमिल संस्कृति के प्रतीक जल्लीकट्टू का मुद्दा उठाते रहे हैं. तमिल संस्कृति भी भारतीय संस्कृति है.'

तमिलनाडु में पांच दिनों से जलीकट्टू के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सराहना करते हुए मशहूर अभिनेता कमल हासन ने कहा है कि मैं इन छात्रों का प्रशंसक हो गया हूं. जल्लीकट्टू समर्थकों ने शनिवार को मदुरै में ट्रेनें रोकीं.

दक्षिणी रेलवे ने अपनी कुछ ट्रेनें रद्द कर दीं, जबकि कुछ के मार्ग में बदलाव भी किया. वहीं, तिरुचिरापल्ली में जलीकट्टू के समर्थन में प्रदर्शन स्थल पर सुरक्षा में तैनात एक होमगार्ड ने प्रदर्शन के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित युवाओं को यह कहकर हैरान कर दिया कि उन्हें किसानों के लिए भी संघर्ष करना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने पोंगल के वक्त खेले जाने वाले इस खेल जलीकट्टू पर रोक लगा दी थी. पशुओं के अधिकारों की रक्षा करने के काम करने वाली संस्थाओं ने इस खेल को जानवरों के लिए हानिकारक बताया था वहीं तमिलनाडु की जनता इसे अपने संस्कृति का एक अहम हिस्सा बताते हुए प्रतिबंध को वापस लेने की मांग कर रही थी.

कुछ दिन पहले अभिनेता कमल हासन और रजनीकांत ने इस खेल का समर्थन करते हुए कहा था कि सांड़ों की लड़ाई का यह खेल तमिल संस्कृति का हिस्सा है.

रजनीकांत ने कहा था कि चोट से बचने के लिए खेल के नियमन को लेकर नियम बनाए जा सकते हैं, लेकिन क्या किसी संस्कृति को अस्वीकार करना सही है.
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