भारतीय वायुसेना के विमान एएन-32 की 24/7 तलाश जारी, नौसेना , तटरक्षक दल भी जुटा

जनता जनार्दन रक्षा संवाददाता , Jul 23, 2016, 8:48 am IST
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भारतीय वायुसेना के विमान एएन-32 की 24/7 तलाश जारी, नौसेना , तटरक्षक दल भी जुटा 	 नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी के ऊपर से उड़ान भरते समय शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के लापता हुए परिवहन विमान एएन-32  का चौबीसो घंटॅ तलाशी अभियान जारी है, पर पूरी रात चले तलाशी और बचाव अभियान में इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

इस विमान में 29 लोग सवार थे. विमान में छह चालक दल के सदस्यों के अलावा वायुसेना, थलसेना, नौसेना एवं तटरक्षक के जवान सवार थे.

अधिकारियों ने बताया कि इस विमान ने चेन्नई के ताम्ब्रम वायुसेना हवाईअड्डे से शुक्रवार सुबह 8.30 बजे उड़ान भरी थी और इसे 11.30 बजे पोर्ट ब्लेयर पहुंचना था.

रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने विमान की तलाश में व्यापक बचाव और खोज अभियान 24/7 चलाया जा रहा है. अभियान में विमान, हेलीकाप्टर, पनडुब्बियों एवं जहाजों को लगाया गया है। अभियान रात भर जारी रहा।

सूत्रों के अनुसार, विमान से आखिरी बार संपर्क उसके उड़ान भरने के 15-20 मिनट बाद हुआ। नौ बजे के बाद रडार पर विमान दिखाई देना बंद हो गया. रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘विमान ने शुक्रवार सुबह 8.30 बजे उड़ान भरी थी और 11.30 बजे उसे पोर्ट ब्लेयर पहुंचना था, लेकिन वह पहुंचा नहीं। खोज अभियान जारी है.’’

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता डी. के. शर्मा ने कहा कि इस खोज तथा राहत अभियान में पी-8 निगरानी विमान, एक डोर्नियर और चार जहाज जुटे हुए हैं और अन्य सहायता भी ली जा रही है.

भारतीय नौसेना ने कहा कि इस अभियान में तैनात जहाजों में शिवालिक का युद्धपोत आईएनएस सहयाद्रि, मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत और रणविजय, वाहक कामरोता, किर्च, कार्मुक, कोरा, कुथार, टैंकर जहाज आईएनएस शक्ति और आईएनएस ज्योति, आईएनएस घड़ियाल तथा गश्ती पोत आईएनएस सुकन्या शामिल हैं.

रूस में निर्मित एएन-32 गर्मी और कठिन स्थितियों में अपनी बेहतरीन उड़ान भरने की क्षमता और सैन्य परिवहन के रूप में उपयोग होने वाले विमान के रूप में जाना जाता है.

दो इंजन वाले इस विमान का इस्तेमाल मुख्य रूप से माल परिवहन, स्काइड्राइवर, पैराट्रूपरों सहित यात्रियों को लाने ले जाने और युद्ध में भी किया जाता है.

बेशक ये विमान लापता है लेकिन सेना के लिए ये काफी भरोसेमंद विमान रहा है. वायुसेना के पास ऐसे 100 के करीब विमान हैं. इस विमान को वायुसेना में 1984 में शामिल किया गया था. दुनियाभर में ऐसे करीब 250 विमान सेवा में हैं.

इस विमान को नागरिक और सैनिक दोनों हिसाब से डिजाइन किया गया है. वैसे ये विमान रूस के बने हुए हैं जिसमें दो इंजन होते हैं. ये विमान हर तरह के मौसम में उड़ान भर सकता है.

रूस के बने हुए ये दो इंजन वाले विमान काफी भरोसेमंद हैं. इसका इस्तेमाल हर तरह के मैदानी, पहाड़ी और समुद्री इलाकों में किया जाता रहा है. चाहे वो सैनिकों को पहुंचाने की बात हो या समान के ढ़ोने की.

इस विमान की क्षमता क्रू सहित करीब 50 लोग या 7.5 टन पैसेंजर ले जाने की है। 530 किलोमीटर प्रतिघंटा उड़ान भरने वाले इस विमान का रेंज 2500 किलोमीटर तक है. ये विमान बिना ईंधन भरे जाने के चार घंटे तक उड़ान भर सकता है.

वायुसेना के पश्चिमी कमान के पूर्व प्रमुख एयर मार्शल एके सिंह ने कहा कि इस विमान का ट्रैक रिकॉर्ड काफी बढ़िया रहा है और इसको अपग्रेड भी किया गया है, लेकिन इसका अचानक लापता होना दुर्भाग्यपूर्ण है.

वायुसेना में मौजूदा एएन-32 ने केवल आधुनिक साजो समान से लैस है बल्कि ये नए संचार सिस्टम,  बेहतर लैडिंग व्यवस्था जैसे सिस्टम से भी लैस है. अपग्रेड होने के बाद इसकी लाइफ 15 से 20 साल तक बढ़ गई है. दूसरे रूसी विमान की तरह ये ज्यादा आरामदायक तो नहीं है लेकिन सैन्य और नागरिक जरूरतों के लिहाज बेहत उत्तम है.
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