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हममें होगी खामी तो हमले होंगे ही

जनता जनार्दन संवाददाता , Jul 17, 2011, 16:13 pm IST
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हममें होगी खामी तो हमले होंगे ही  नई दिल्ली: मुम्बई में बीते बुधवार के सिलसिलेवार तीन बम विस्फोटों के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र में सुधार की आवश्यकता पर फिर बहस तेज हो गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि विस्फोटों ने एक बार फिर देश के आंतरिक सुरक्षा तंत्र की खामियों को उजागर किया है। अपनी ही जमीन पर आतंकवादी तैयार हो रहे हैं, लेकिन खुफिया एजेंसियों को उनकी भनक तक नहीं मिलती।

देश को आतंकवादी गतिविधियों और अपनी ही जमीन पर पनपने वाली विध्वंसकारी ताकतों से बचाने के लिए 1861 के ब्रिटिशकालीन पुलिस अधिनियम में सुधार की आवश्यकता है। एक बड़ी समस्या पुलिसकर्मियों की संख्या में कमी है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में 1,00,000 लोगों पर 120 पुलिसकर्मी हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर यह अनुपात 270 पुलिसकर्मियों का है।

विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य पुलिस की खुफिया शाखाओं के अतिरिक्त गुप्तचर ब्यूरो (आईबी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित 20 बड़ी-छोटी खुफिया एजेंसियां होने के बावजूद देश में आतंकवादी हमले रोकने की क्षमता नहीं है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जमीनी स्तर पर खुफिया तंत्र मजबूत नहीं हैं।

रक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी के अनुसार, देश की 1.21 अरब की आबादी से खुफिया जानकारी एकत्र करने के लिए आईबी के पास केवल 5,000 एजेंट हैं। इसमें भी उनका प्राथमिक काम सत्तारूढ़ दलों के लिए राजनीतिक जानकारी जुटाना होता है।

जमीनी स्तर पर सूचनाएं जुटाने पर बल देते हुए साहनी ने कहा कि यदि ऐसा होता तो हमें मुम्बई एक बार फिर हुए हमलों के बारे में जानकारी जुटाने में इतना वक्त नहीं लगता।

वहीं, पूर्व पुलिस अधिकारी किरण बेदी ने केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि खुफिया एजेंसियों का गठन कर सरकार संकट का प्रबंधन कर रही है, उसे रोक नहीं रही।

प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को सुरक्षा तंत्र का आंख-कान बताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक जमीनी स्तर पर सूचनाएं एकत्र करने के लिए लोग नहीं होंगे, इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी।

यहां तक की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को आतंकवाद विरोधी नीति को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा कि जब तक सरकार अपनी नीति नहीं बदलती मुम्बई जैसे आतंकवादी हमले होते रहेंगे।

अपने ब्लॉग पर आडवाणी ने लिखा है, "जहां तक मुम्बई हमले का सवाल है, आप न तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री (पृथ्वीराज चव्हाण) और न ही गृह मंत्री (आर. आर. पाटील) पर आरोप लगा सकते हैं। इसके लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार जिम्मेदार है।"

उनके अनुसार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को समझना होगा कि जब तक सरकार की आतंकवाद विरोधी नीति में आमूलचूल परिवर्तन नहीं होगा, ऐसे हमले होते रहेंगे।

भाजपा नेता ने कहा कि बुधवार को मुम्बई में हुए तीन सिलसिलेवार बम विस्फोटों के लिए कांग्रेस को बलि का बकरे ढूंढने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने लिखा, "आम आदमी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री द्वारा विस्फोटों के लिए सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) पर आरोप लगाने से हैरान है महज इसलिए, क्योंकि गृह मंत्रालय उसके पास था।"
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