'खिडक़ी बंद मत करिए, शिक्षा से जुड़े विचारों का निर्बाध प्रवाह होने दीजिए'

'खिडक़ी बंद मत करिए, शिक्षा से जुड़े विचारों का निर्बाध प्रवाह होने दीजिए' नई दिल्ली: शैक्षणिक आजादी का समर्थन करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि विचारों के निर्बाध प्रवाह के लिए खिड़किया बंद नहीं की जानी चाहिए। ऐसा माहौल तैयार करना चाहिए जिसमें विभिन्न भागों के विचारों का सम्मिलन हो सके।

देश में उच्च शिक्षा की स्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि नूतन पहल और अनुसंधान पर अधिक जोर देना चाहिए। शिक्षकों एवं शिक्षाविदों को उनका उपयुक्त श्रेय दिया जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से  द एजुकेशन प्रेसीडेंट शीर्षक पुस्तक की पहली प्रति प्राप्त करते हुए मुखर्जी ने कहा कि इस संबंध में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए कोष का निरंतर प्रवाह, विभिन्न अधिकारियों द्वारा पहचान एवं उनका अनुकूल हस्तक्षेप जरूरी है।

उन्होंने कहा, हमें शिक्षा की आजादी देनी चाहिए...हमें विभिन्न भागों के विचारों का सम्मिलन हो सके...वे आएं और उनका निर्बाध प्रवाह हो।

राष्ट्रपति ने पुस्तक प्राप्त करने के बाद कहा, आप जमीन पर खड़े रहिए, कोई नुकसान नहीं है। किन्तु खिडकियां बंद नहीं करिये। जैसा कि गांधी जी ने कहा, ‘ मैं बह जाने से इंकार करता हूं किंतु मैं खिड़किया बंद नहीं करूंगा। खिडक़ी से आने वाला प्रवाह मेरे कमरे से गुजरना चाहिए ताकि मैं खुद को समृद्ध कर सकूं।

इस पुस्तक को ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने निकाला है। इसमें मुखर्जी द्वारा 2012 में राष्ट्रपति बनने के बाद से इस विषय पर उनकी गतिविधियों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है।
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