नकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण गिर रहा है भारतीय शेयर बाजार

जनता जनार्दन डेस्क , May 08, 2016, 13:33 pm IST
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नकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण गिर रहा है भारतीय शेयर बाजार मुंबईः नकारात्मक वैश्विक संकेतों, कंपनियों की चौथी तिमाही में निराशाजनक नतीजों और मुनाफा कमा कर निकलने वाले निवेशकों के कारण भारतीय शेयर बाजार में पिछले हफ्ते गिरावट का दौर रहा.

इसके कारण पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार का रुख सपाट से लेकर नकारात्मक रहा, क्योंकि प्रमुख शेयरों में गिरावट देखी गई। समीक्षाधीन हफ्ते में निफ्टी के प्रमुख 51 शेयरों का सूचकांक 116.35 अंक या 1.48 फीसदी की गिरावट के साथ 7,733.45 अंक पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स के प्रमुख 30 शेयरों का सूचकांक 378.12 अंकों या 1.47 फीसदी गिरावट के साथ 25,228.50 अंक पर बंद हुआ.

बीएसई के सेक्टरों में मेटल सूचकांक में 3.6 फीसदी और आईटी सूचकांकमें 2.7 फीसदी की गिरावट देखी गई। एंजल ब्रोकिंग के उपाध्यक्ष और शोध प्रमुख वैभव अग्रवाल ने बताया, "नकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण भारतीय बाजारों में अस्थिरता बनी रही और प्रमुख शेयरों में थोड़ी गिरावट देखी गई है।"

जियोजित बीएनपी पारिबास फाइनेंसियल सर्विसेज के मुख्य बाजार विश्लेषक आनंद जेम्स ने बताया कि पिछले हफ्ते एफपीआई (विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों) द्वारा लगातार शेयरों की बिक्री करने के कारण भारतीय बाजार गिरे हैं।

शेयर एक्सचेंज से मिले आंकड़ों के पता चलता है कि एफपीआई ने समीक्षाधीन हफ्ते में 747.60 करोड़ के शेयरों की बिकवाली की है। नेशनल सिक्युरिटी डिपॉजिटरी लि. (एनएसडीएल) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2 से 6 मई के बीच एफपीआई ने 773.62 करोड़ रुपये या 116.58 करोड़ डॉलर की निकासी की। वैश्विक बाजारों में एशियाई बाजारों में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की चीन और जापान में मंदी की संभावना की चेतावनी के कारण मंदी देखी गई।

वहीं, अन्य अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में वैश्विक बाजार में कमोडिटी की कीमतें गिरने और आगे इसमें गिरावट जारी रहने के अनुमानों के कारण गिरावट देखी गई। जेम्स ने बताया, "दुनिया भर से मिले आर्थिक आंकड़ों से यह पता चलता है कि उत्पादन गतिविधियां कमजोर पड़ रही हैं और इसी के कारण इस हफ्ते हर जगह गिरावट का रूख रहा।"

"जापान जहां हफ्ते के दौरान ज्यादातर बंद रहा, वहीं अन्य एशियाई बाजारों जैसे चीन में कारोबार लाल निशान में देखे गए और शुक्रवार को चीन में 3 फीसदी की गिरावट देखी गई।"

जेम्स आगे कहते हैं कि अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने के कारण आगे भी उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा.

इसके अलावा निवेशकों द्वारा मुनाफा निकालने और कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों के निराशाजनक रहने के कारण भी घरेलू बाजार में निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हुई। इसके अलावा अप्रैल में सेवा क्षेत्र में हल्की कमी का आंकड़ा सामने आने से भी निवेशकों को निराशा हुई है.

इस साल हालांकि अच्छे मॉनसून की भविष्यवाणी और निचले स्तर पर खरीदारी के कारण गिरावट को थामने में सफलता मिली। साथ ही लोकसभा में वित्त विधेयक 2016 को 55 संशोधनों के साथ मंजूरी मिलने से और संसद द्वारा अन्य प्रमुख आर्थिक विधेयकों को हरी झंडी देने के कारण भी निवेशकों को मनोबल मजबूत रहा.
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